3 जून: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 3 जून वर्ष का 154वां (लीप वर्ष में यह 154वां) दिन है। साल में अभी 211 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 3 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 3 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
3 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 3 June in History)
1947 को आज के दिन भारत-पाक बंटवारे का ऐलान हुआ, इसमें शामिल एक शर्त से आजादी के साथ मिली कश्मीर समस्या
आज ही के दिन सन 1947 को भारत के दो टुकड़े करने का ऐलान हुआ था। 3 जून 1947 को वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत के दो हिस्से करके भारत और पाकिस्तान बनाने का ऐलान किया था। इस बंटवारे ने लाखों लोगों को अपने ही देश में शरणार्थी बना दिया। कहा जाता है कि इस दौरान करीब सवा करोड़ लोग विस्थापित हुए। इतिहास में किसी राजनीतिक कारण से होने वाला ये सबसे बड़ा विस्थापन था। बंटवारे के दौरान हुए दंगों में लाखों लोग मारे गए।
15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन इस आजादी के साथ ही भारत का बंटवारा भी हुआ। भारत की आजादी से एक दिन पहले 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान एक नया मुल्क बना।
दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद एक तरफ देश में आजादी के लिए आवाजें बुलंद होने लगी थीं, वहीं दूसरी तरफ मजहबी ताकतें भी सिर उठाने लगी थीं। जगह-जगह सांप्रदायिक दंगे होने लगे थे। देश में उथल-पुथल का माहौल था। आखिरकार फरवरी 1947 में ब्रिटिश सरकार ने भारत को आजाद करने का ऐलान किया, जिसकी जिम्मेदारी भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपी गई।
माउंटबेटन एक योजना लेकर आए जिसके तहत उन्होंने प्रस्ताव दिया कि प्रांतों को स्वतंत्र उत्तराधिकारी राज्य घोषित किया जाए और फिर उन्हें यह चुनने की अनुमति दी जाए कि उन्हें संविधान सभा में शामिल होना है या नहीं। इस योजना को ‘डिकी बर्ड प्लान’ कहा गया। जवाहरलाल नेहरू ने इस प्लान का विरोध किया और कहा कि इससे देश टुकड़ो में बंट जाएगा और अराजकता का माहौल पैदा होगा। ये अप्रैल 1947 की बात है।
इसके बाद माउंटबेटन ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं के साथ लंबे विचार-विमर्श के बाद 3 जून 1947 को भारत को दो देशों में विभाजित करने की योजना का खाका पेश किया। उन्होंने कहा कि भारत की राजनीतिक समस्या का समाधान करने के लिए विभाजन ही आखिरी विकल्प है।
प्लान में कहा गया कि भारत को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटकर दो देश बनाए जाएंगे। एक भारत और दूसरा पाकिस्तान। दोनों देशों का अलग संविधान होगा और अलग संविधान सभा का गठन किया जाएगा। भारत की रियासतों को छूट दी गई कि वो अपनी मर्जी से या तो पाकिस्तान का हिस्सा बन जाएं या भारत में रहें। दोनों में नहीं मिलना है तो स्वतंत्र भी रह सकती हैं। 18 जुलाई 1947 के दिन ब्रिटिश पार्लियामेंट ने इस प्लान को पारित कर दिया।
माउंटबेटन प्लान से भारत को आजादी तो मिली, लेकिन इसके साथ ही कश्मीर जैसी जटिल समस्या भी पैदा हो गई जो आज भी दोनों देशों में विवाद की एक बड़ी वजह है।
ऑपरेशन ब्लू स्टार की शुरुआत, जो इंदिरा गांधी की हत्या की वजह बना
भारतीय सेना ने आज ही के दिन 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया था। पंजाब के अमृतसर में स्थित हरमंदिर साहिब, यानी स्वर्ण मंदिर परिसर पर खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों ने कब्जा कर लिया था। स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानियों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए शुरू हुआ ये ऑपरेशन 3 दिनों तक चला। इसमें 500 से भी ज्यादा लोगों की मौत हुई। इनमें सेना के जवान और अधिकारी भी शामिल थे। भारी गोलीबारी के बाद आखिरकार भिंडरावाले मारा गया और 7 जून को स्वर्ण मंदिर पर भारतीय सेना का नियंत्रण हो गया।
इस ऑपरेशन ने सिख समुदाय में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ गुस्सा पैदा कर दिया, जिसका नतीजा केवल 4 महीने बाद ही सामने आ गया। 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही 2 सिख सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 3 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1789: एलेक्स मैकेंज़ी ने मैकेंज़ी नदी (कनाडा) की खोज की।
1818: तीसरे एंग्लो-मराठा युद्ध का अंत- ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध का अंत हुआ, जिसके बाद भारत के एक बड़े हिस्से पर ब्रिटिश राज स्थापित हो गया।
