17 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 229वां दिन (लीप वर्ष में 230वां दिन) है। साल में अभी और 136 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 17 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 17 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
बांसडीह को 1942 में ही करा लिया था आजाद: आजादी के दीवानों ने 17 अगस्त को तिरंगा फहराकर अंग्रेजी सत्ता को दी चुनौती
‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान 17 अगस्त 1942 का दिन उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में बांसडीह के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन लगभग 20 हजार ग्रामीण क्रांतिकारियों ने एकजुट होकर ब्रिटिश हुकूमत को खुली चुनौती दी थी और बांसडीह के थाने, तहसील, डाकखाने व सरकारी खजाने पर कब्जा कर ‘स्वतंत्र सरकार’ की घोषणा कर दी थी।

जनता के इस अभूतपूर्व विद्रोह ने बलिया को ‘बागी बलिया’ की ऐतिहासिक पहचान दी और स्वाधीनता संग्राम को एक नई दिशा दिखाई।
17 अगस्त 1942 की सुबह आसपास के गांवों के करीब 20,000 जनसैलाब ने बांसडीह थाने और तहसील को चारों तरफ से घेर लिया। जनसैलाब का विकराल रूप देखकर दरोगा और नायब दरोगा ने बिना किसी विरोध के आत्मसमर्पण कर दिया। क्रांतिकारी नेताओं ने ब्रिटिश झंडे को उतारकर थाने की इमारत पर गर्व से तिरंगा फहराया और वहां मौजूद सभी लोगों ने अंग्रेजी शासन की जगह स्वतंत्र सरकार को मानने की शपथ ली। इसके बाद थाने के भीतर दाखिल होकर अंग्रेजों के सरकारी कागजातों को आग के हवाले कर दिया गया।
थाने पर कब्जे के बाद क्रांतिकारियों का विशाल समूह तहसील परिसर की ओर बढ़ा। सरकारी खजाने पर तैनात सिपाहियों ने जनता का आक्रोश देखकर अपनी बंदूकें आंदोलनकारियों को सौंप दीं। तहसील भवन में आग लगाकर अभिलेख नष्ट कर दिए गए और खजाने में रखे 32,065 रुपये की सरकारी राशि को क्रांतिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिया। अंग्रेजों के तहसीलदार को हिरासत में लेकर गजाधर शर्मा को स्वतंत्र बांसडीह का प्रथम तहसीलदार घोषित किया गया।
तहसील के बाद जनसमूह ने रेवती बीज गोदाम से करीब 1,500 बोरे बीज ले लिए और पोस्ट ऑफिस के सरकारी दस्तावेज नष्ट कर दिए। क्षेत्र में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्रांतिकारी नेताओं ने एक ‘शांति समिति’ का गठन किया और स्वयंसेवकों को जिम्मेदारियां सौंपीं। तहसील व थाने के कर्मचारियों को स्वतंत्र सरकार के प्रति निष्ठा और वफादारी की शपथ दिलाई।
तत्कालीन ब्रिटिश हेड कांस्टेबल मोहम्मद मुइन की रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई कि 15 से 20 हजार लोगों की भीड़ ने सरकारी तंत्र को पूरी तरह से उखाड़ फेंका था। बांसडीह की इस ऐतिहासिक घटना ने बलिया में समानांतर सरकार (चित्तू पांडे के नेतृत्व में) की नींव को और मजबूत किया था।
1947: आज ही के दिन सार्वजनिक हुई थी ‘रेडक्लिफ लाइन’, जानिए 5 हफ्ते में भारत के बंटवारे और लाहौर के पाकिस्तान जाने की अनकही कहानी
15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश हुकूमत से आजाद हो चुका था, लेकिन सीमाओं का फैसला अभी बाकी था। आजादी के ठीक दो दिन बाद यानी 17 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान के बीच की विभाजन रेखा को सार्वजनिक किया गया, जिसे आज हम ‘रेडक्लिफ लाइन’ के नाम से जानते हैं।
कागज पर खींची गई इस एक लकीर ने न केवल एक देश के दो टुकड़े किए, बल्कि रातों-रात करोड़ों लोगों के घर, जमीन और मातृभूमि छीनकर उन्हें शरणार्थी बना दिया।

3 जून 1947 को लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत की आजादी का प्लान पेश किया, जिसे जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना स्वीकार कर चुके थे। फैसला तय था – भारत आजाद होगा, लेकिन धर्म के आधार पर दो हिस्सों में बंट जाएगा।
