9 जून: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 9 जून वर्ष का 160वां (लीप वर्ष में यह 161वां) दिन है। साल में अभी 205 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 9 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 9 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
9 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 9 June in History)
आदिवासियों के भगवान बिरसा की पुण्यतिथि, 25 साल की उम्र में ही अंग्रेजों ने धीमा जहर देकर मार दिया था
जल, जंगल और जमीन को लेकर आदिवासियों का संघर्ष सदियों पुराना है और आज भी चला आ रहा है। ऐसे ही एक विद्रोह के जनक की आज पुण्यतिथि है। आदिवासियों के भगवान बिरसा मुंडा का आज ही के दिन साल 1900 में रांची की जेल में निधन हो गया था।
बिरसा मुंडा की उम्र भले ही छोटी थी, लेकिन कम उम्र में ही वे आदिवासियों के भगवान बन गए थे। 1895 में बिरसा ने अंग्रेजों द्वारा लागू की गई जमींदारी और राजस्व-व्यवस्था के खिलाफ लड़ाई छेड़ी। बिरसा ने सूदखोर महाजनों के खिलाफ भी बगावत की। ये महाजन कर्ज के बदले आदिवासियों की जमीन पर कब्जा कर लेते थे। बिरसा मुंडा के निधन तक चला ये विद्रोह ‘उलगुलान’ नाम से जाना जाता है।
औपनिवेशिक शक्तियों की संसाधनों से भरपूर जंगलों पर हमेशा से नजर थी और आदिवासी जंगलों को अपनी जननी मानते हैं। इसी वजह से जब ब्रिटिशर्स ने इन जंगलों को हथियाने की कोशिशें शुरू कीं तो आदिवासियों में असंतोष पनपने लगा।
ब्रिटिश लोगों ने आदिवासी कबीलों के सरदारों को महाजन का दर्जा दिया और लगान के नए नियम लागू किए। नतीजा ये हुआ कि धीरे-धीरे आदिवासी कर्ज के जाल में फंसने लगे। उनकी जमीन भी उनके हाथों से जाने लगी। दूसरी ओर, अंग्रेजों ने इंडियन फॉरेस्ट एक्ट पास कर जंगलों पर कब्जा कर लिया। खेती करने के तरीकों पर बंदिशें लगाई जाने लगीं।
आदिवासियों का धैर्य जवाब देने लगा था। तभी उन्हें बिरसा मुंडा के रूप में अपना नायक मिला। 1895 तक बिरसा मुंडा आदिवासियों के बीच बड़ा नाम बन गए थे। लोग उन्हें ‘धरती बाबा’ नाम से पुकारने लगे। बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को दमनकारी शक्तियों के खिलाफ संगठित किया। अंग्रेजों और आदिवासियों में हिंसक झड़पें होने लगीं। अगस्त 1897 में बिरसा ने अपने साथ करीब 400 आदिवासियों को लेकर एक थाने पर हमला बोल दिया। जनवरी 1900 में मुंडा और अंग्रेजों के बीच आखिरी लड़ाई हुई। रांची के पास दूम्बरी पहाड़ी पर हुई इस लड़ाई में हजारों आदिवासियों ने अंग्रेजों का सामना किया, लेकिन तोप और बंदूकों के सामने तीर-कमान जवाब देने लगे। बहुत से लोग मारे गए और कई लोगों को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया।
बिरसा पर अंग्रेजों ने 500 रुपए का इनाम रखा था। उस समय के हिसाब से ये रकम काफी ज्यादा थी। कहा जाता है कि बिरसा की ही पहचान के लोगों ने 500 रुपए के लालच में उनके छिपे होने की सूचना पुलिस को दे दी। आखिरकार बिरसा चक्रधरपुर से गिरफ्तार कर लिए गए।
अंग्रेजों ने उन्हें रांची की जेल में कैद कर दिया। कहा जाता है कि यहां उनको धीमा जहर दिया गया। इसके चलते 9 जून 1900 को वे शहीद हो गए।
साभार: दैनिक भास्कर
1964: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने लाल बहादुर शास्त्री, 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ‘जय जवान’ ‘जय किसान’ का नारा