1828: ग्रान कोलंबिया-पेरू युद्ध में राष्ट्रपति सिमोन बोलिवर ने पेरू पर युद्ध की घोषणा की।
1856: क्यूलन व्हिपल ने स्क्रू मशीन का पेटेंट कराया।
1886: युगांडा के नमगोंगो में 24 ईसाइयों को जिंदा जला दिया गया।
1915: रवींद्रनाथ टैगोर को नाइटहुड की उपाधि- ब्रिटिश सरकार ने साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को ‘नाइटहुड’ (सर) की उपाधि से नवाजा था। (हालांकि, 1919 के जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने इसे लौटा दिया था)।
1918: हिंदी को राजभाषा बनाने का प्रस्ताव-महात्मा गांधी की अध्यक्षता में इंदौर में ‘हिन्दी साहित्य सम्मेलन’ का आयोजन हुआ था। इसी सम्मेलन में एक प्रस्ताव पारित कर हिंदी को राजभाषा के रूप में मान्यता देने की वकालत की गई थी।
1959: सिंगापुर को स्वशासन का अधिकार- सिंगापुर को एक स्वशासित (Self-governing) राज्य घोषित किया गया और ली कुआन येव वहां के पहले प्रधानमंत्री बने।
1962: एयर फ्रांस की फ्लाइट 007 ओर्ली एयरपोर्ट पर क्रैश हो गई। विमान में सवार 132 यात्रियों में से 130 की मौत हो गई।
1965: नासा का ‘जेमिनी-4’ मिशन लॉन्च- अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने ‘जेमिनी-4’ अंतरिक्ष मिशन लॉन्च किया था। इसी मिशन के दौरान एडवर्ड व्हाइट अंतरिक्ष में चहलकदमी (Space Walk) करने वाले पहले अमेरिकी बने थे।
1968: कनाडा ने निकेल के सिक्कों को चांदी में बदलने की घोषणा की।
1972: देश का पहला आधुनिक युद्धक पोत सेना को समर्पित– भारत में निर्मित पहले आधुनिक युद्धपोत ‘आईएनएस नीलगिरी’ (INS Nilgiri) को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश की नौसेना को समर्पित किया था। इसे मुंबई के मझगांव डॉक पर बनाया गया था।
1985: सरकारी दफ्तरों में 5-डे वीक- भारत सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सप्ताह में 5 दिन काम (सोमवार से शुक्रवार) करने के नियम को लागू किया था।
1987: वानुअतु लेबर पार्टी की स्थापना की गयी।
1989: जापान के एनालॉग शहर में दुनिया का पहला एचडीटीवी प्रसारण शुरू किया गया।
1999: कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सीमा में चले गए फ्लाइट कैप्टन नचिकेता राव को पाकिस्तान ने भारत को सौंपा।
1999: यूगोस्लाविया द्वारा कोसोवो शांति योजना को मंजूरी।
1999: मिस्र के राष्ट्रपति हुश्नी मोबारक लगातार चौथी बार राष्ट्रपति चुने गये।
2004: केन फ़ोर्ड नासा के अंतरिक्ष खोज पैनल के नेतृत्वकर्ता बने।
2008: जापानी प्रयोगशाला के साथ अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का डिस्कवरी यान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुँचा। वैज्ञानिकों को सौर परिवार के बाहर अब तक का सबसे छोटा ग्रह मिला।
2009: मीरा कुमार को लोकसभा स्पीकर चुना गया। वे लोकसभा की पहली महिला स्पीकर बनीं।
2013: उत्तरी-पूर्वी चीन के जिलिन प्रांत में एक मुर्गी फार्म में आग लगने से 119 लोगों की मौत हो गयी।
2024: हैदराबाद अब आंध्र प्रदेश की संयुक्त राजधानी नहीं रही- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत तय की गई 10 साल की समयसीमा 2 जून 2024 को समाप्त हो गई। इसके बाद, 3 जून 2024 से हैदराबाद आधिकारिक तौर पर केवल तेलंगाना की राजधानी रह गया, और आंध्र प्रदेश से इसका संयुक्त राजधानी का अधिकार पूरी तरह समाप्त हो गया।
2024: दिनेश कार्तिक का संन्यास: भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी विकेटकीपर-बल्लेबाज दिनेश कार्तिक ने आधिकारिक तौर पर क्रिकेट के सभी प्रारूपों से अपने संन्यास की घोषणा की।
2025: भारत का पहला एआई विशेष आर्थिक क्षेत्र (AI SEZ): छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में भारत के पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशल इकोनॉमिक जोन (AI SEZ) की घोषणा की गई, जो देश में तकनीकी निवेश और एआई रिसर्च का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में कदम है।
3 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 3 June)
1844: बालकृष्ण भट्ट – आधुनिक हिन्दी साहित्य के शीर्ष निर्माता। आज की गद्य प्रधान कविता का जनक इन्हें माना जाता है। बालकृष्ण भट्ट एक सफल नाटककार, पत्रकार, उपन्यासकार और निबन्धकार थे। भट्ट जी ने निबन्ध, उपन्यास और नाटकों की रचना करके हिन्दी को एक समर्थ शैली प्रदान की।
1867: हरविलास शारदा – भारत के प्रसिद्ध शिक्षाविद, राजनेता, समाज सुधारक, न्यायविद और लेखक। वह बाल-विवाह प्रथा पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से, बहुचर्चित ‘शारदा ऐक्ट’ के प्रकल्पक थे।