ब्रिटिश सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना था कि कौन सा इलाका भारत में रहेगा और कौन सा पाकिस्तान में। इस काम के लिए ब्रिटिश सरकार ने लंदन के एक वकील सिरिल रेडक्लिफ को चुना।
रेडक्लिफ इससे पहले कभी भारत नहीं आए थे और न ही उन्हें यहां की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का कोई ज्ञान था। माउंटबेटन ने इसी वजह से उन्हें चुना ताकि वे निष्पक्ष रहें। रेडक्लिफ को दो सीमा आयोगों (पंजाब सीमा आयोग और बंगाल सीमा आयोग) का अध्यक्ष बनाया गया। उनकी सहायता के लिए चार वकील (दो हिंदू और दो मुस्लिम) दिए गए।
8 जुलाई 1947 को रेडक्लिफ भारत पहुंचे। करोड़ों लोगों की किस्मत का फैसला करने के लिए उन्हें केवल 5 हफ्ते (15 अगस्त तक) का समय दिया गया।

बंगाल और पंजाब दोनों ही प्रांतों में हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग बराबर थी। रेडक्लिफ ने 12 अगस्त 1947 तक अपना काम पूरा कर लिया था, लेकिन दंगों के डर से माउंटबेटन ने इस रिपोर्ट को 15 अगस्त के बाद सार्वजनिक करने का फैसला किया। 17 अगस्त को यह सीमा रेखा आधिकारिक रूप से सामने आई।
विभाजन के समय लाहौर में हिंदू और सिख आबादी बहुत अधिक थी, साथ ही व्यापार और संपत्तियों पर भी उनका प्रभुत्व था। सभी को यही उम्मीद थी कि लाहौर भारत का हिस्सा बनेगा।
बाद में एक इंटरव्यू में रेडक्लिफ ने खुद कबूल किया था कि “मैंने शुरुआत में लाहौर को भारत के हिस्से में ही रखा था। लेकिन फिर मैंने देखा कि अगर लाहौर भारत को दे दिया गया, तो पाकिस्तान के पास पंजाब वाले हिस्से में कोई भी बड़ा और विकसित शहर नहीं रह जाएगा। इसलिए मैंने लाहौर को पाकिस्तान को देने का फैसला किया।”
17 अगस्त को सीमा रेखा सार्वजनिक होते ही इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन शुरू हो गया। करोड़ों लोगों को अपने सदियों पुराने घर छोड़कर सीमा के आर-पार जाना पड़ा, जिसमें भारी हिंसा और कत्लेआम हुआ।
विभाजन की रेखा खींचने का काम पूरा करने के तुरंत बाद रेडक्लिफ भारत छोड़कर ब्रिटेन लौट गए और वे अपने जीवन में फिर कभी भारत वापस नहीं आए। उन्होंने इस काम के लिए मिलने वाली अपनी फीस (40,000 रुपये) भी लेने से इनकार कर दिया था।
1998: अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने मोनिका लेविंस्की से संबंधों की बात मानी, जानिए व्हाइट हाउस के सबसे बड़े स्कैंडल की पूरी कहानी
दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के राजनीतिक इतिहास में 17 अगस्त 1998 का दिन एक ऐसे भूचाल के रूप में दर्ज है, जिसने व्हाइट हाउस की साख और अमेरिकी राष्ट्रपति के पद को हिलाकर रख दिया था।
इसी दिन तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने आखिरकार टेलीविज़न पर देश के सामने यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उनके व्हाइट हाउस की इंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ अंतरंग संबंध थे।
यह मामला तब शुरू हुआ जब 22 वर्षीय मोनिका लेविंस्की ने व्हाइट हाउस में एक समर इंटर्न के रूप में काम करना शुरू किया था। मोनिका के अनुसार, नवंबर 1995 से मार्च 1997 के बीच उनके और राष्ट्रपति क्लिंटन के बीच आपसी सहमति से 9 बार शारीरिक संबंध बने थे।

जब इस अफेयर की खबर मीडिया में छनी शुरू हुई, तो बिल क्लिंटन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि मेरा मिस लेविंस्की के साथ कोई यौन संबंध नहीं था।
स्वतंत्र काउंसिल केनेथ स्टार की जांच और पुख्ता सबूतों के दबाव के बीच 17 अगस्त 1998 को क्लिंटन ग्रैंड जूरी के सामने पेश हुए और उसी रात राष्ट्र के नाम संदेश में अपने झूठ और मोनिका के साथ संबंधों को स्वीकार कर लिया।
इस पूरे स्कैंडल को बेनकाब करने में पेंटागन की कर्मचारी लिंडा ट्रिप की सबसे अहम भूमिका रही। लेविंस्की ने अपनी दोस्त लिंडा ट्रिप पर भरोसा करके क्लिंटन के साथ अपने संबंधों की हर बात साझा की थी। लिंडा ने बिना मोनिका को बताए उन सभी फोन कॉल्स की गुप्त रिकॉर्डिंग कर ली। लिंडा ट्रिप ने ये फोन रिकॉर्डिंग्स स्वतंत्र काउंसिल केनेथ स्टार को सौंप दीं, जिससे क्लिंटन के पास मुकरने का कोई रास्ता नहीं बचा।