1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध चरम पर था… देश में ‘भोजन की कमी’ थी देशवासियों और सैनिकों में चिंता शुरू हुई….इसी बीच सैनिकों और किसानों का मनोबल बढ़ाने के लिए देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश में ‘जय जवान’ ‘जय किसान’ का नारा दिया। उस समय उन्होंने अपना वेतन तक लेना बंद कर दिया था। उन्होंने भारत में हरित क्रांति को भी बढ़ावा दिया, जिसने देश में किसानों की समृद्धि और भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने पर ध्यान केंद्रित किया था।
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय जिले में हुआ था। उन्होंने अपने विनम्र स्वाभाव, मृदुभाषी व्यवहार और आम लोगों से जुड़ने की क्षमता से भारत की राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी थी। लाल बहादुर शास्त्री को श्वेत क्रांति जैसे ऐतिहासिक अभियान शुरू करने के लिए भी जाना जाता है, जिसने देश में दूध के उत्पादन बढ़ाया।
शास्त्री जी एक महान स्वतंत्रता संग्रामी थे, वे महात्मा गाँधी व जवाहर लाल नेहरु के पद चिन्हों पर चलते थे। 1920 में शास्त्री आजादी की लड़ाई में कूद पड़े और ‘भारत सेवक संघ’ की सेवा में जुड़ गये। उन्होंने सक्रिय रूप से 1921 में ‘अहसयोग-आन्दोलन’, 1930 में ‘दांडी-यात्रा’, एवम 1942 में भारत छोडो आन्दोलन में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई। वे सभी आंदोलनों एवम कार्यक्रमो में हिस्सा लिया करते थे, जिसके फलस्वरूप कई बार उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
स्वतन्त्रता की लड़ाई में शास्त्री ने ‘मरो नहीं मारो’ का नारा दिया, जिसने पुरे देश में स्वतन्त्रता की ज्वाला को तीव्र कर दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में आजादी की लड़ाई को भी तीव्र कर दिया गया। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने ‘आजाद हिन्द फ़ौज’ का गठन कर उसे “दिल्ली-चलो” का नारा दिया और इसी वक्त 8 अगस्त 1942 में गाँधी जी के ‘भारत-छोडो आन्दोलन’ ने तीव्रता पकड़ ली थी। इसी दौरान शास्त्री जी ने भारतीयो को जगाने के लिए “करो या मरो” का नारा दिया, परन्तु 9 अगस्त 1942 को शास्त्री जी ने इलाहबाद में इस नारे में परिवर्तन कर इसे “मरो नहीं मारो” कर देश वासियों का आव्हान किया। इस आन्दोलन के समय शास्त्री जी ग्यारह दिन भूमिगत रहे, फिर 19 अगस्त 1942 को गिरफ्तार कर लिए गये।
स्वतंत्र भारत में यह उत्तर प्रदेश की संसद के सचिव नियुक्त किये गये। गोविन्द वल्लभ पन्त के मंत्रीमंडल की छाया में इन्हें पुलिस एवम परिवहन का कार्यभार दिया गया। इस दौरान उन्होंने पहली महिला को कंडक्टर नियुक्त किया एवम पुलिस विभाग में उन्होंने लाठी के बजाय पानी की बौछार से भीड़ को नियंत्रित करने का नियम बनाया। 1951 में उन्हें ‘अखिल-भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस का महा-सचिव बनाया गया। उन्होंने 1952, 1957, 1962 के चुनाव में पार्टी के लिए बहुत काम कर प्रचार-प्रसार किया, एवम काँग्रेस को भारी बहुमत से विजयी बनाया।
उन्होंने 1961 से 1963 तक देश के छठे गृह मंत्री के रूप में भी कार्य किया। रेलमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान एक रेल दुर्घटना में कई लोगों की जान चली गई। इससे लाल बहादुर शास्त्री इतने हताश हुए कि दुर्घटना के लिए उन्होंने खुद को जिम्मेदार मानते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था।
लाल बहादुर शास्त्री की काबिलियत को देखते हुए 9 जून 1964 को इन्हें जवाहरलाल नेहरु की आकस्मिक मौत के बाद प्रधानमन्त्री नियुक्त किया गया परन्तु इनका कार्यकाल बहुत कठिन था। पूंजीपति देश एवम शत्रु-देश ने इनका शासन बहुत ही चुनौतीपूर्ण बना दिया था। अचानक ही 1965 में सांय 7.30 बजे पकिस्तान ने भारत पर हवाई हमला कर दिया।
