12 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 224वां दिन (लीप वर्ष में 225वां दिन) है। साल में अभी और 141 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 12 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 12 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1948: जब विभाजन के दर्द को भुलाकर आजाद भारत ने ब्रिटेन को उसी की धरती पर हराकर जीता था हॉकी का पहला गोल्ड, शान से लहराया था तिरंगा
साल 1948 में इंग्लैंड की राजधानी लंदन में 29 जुलाई से ओलंपिक खेलों का आयोजन शुरू हुआ। ये ओलंपिक खेल दो मुख्य वजहों से पूरी दुनिया के लिए बेहद खास थे। पहला- दूसरे विश्वयुद्ध की विभीषिका खत्म होने के बाद यह पहला ओलंपिक आयोजित किया जा रहा था। दूसरा- एक स्वतंत्र और आजाद देश के रूप में भारत पहली बार ओलंपिक खेलों के महाकुंभ में हिस्सा ले रहा था। भारत ने 10 अलग-अलग खेलों के 39 इवेंट्स में अपना दमखम दिखाने के लिए 79 एथलीटों का एक मजबूत दल लंदन भेजा था।

भारत को पदक की सबसे बड़ी और पक्की उम्मीद अपनी राष्ट्रीय हॉकी टीम से ही थी। इससे पहले 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम ने हिटलर के सामने जर्मनी को 8-1 से करारी शिकस्त देकर गोल्ड मेडल जीता था, जो भारत का लगातार तीसरा ओलंपिक स्वर्ण था।
लेकिन 1948 में हालात बिल्कुल बदल चुके थे। 1947 में देश का विभाजन हो चुका था और 1936 की विजेता टीम के कई दिग्गज़ खिलाड़ी अब पाकिस्तान की टीम का हिस्सा बन चुके थे। देश में विभाजन के बाद का माहौल बेहद नाजुक था। खिलाड़ियों का ध्यान इन सब परिस्थितियों से हटाने और उनके बीच तालमेल बढ़ाने के लिए इंडियन हॉकी फेडरेशन ने बॉम्बे में प्रैक्टिस मैच आयोजित करने का फैसला लिया।

इस प्रैक्टिस सेशन के चक्कर में भारतीय टीम के लंदन पहुंचने में देरी हो रही थी। तब हॉकी फेडरेशन के अध्यक्ष रतन टाटा ने एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया। उन्होंने घोषणा की कि पूरी भारतीय हॉकी टीम को उनके निजी खर्च पर हवाई जहाज से लंदन भेजा जाएगा ताकि टीम समय पर पहुंचकर आराम और तैयारी कर सके।
भारत की 15 सदस्यीय हॉकी टीम लंदन पहुंची, जहां उसे पूल-A में ऑस्ट्रिया, स्पेन और अर्जेंटीना के साथ रखा गया था। इसके बाद मैदान पर भारतीय वीरों का जो तूफान आया, उसमें विरोधी टीमें बहती चली गईं।

पहला मुकाबला ऑस्ट्रिया के खिलाफ हुआ, जिसे भारत ने एकतरफा अंदाज में 8-0 से जीत लिया। दूसरे मैच में भारत ने अर्जेंटीना को 9-1 के विशाल अंतर से रौंदा, जिसमें अकेले दिग्गज बलबीर सिंह सीनियर ने 6 शानदार गोल दागे। तीसरे मैच में भारत ने कड़े मुकाबले में स्पेन को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। सेमीफाइनल में नीदरलैंड्स को धूल चटाकर भारतीय टीम ने शान से फाइनल का टिकट कटाया।
आखिरकार 12 अगस्त 1948 के दिन फाइनल का महामुकाबला खेला गया। भारत का सामना किसी और से नहीं बल्कि खुद ग्रेट ब्रिटेन की टीम से था, जिसने सालों तक भारत पर राज किया था। भारतीय खिलाड़ियों के पास गुलामी की पुरानी टीस को खेल के मैदान पर मिटाने का यह सबसे बेहतरीन मौका था।