1901: जी. शंकर कुरुप- मलयालम भाषा के मशहूर कवि। वे 1965 में देश के सबसे प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ के पहले विजेता बने थे।
1924: तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का जन्म हुआ
तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री। मुथूवेल करुणानिधि वे तमिलनाडु के द्रविड़ राजनीतिक दल ‘द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम’ (डीएमके) के प्रमुख थे। एम. करुणानिधि को 1969 में डीएमके के संस्थापक सी. एन. अन्नादुराई की मौत के बाद तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बना दिया गया था। वे पांच बार (1969-71, 1971-76, 1989-91, 1996-2001, 2006-2011) तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे। एम. करुणानिधि ने अपने 60 साल के राजनीतिक कॅरिअर में अपनी भागीदारी वाले हर किसी चुनाव में अपनी सीट जीतने का रिकॉर्ड बनाया।
1929: चिमनभाई पटेल – गुजरात के पाँचवें मुख्यमंत्री थे। वह 18 जुलाई, 1973 से 9 फ़रवरी, 1974 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे।
1930: पूर्व रक्षा मंत्री और समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का जन्म
ट्रेड यूनियन नेता थे, जो राजनेता, पत्रकार और भारत के रक्षामंत्री रहे। उन्होंने व्यापारिक संघ के नेता, पत्रकार, राजनेता और एक मंत्री के तौर पर अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई। उन्होंने आजीवन मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। जॉर्ज फ़र्नांडिस जनता दल के प्रमुख नेता थे और बाद में समता पार्टी का भी गठन किया। अपने राजनैतिक जीवन में उन्होंने केंद्र में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने संचार, उद्योग, रेलवे और रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया। वे अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में अकेले ईसाई मंत्री थे। भारत सरकार ने उन्हें 2020 में मरणोपरांत ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया है।
3 जून को हुए निधन (Died on 3 June)
1974: कृष्ण बल्लभ सहाय– बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े थे। आज़ादी के बाद वे बिहार के पहले राजस्व मंत्री बने। वह 2 अक्टूबर 1963 से 5 मार्च 1967 तक बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहे।
1994: ‘श्वेत क्रान्ति’ के जनक त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल की मृत्यु
भारत में दुग्ध क्रान्ति, जिसे ‘श्वेत क्रान्ति’ भी कहा जाता है, के जनक माने जाते हैं। भारत को दुनिया का सर्वाधिक दुग्ध उत्पादक देश बनाने के लिए श्वेत क्रांति लाने वाले त्रिभुवनदास कृषिभाई पटेल को देश में सहकारी दुग्ध उद्योग के मॉडल की आधारशिला रखने का श्रेय जाता है। वर्गीज़ कुरियन तथा त्रिभुवनदास पटेल ने मिलकर दूध के पाउडर, कंडेस्ड मिल्क तथा बच्चों के लिए मिल्क फूड का भारत में पहला प्लांट खड़ा किया था। यह दुनिया में एक अनोखा अकेला प्लांट था, जो भैंस के दूध को पाउडर में बदल सकता था। सामुदायिक नेतृत्व के लिए त्रिभुवनदास पटेल को 1963 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार मिला।
2011: भजन लाल – हरियाणा के कुशल राजनीतिज्ञ तथा तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने वाले राजनेता थे। वह पहली बार 1979 में, फिर 1982 और इसके बाद 1991 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने थे। वह एक बार केंद्रीय कृषि मंत्री भी रह चुके थे।
2013: जिया खान – भारतीय अभिनेत्री।
2014: एक सड़क हादसे में कैबिनेट मंत्री गोपीनाथ मुंडे का निधन
भारतीय राजनेता और महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री थे। गोपीनाथ पांडुरंग मुंडे 1980 से 1985 और 1990 से 2009 के दौरान महाराष्ट्र विधान सभा में पांच सत्र के लिये सदस्य रहे थे। 1995 में हुये विधानसभा के चुनावों में उन्होंने सफलता पाई और महाराष्ट्र राज्य के उपमुख्यमंत्री बने। उन्होंने अपनी पहचान ज़मीन से जुड़े एक कार्यकर्ता के तौर पर बनाई और वे एक राजनेता के साथ-साथ एक कृषक भी थे।
महत्वपूर्ण दिवस
विश्व साइकिल दिवस (World Bicycle Day)
संयुक्त राष्ट्र द्वारा पर्यावरण, स्वास्थ्य और परिवहन के इस किफायती साधन के महत्व को बढ़ावा देने के लिए हर साल 3 जून को यह दिवस मनाया जाता है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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