इस परिस्थिती में राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधा कृष्णन ने बैठक बुलवाई। इस बैठक में तीनो रक्षा विभाग के प्रमुख एवम शास्त्री जी सम्मिलित हुए। विचार-विमर्श के दौरान प्रमुखों ने लाल बहादुर शास्त्रों को सारी स्थिती से अवगत कराया और आदेश की प्रतीक्षा की, तब ही शास्त्री जी ने जवाब में कहा “आप देश की रक्षा कीजिये और मुझे बताइए कि हमें क्या करना है?” इस तरह भारत-पाक युद्ध के दौरान विकट परिस्थितियों में शास्त्री ने सराहनीय नेतृत्व किया और “जय-जवान जय-किसान” का नारा दिया, जिससे देश में एकता आई और भारत ने पाक को हरा दिया, जिसकी कल्पना पकिस्तान ने नहीं की थी, क्योंकि तीन वर्ष पहले चीन ने भारत को युद्ध में हराया था।
लाल बहादुर शास्त्री की मौत का राज: रूस एवं अमेरिका के दबाव पर शास्त्री शान्ति-समझौते पर हस्ताक्षर करने हेतु पकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान से रूस की राजधानी ताशकंद में मिले कहा जाता है, उन पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए गए। समझौते की रात को ही 11 जनवरी 1966 को उनकी रहस्यपूर्ण तरीके से मृत्यु हो गई। उस वक्त के अनुसार, शास्त्री जी को दिल का दौरा पड़ा था, पर कहते है कि इनका पोस्टमार्टम नहीं किया गया था, क्यूंकि उन्हें जहर दिया गया था, जो कि सोची समझी साजिश थी, जो आज भी ताशकंद की आबो-हवा में दबा एक राज़ है। इस तरह 18 महीने ही लाल बहादुर शास्त्री ने भारत की कमान सम्भाली। इनकी मृत्यु के बाद पुनः गुलजारी लाल नन्दा को कार्यकालीन प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया। इनकी अन्त्येष्टी यमुना नदी के किनारे की गई एवम उस स्थान को ‘विजय-घाट’ का नाम दिया गया।
लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु कैसे हुई: 1978 में ‘ललिता के आंसू ’ नामक पुस्तक में इनकी पत्नी ने शास्त्री जी की मृत्यु की कथा कही। कुलदीप नैयर जो की शास्त्री जी के साथ ताशकंद गए थे, उन्होंने भी कई तथ्य उजागर किये परन्तु कोई उचित परिणाम नहीं निकले। 2012 में इनके पुत्र सुनील शास्त्री ने भी न्याय की मांग की पर कुछ हो न सका .
लाल बहादुर शास्त्री को “शांति के प्रतीक” के रूप में जाना जाता है क्योंकि उन्होंने हमेशा आक्रामकता के बजाय अहिंसा का रास्ता पसंद किया। उन्होंने सम्पूर्ण जीवन देश और गरीबो की सेवा में लगा दिया। उन्हें 1966 में मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया गया था।
1989: प्रथम भारतीय मिसाइल ‘पृथ्वी’ का सफल परीक्षण
भारत के रक्षा इतिहास में आज का दिन बेहद गौरवशाली है। भारत ने अपनी पहली जमीन से जमीन पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल ‘पृथ्वी’ का चांदीपुर परीक्षण केंद्र से सफलतापूर्वक परीक्षण किया था, जिसने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की नींव रखी।
68 ईस्वी: रोमन सम्राट नीरो की आत्महत्या
प्राचीन इतिहास की एक बड़ी घटना में, रोम के क्रूर और कुख्यात सम्राट नीरो ने अपनी सत्ता जाने और सीनेट द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद इसी दिन 30 वर्ष की आयु में आत्महत्या कर ली थी। यह कदम उन्हें तब उठाना पड़ा जब रोमन सीनेट ने उनके अत्याचारों और कुशासन से तंग आकर उन्हें सार्वजनिक शत्रु घोषित कर दिया और मृत्युदंड की सजा सुनाई। गैलबा (Gaul और Spain के गवर्नर) के नेतृत्व में हुए विद्रोह के बाद, नीरो को प्रेटोरियन गार्ड और सेना ने छोड़ दिया। अंतिम समय: जब सैनिकों की टुकड़ी उसे गिरफ्तार करने के लिए उसके पास पहुँची, तो अपमानजनक सार्वजनिक मृत्यु (कोड़ों से पीट-पीटकर मारने) से बचने के लिए, नीरो ने अपने निजी सचिव एपाफ्रोडाइटस (Epaphroditos) की मदद से अपने गले में छुरा घोंप लिया। उनके अंतिम शब्द कथित तौर पर, “What an artist dies in me!” (मेरे अंदर का एक महान कलाकार मर रहा है) थे, जो उनके कला और अभिनय के प्रति अत्यधिक लगाव को दर्शाते हैं। नीरो की मृत्यु के साथ ही जूलियो-क्लॉडियन राजवंश (Julio-Claudian dynasty) का अंत हो गया। इसके बाद रोमन साम्राज्य में गृहयुद्ध का एक संक्षिप्त और उथल-पुथल भरा दौर शुरू हुआ, जिसे ‘चार सम्राटों का वर्ष’ कहा जाता है।