मैच शुरू होते ही भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया। स्टार फॉरवर्ड बलबीर सिंह सीनियर के 2 धमाकेदार गोलों की मदद से भारत ने एकतरफा मुकाबले में ब्रिटेन को 4-0 से पटखनी दे दी।
इस जीत के साथ ही भारत ने हॉकी में लगातार अपना चौथा ओलंपिक गोल्ड मेडल हासिल किया। लेकिन सबसे खास बात यह थी कि ब्रिटेन की धरती (लंदन) पर पहली बार आजाद भारत का राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ सबसे ऊपर शान से लहरा रहा था और पूरे स्टेडियम ‘जन गण मन’ की गूंज थी।
1981: IBM ने लॉन्च किया था पहला पर्सनल कम्प्यूटर, जिसने घर-घर तक पहुंचाई डिजिटल क्रांति

जब भारी-भरकम मशीनों से निकलकर आम इंसान की मेज तक पहुंचा कंप्यूटर
आज हम अपने घरों और दफ्तरों की मेज पर जिस पर्सनल कंप्यूटर (PC) का इस्तेमाल रोजाना के कामों के लिए करते हैं, उसकी नींव आज ही के दिन यानी 12 अगस्त 1981 को रखी गई थी। दिग्गज टेक कंपनी ‘इंटरनेशनल बिजनेस मशीन’ (IBM) ने अपना पहला कमर्शियल पर्सनल कंप्यूटर मार्केट में उतारा था, जिसने होम कंप्यूटर मार्केट का नक्शा ही हमेशा के लिए बदल कर रख दिया।
साल 1980 से पहले तक IBM केवल बड़ी-बड़ी कंपनियों और शोध संस्थानों के लिए मिनी और मेनफ्रेम कंप्यूटर बनाती थी। ये कंप्यूटर साइज में किसी बड़े कमरे जितने भारी-भरकम होते थे और इनकी कीमत लाखों डॉलर में होती थी। इन्हें एक जगह से दूसरी जगह ले जाना नामुमकिन सा था।
धीरे-धीरे बाजार और आम लोगों की ओर से छोटे व घरेलू उपयोग वाले कंप्यूटरों की मांग बढ़ने लगी। इसे देखते हुए 1980 में IBM ने अपने कुशल लैब डायरेक्टर बिल लोवे को पर्सनल कंप्यूटर तैयार करने की अहम जिम्मेदारी सौंपी।
शुरुआत में बिल लोवे ने ग्राउंड रिसर्च के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया। हैरान करने वाली बात यह थी कि इस टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आम लोगों और आम घरों में पर्सनल कंप्यूटर का कोई खास उपयोग या काम नहीं है। लेकिन बिल लोवे की सोच अपने समय से आगे थी। वे बखूबी जानते थे कि आने वाले समय में कंप्यूटर हर घर और हर इंसान की बुनियादी जरूरत बन जाएगा।
बिल लोवे ने जोखिम उठाते हुए न्यूयॉर्क में IBM के शीर्ष एग्जीक्यूटिव्स के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और यह वादा किया कि उनकी टीम महज एक साल के भीतर एक वर्किंग पर्सनल कंप्यूटर तैयार करके दिखा देगी। कंपनी के बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी। इसके बाद बिल लोवे ने केवल 12 प्रतिभावान इंजीनियरों व विशेषज्ञों की एक छोटी सी टीम बनाई, जिसे हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, सेल्स और मार्केटिंग से जुड़े सभी काम पूरे करने थे।
टीम ने दिन-रात एक करके प्रोजेक्ट पर काम किया और बिल लोवे ने अपना वादा समय पर पूरा दिखाया। ठीक एक साल के भीतर IBM का पहला पर्सनल कंप्यूटर बनकर तैयार हो गया।