संबंधों की बात छिपाने और अदालत में झूठी गवाही देने के आरोपों के कारण बिल क्लिंटन पर अमेरिकी इतिहास का दूसरा महाभियोग चलाया गया। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचले सदन) ने क्लिंटन पर महाभियोग का प्रस्ताव पास कर दिया था। लेकिन 1999 में अमेरिकी सेनेट (ऊपरी सदन) में हुए मतदान में क्लिंटन के खिलाफ आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका, जिससे वे बरी हो गए और उनकी राष्ट्रपति की कुर्सी बच गई।
इस विवाद के बावजूद बिल क्लिंटन ने अपना राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा किया और अपनी मजबूत आर्थिक नीतियों के कारण जनता के बीच अपनी लोकप्रियता बनाए रखने में सफल रहे।
17 अगस्त के दिन को इतिहास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की इन घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…
1836: ब्रिटेन की संसद ने जन्म, विवाह और मृत्यु से संबधित पंजीकरण को अपना लिया था।
1869: लंदन की टेम्स नदी पर पहली अंतरराष्ट्रीय नौकायन (बोट रेस) प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। पहला मुकाबला ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड के बीच हुआ था।
1909: भारतीय क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा को लंदन की पेंटनविल जेल में फांसी दी गई। उन्होंने 1 जुलाई 1909 को ब्रिटिश अधिकारी सर विलियम हट कर्जन वायली की हत्या की थी।
1913: बाबा सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल के नेतृत्व में अमेरिका में गदर पार्टी की स्थापना हुई थी और उनके क्रांतिकारी विचारों व पत्र ‘गदर’ का पंजाबी संस्करण इस दौरान शुरू हुआ था।
1915: चक्रवाती तूफान की वजह से गेल्वस्टोन टेक्सस में 275 लोगों की मौत हुई थी।
1917: तुर्की के खिलाफ इटली ने युद्ध की घोषणा की।
1941: पूर्वी जर्मनी सरकार ने बर्लिन की दीवार का काम पूरा किया।
1945: इंडोनेशिया ने नीदरलैंड से आजादी की घोषणा की।
1947: भारत की आज़ादी के बाद पहली ब्रिटिश सैन्य टुकडी स्वदेश रवाना। तत्कालीन गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने मुंबई से सैनिकों को विदाई दी।
1960: गैबॉन ने फ्रांस से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त की, जिसके बाद लियोन म्बा देश के पहले प्रधानमंत्री बने।
1978: पहली बार हॉट एयर बैलून से अटलांटिक सागर को पार किया गया था। बेन अब्रुजो, मैक्सी एंडरसन और लेरी न्यूमैन ने 5,021 किलोमीटर का सफर पूरा कर इतिहास रचा था। इससे पहले 17 कोशिशें की जा चुकी थीं, लेकिन एक बार भी सफलता नहीं मिली थी। इन प्रयासों में 7 लोगों की मौत भी हो गई थी।
1982: आज दुनिया में आई थी पहली सीडी (कंपेक्ट डिस्क)। आज ही के दिन जर्मनी के लैंगनहागेन कारखाने में पॉलीग्राम ने दुनिया की पहली कमर्शियल ऑडियो कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) बनाई थी, जो रिचर्ड स्ट्रॉस की एल्बम “अल्पाइन सिम्फनी” थी। इस दिन से सीडी संगीत प्रेमियों के लिए बाजार में उपलब्ध हुई।
1988: पाकिस्तानी राष्ट्रपति जिया-उल-हक की एक विमान हादसे में मौत हो गई।
1999: तुर्की के इज़मित क्षेत्र में 7.4 तीव्रता के भूकंप से 18,373 लोगों की मौत हुई और करीब 5 लाख लोग बेघर हो गए ।
2000: ब्रिटेन ने चिकित्सा अनुसंधान के लिए मानव भ्रूण कोशिकाओं की क्लोनिंग की आधिकारिक अनुमति दी। इस ऐतिहासिक कदम का उद्देश्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए नई चिकित्सा पद्धतियों को विकसित करना था।
2002: रूस ने दलाई लामा को अपने देश में दौरे के लिए वीजा देने से इन्कार किया। रूस ने यह कदम चीन के साथ अपने संबंधों को ध्यान में रखकर उठाया था।
2005: पूरा बांग्लादेश बम धमाकों से दहला। राजधानी ढाका समेत 64 में से 63 जिलों में 300 जगहों पर करीब 500 बम विस्फोट हुए थे। 11.30 बजे इन धमाकों की शुरुआत हुई थी और आधे घंटे के अंदर-अंदर सभी बम फट गए थे। आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिदीन बांग्लादेश ने इस घटना की जिम्मेदारी ली थी। इन धमाकों में दो लोग मारे गए और 100 अन्य घायल हो गए।