देश-विदेश में 9 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1772: क्रांतिकारी युद्ध का पहला नौसैनिक हमला प्रोविडेंस रोड आइलैंड में हुआ।
1833: दुबई को यूनाइटेड किंगडम से स्वतंत्रता मिली।
1898: हांगकांग को ब्रिटेन की लीज- ब्रिटिश साम्राज्य और चीन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता हुआ था, जिसके तहत चीन ने हांगकांग के नए क्षेत्रों (New Territories) को 99 वर्षों के लिए ब्रिटेन को लीज पर दे दिया था। यह लीज 1 जुलाई 1997 को समाप्त हुई, जिसके बाद हांगकांग को दोबारा चीन को सौंपा गया।
1910: जापान और रूस ने पूर्व क्षेत्र के विभाजन पर एक समझौते किया।
1928: पहली ट्रांस-पैसिफिक उड़ान- विमानन इतिहास में ऑस्ट्रेलियाई पायलट चार्ल्स किंग्सफोर्ड स्मिथ और उनके चालक दल ने हवाई मार्ग से पहली बार प्रशांत महासागर को पार करने का कारनामा पूरा किया था। उन्होंने कैलिफोर्निया से उड़ान भरकर इसी दिन ब्रिस्बेन (ऑस्ट्रेलिया) में सुरक्षित लैंडिंग की थी।
1934: डॉनाल्ड डक (Donald Duck) की पहली उपस्थिति- दुनिया के सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा कार्टून किरदारों में से एक ‘डॉनाल्ड डक’ पहली बार वॉल्ट डिज्नी की थियेट्रिकल एनिमेटेड शॉर्ट फिल्म द वाइज लिटिल हैन (The Wise Little Hen) में नजर आया था। इसीलिए 9 जून को हर साल ‘इंटरनेशनल डॉनाल्ड डक डे’ भी मनाया जाता है।
1940: नार्वे ने द्वितीय विश्व युद्व के दौरान जर्मनी के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
1941: यूरोपीय देश सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड के फोर्ट स्मेदेरोवो क्षेत्र स्थित एक हथियार कारखाने में विस्फोट से 1500 लोगों की मौत हुई।
1959: प्रथम परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी- अमेरिकी नौसेना ने दुनिया की पहली परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस पनडुब्बी USS जॉर्ज वाशिंगटन (USS George Washington) को इसी दिन लॉन्च किया था।
1960: चीन में चक्रवती तूफान मैरी के कारण 1600 लोगों की मौत हो गई।
1964: लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।
1975: ब्रिटिश पार्लियामेंट ने सदन की कार्यवाही का रेडियो पर लाइव प्रसारण शुरू किया।
1991: इंग्लैंड के पूर्व ओपनर ग्राहम गूच ने 154 रन की यादगार पारी खेलते हुए स्वदेश में 22 साल बाद टेस्ट मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ टीम को जीत दिलाई।
1997: गंगटोक भूस्खलन- सिक्किम की राजधानी गंगटोक में भारी बारिश के कारण इसी दिन एक भीषण भूस्खलन (Landslide) हुआ था, जिसमें 50 लोगों की मौत हो गई थी और 5,000 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे।
1998: गुजरात में सबसे भीषण चक्रवात आया था, जिसे मुख्य रूप से कंडला चक्रवात (Kandla Cyclone) के नाम से जाना जाता है। इस विनाशकारी तूफान में 165 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चली थीं, जिसके कारण भारी तबाही हुई थी और लगभग 10,000 लोगों की जान चली गई थी।
1999: कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए इसी दिन बटालिक सेक्टर में दो बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक पहाड़ियों (सैन्य चौकियों) पर दोबारा अपना नियंत्रण स्थापित किया था।