12 अगस्त 1981 को इसे आधिकारिक तौर पर बाजार में लॉन्च किया गया, जिसे नाम दिया गया IBM 5150. इस ऐतिहासिक कंप्यूटर की कीमत उस समय 1,565 डॉलर रखी गई थी। इस पूरे पैकेज के साथ ग्राहकों को एक मेन सिस्टम यूनिट, एक कीबोर्ड, एक मॉनिटर, एक प्रिंटर और एक मेमोरी कार्ड मिलता था। उस दौर में 1565 डॉलर की कीमत में घर पर इस्तेमाल होने वाला यह शक्तिशाली और पोर्टेबल कंप्यूटर मिलना तकनीक प्रेमियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं था। लांचिंग के साथ ही इस कंप्यूटर ने दुनिया भर के पर्सनल कंप्यूटर मार्केट में क्रांति ला दी और यहीं से मॉडर्न पीसी (PC) युग की शुरुआत हुई।
1877: एडिसन ने बनाया ‘फोनोग्राफ’, इतिहास में पहली बार रिकॉर्ड हुई इंसान की आवाज और दुनिया को दी साउंड रिकॉर्डिंग की सौगात

दुनिया भर में 1,000 से भी ज्यादा पेटेंट अपने नाम कराने वाले महान वैज्ञानिक थॉमस अल्वा एडिसन के सबसे क्रांतिकारी और महत्वपूर्ण आविष्कारों में से एक था- फोनोग्राफ। आज ही के दिन यानी 12 अगस्त 1877 को एडिसन ने फोनोग्राफ का पहला मॉडल तैयार किया था। यह एक ऐसा जादुई उपकरण था, जिससे पहली बार इंसान की आवाज को रिकॉर्ड कर दोबारा सुना जा सकता था। यही तकनीक आगे चलकर ग्रामोफोन और आधुनिक रिकॉर्ड प्लेयर का आधार बनी।
साल 1877 में एडिसन अपने टेलीग्राफ ट्रांसमीटर और टेलीफोन की कार्यक्षमता को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे थे। प्रयोग के दौरान उन्होंने गौर किया कि जब पेपर टेप मशीन से बहुत तेज स्पीड में गुजरता था, तो उसमें से इंसानी शब्दों जैसी अजीब सी आवाजें निकलती थीं। इस घटना ने एडिसन के दिमाग में एक क्रांतिकारी विचार पैदा किया कि क्या इस तकनीक के जरिए टेलीफोन संदेशों और आवाज को भी हमेशा के लिए रिकॉर्ड किया जा सकता है?
आइडिया मिलते ही एडिसन दिन-रात काम में जुट गए। उन्होंने टेलीफोन रिसीवर के डायाफ्राम के साथ सुई का प्रयोग किया। शुरुआत में उन्होंने कागजी टेप पर कोशिश की, लेकिन बाद में उन्होंने एक बेलनाकार (सिलेंड्रिकल) मेटल स्ट्रक्चर पर टिन की पन्नी लपेटी और सुई की जगह स्टाइलस का इस्तेमाल किया।
जब एडिसन ने इस नए उपकरण के सामने बच्चों की प्रसिद्ध और लोकप्रिय कविता “Mary had a little lamb” गाकर सुनाई, तो मशीन में लगे स्टाइलस ने ध्वनि तरंगों के कंपन से टिन की पन्नी पर बारीक निशान बना दिए। इसके बाद जब हैंडल घुमाया गया, तो वही कविता एडिसन को बिल्कुल साफ आवाज में वापस सुनाई दी।
मानव इतिहास में यह पहला मौका था जब किसी उपकरण ने आवाज को तरंगों के रूप में रिकॉर्ड कर उसे वापस सुनाया था। जब एडिसन ने इस आविष्कार को दुनिया के सामने पेश किया, तो पहले तो लोगों को यकीन ही नहीं हुआ, लेकिन जल्द ही यह चमत्कार देखकर पूरी दुनिया हैरान रह गई। इसी आविष्कार के बाद थॉमस एडिसन को “द विजार्ड ऑफ मेन्लो पार्क” (The Wizard of Menlo Park) का नाम मिला और यहां से आधुनिक म्यूजिक व साउंड रिकॉर्डिंग इंडस्ट्री का जन्म हुआ।