2008: अमेरिका के महान् तैराक माइकल फेल्प्स एक ही ओलंपिक खेल में आठ स्वर्ण पदक हासिल करने वाले इतिहास के पहले खिलाड़ी बनकर अनूठा कीर्तिमान स्थापित किया।
2010: इराक की राजधानी बगदाद में सेना के 11वीं डिवीजन के मुख्यालय के पास भर्ती के लिए जमा युवकों के बीच हुए आत्मघाती बम हमले में 60 लोग मारे गए और 125 अन्य घायल हो गए।
2010: वर्ष 2010 की दूसरी तिमाही (जून में समाप्त) में चीन (1340 अरब डॉलर) ने जापान (1290 अरब डॉलर) को पीछे छोड़ते हुए अमेरिका के बाद विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का स्थान हासिल किया था।
17 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1916: अमृतलाल नागर – बीसवीं शताब्दी के सुप्रसिद्ध और लोकप्रिय हिन्दी साहित्यकार। उन्हें मुख्य रूप से उनके ऐतिहासिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक उपन्यासों के लिए जाना जाता है। भारत सरकार ने उन्हें 1981 में पद्म भूषण से सम्मानित किया था।
1932: वी.एस. नायपॉल – भारतीय मूल के प्रसिद्ध नोबेल पुरस्कार विजेता (2001) और बुकर पुरस्कार विजेता ब्रिटिश साहित्यकार।
1941: बिमल जालान – भारतीय रिज़र्व बैंक के 20वें गवर्नर (1997-2003) और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री। वे भारत के वित्त सचिव और संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) के मनोनीत सदस्य भी रहे हैं।
1941: वॉय. वी. रेड्डी – भारतीय रिज़र्व बैंक के 21वें गवर्नर (2003-2008) और देश के जाने-माने अर्थशास्त्री। उन्हें 2010 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था।
1957: सचिन पिलगांवकर – हिंदी और मराठी फिल्मों के दिग्गज अभिनेता, निर्देशक और निर्माता।
1961: अनामिका – साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी भाषा की जानीमानी कवयित्री।
1970: जिम कूरियर – अमेरिकी पूर्व नंबर एक पेशेवर टेनिस खिलाड़ी हैं, जिन्होंने अपने शानदार करियर में 4 ग्रैंड स्लैम एकल खिताब (दो ऑस्ट्रेलियन ओपन और दो फ्रेंच ओपन) जीते तथा फरवरी 1992 में पहली बार विश्व के नंबर-1 पुरुष खिलाड़ी बने।
17 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1949: पुलिन बिहारी दास – भारतीय क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी, जो ढाका अनुशीलन समिति के संस्थापक नेताओं में थे।
1958: जॉन मार्शल – ब्रिटिश पुरातत्वविद् और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक (1902-1928), जिन्होंने भारत में पुरातात्विक अनुसंधान को व्यवस्थित रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके कार्यकाल में हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की सभ्यता के अवशेषों की खोज और अध्ययन को विशेष महत्व मिला।
1982: फ़ादर कामिल बुल्के – बेल्जियम में जन्मे भारतीय साहित्यकार और हिंदी विद्वान, जिन्होंने हिंदी भाषा और साहित्य के अध्ययन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रसिद्ध कृति ‘रामकथा : उत्पत्ति और विकास’ है तथा उनका हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश भी अत्यंत प्रसिद्ध है।
2007: दशरथ मांझी – बिहार का माउंटेन मैन। वे बिहार में गया के करीब गहलौर गांव के एक गरीब मजदूर थे। केवल एक हथौड़ा और छेनी लेकर इन्होंने अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊँचे पहाड़ को काट के एक सड़क बना डाली। दशरथ मांझी के जीवन पर ‘मांझी – द माउंटेन मैन’ फिल्म भी बनी है जो 21 अगस्त 2015 को रिलीज हुई थी।
2020: पंडित जसराज – भारतीय शास्त्रीय संगीत के विश्वविख्यात गायक, जिन्होंने मेवाती घराने की गायकी को देश-विदेश में प्रतिष्ठित किया। उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण सहित अनेक सम्मान मिले।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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