1999: कुली ओडैजो (द. अफ़्रीका) माउंट एवरेस्ट पर दक्षिण तथा उत्तर दोनों छोर से चढ़ाई करने वाली विश्व की प्रथम महिला बनीं।
2008: केन्द्रशासित क्षेत्र प्रशासन ने चंडीगढ़ को तम्बाकू मुक्त घोषित किया।
2011: दुनिया का पहला कृत्रिम अंग सबसे कम समय में प्रत्यारोपित किया गया। इसमें सांस की नली को बदला गया था।
2024: नरेंद्र मोदी का लगातार तीसरा शपथ ग्रहण (मोदी 3.0): 18वीं लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद, नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में आयोजित इस भव्य समारोह में उनके साथ 71 अन्य मंत्रियों ने भी शपथ ली। मोदी जवाहरलाल नेहरू के बाद वह देश के इतिहास में लगातार तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले दूसरे राजनेता बने।
2024: जम्मू-कश्मीर के रियासी में दर्दनाक आतंकी हमला– जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में शिव खोड़ी गुफा से कटरा लौट रही तीर्थयात्रियों की एक बस पर आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर दी। गोलीबारी के बाद बस असंतुलित होकर गहरी खाई में गिर गई, जिसमें 9 श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 41 से अधिक घायल हो गए।
9 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 9 June)
1909: लक्ष्मण प्रसाद दुबे – स्वतंत्रता सेनानी।
1912: वसन्त देसाई – भारतीय सिनेमा जगत् के प्रसिद्ध संगीतकार थे। फ़िल्म ‘दो आँखें बारह हाथ’ का प्रसिद्ध गीत ‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम’ वसन्त देसाई द्वारा ही संगीतबद्ध किया गया था।
1913: चौधरी दिगम्बर सिंह – स्वतंत्रता सेनानी।
1931: नंदिनी सत्पथी – उड़ीसा की मुख्यमंत्री तथा लेखिका। वे जून, 1972 से दिसम्बर, 1976 तक उड़ीसा राज्य की मुख्यमंत्री रही थीं।
1933: अजित शंकर चौधरी – सुप्रसिद्ध भारतीय कवि, संस्मरणकार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा सहृदय समीक्षक थे।
1949: किरण बेदी – भारत की प्रथम महिला आइ.पी.एस।
1975: अमीषा पटेल – हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री।
1981: अनुष्का शंकर – भारतीय संगीतकार।
1985: सोनम कपूर – हिन्दी चलचित्र अभिनेत्री।
9 जून को हुए निधन (Died on 9 June)
1716: बन्दा सिंह बहादुर – भारतीय सिख सेनानायक थे। उनका जन्म भारद्वाज गोत्र के डोगरा राजपूत परिवार में हुआ था। उन्होंने 15 साल की उम्र में तपस्वी बनने के लिए घर छोड़ दिया, और उन्हें माधो दास बैरागी नाम दिया गया। उन्होंने गोदावरी नदी के तट पर नांदेड़ में एक मठ की स्थापना की।
1931: हरि किशन सरहदी – शहीद स्वतंत्रता सेनानी।
1934: दिनेश चंद्र मजूमदार – भारत के अमर शहीद क्रांतिकारी।
1936: अब्बास तैयबजी – भारत की आज़ादी के लिए संघर्ष करने वाले क्रांतिकारी थे।
1990: असद भोपाली – प्रसिद्ध गीतकार और शायर थे।
1991: राज खोसला – हिंदी फ़िल्मों में शीर्ष निर्देशक, निर्माणकर्ता और पटकथाकार।
1994: धीरेन्द्र ब्रह्मचारी – भारतीय योगाचार्य थे। उनका बचपन का नाम ‘धीरचन्द्र चौधरी’ था।
1995: एन.जी. रंगा – भारत के स्वतंत्रता सेनानी, सांसद तथा प्रसिद्ध किसान नेता।
2011: मक़बूल फ़िदा हुसैन – प्रसिद्ध चित्रकार।
9 जून के महत्त्वपूर्ण दिवस (Important Day of 9 June)
अंतरराष्ट्रीय अभिलेखागार दिवस (International Archives Day)
यूनेस्को (UNESCO) के तत्वावधान में वर्ष 1948 में ‘इंटरनेशनल काउंसिल ऑन आर्काइव्स’ की स्थापना की याद में हर साल 9 जून को यह दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखों को सुरक्षित रखने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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