12 अगस्त के दिन को इतिहास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की इन घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…
1765: मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने इलाहाबाद की संधि के तहत ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की ‘दीवानी’ (कर वसूली के अधिकार) सौंपी। बक्सर के युद्ध के बाद हुई इस घटना से भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की वास्तविक नींव पड़ी।
1833: अमेरिका के शिकागो (तब एक गांव के रूप में) स्थापना हुई थी, जिसमें उस समय लगभग 350 लोग रहते थे।
1851: आइजैक मेरिट सिंगर ने सिलाई मशीन का पेटेंट करवाया।
1908: हेनरी फोर्ड की कार कंपनी ने पहला कार मॉडल (Model T) बनाया।
1928: एम्सटर्डम में नौवें ओलम्पिक खेल समाप्त हुये। इन खेलों में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने फाइनल में नीदरलैंड को हराकर अपना पहला स्वर्ण पदक जीता था।
1942: आंध्र प्रदेश के तेनाली में भारत छोड़ो आंदोलन के समर्थन में एक व्यापक बंद और विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस गोलीबारी में सात स्वतंत्रता सेनानी शहीद हुए। इस ऐतिहासिक घटना की याद में तेनाली के ‘रणरंग चौक’ पर शहीद स्मारक के रूप में सात स्तंभ स्थापित किए गए हैं।
1953: सोवियत संघ ने अपने पहले हाइड्रोजन बम का परीक्षण किया।
1953: यूनान (ग्रीस) के आयोनियन (लोनियन) द्वीप समूह में आए विनाशकारी भूकंप में 435 लोगों की जान गई थी और भारी तबाही हुई थी। रिक्टर स्केल पर इस मुख्य भूकंप की तीव्रता लगभग 7.2 मापी गई थी।
1960: नासा ने अपना पहला सफल संचार उपग्रह इको 1ए (Echo 1A) अंतरिक्ष में भेजा। यह उपग्रह पृथ्वी से भेजी गई रेडियो तरंगों को वापस जमीन पर भेजता था।
1961: ईस्ट जर्मन (पूर्वी जर्मनी) सरकार ने बर्लिन की दीवार का निर्माण शुरू करने का आदेश दिया। इसका उद्देश्य पूर्वी बर्लिन से पश्चिमी बर्लिन की ओर हो रहे पलायन को रोकना था।
1962: पहली बार में एक साथ दो मानवयुक्त अंतरिक्ष यान कक्षा में मौजूद थे और अंतरिक्ष यात्रियों (एंड्रियन निकोलेयेव और पावेल पोपोविच) ने अंतरिक्ष से आपस में संवाद किया।
1980: मैक्सिको के चिड़ियाघर में एक पांडा का जन्म हुआ। ये पहली बार हुआ था जब चीन से बाहर किसी पांडा का जन्म हुआ था।
1985: टोक्यो से ओसाका जा रही जापान एयरलाइंस फ्लाइट 123 (बोइंग 747) गुनमा प्रांत के माउंट ताकामागाहारा क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। इस भीषण हादसे में 520 लोगों की मौत हुई और केवल 4 लोग जीवित बचे थे।
1994: कांगो गणराज्य की राजधानी ब्राजविल्ले में एक चर्च में भगदड़ हो जाने से 142 लोगों की मौत हुई।
2000: बैरेंट्स सागर में रूसी परमाणु पनडुब्बी कुर्स्क (K-141) नौसैनिक अभ्यास के दौरान हुए भीषण विस्फोटों के बाद डूब गई थी। इस भीषण दुर्घटना में पनडुब्बी पर सवार सभी 118 अधिकारियों और नाविकों की मृत्यु हो गई थी।
2012: 30वें ओलंपिक खेलों का लंदन में समापन, जिसमें भारतीय एथलीटों ने 2 रजत और 4 कांस्य समेत कुल 6 पदक जीते थे
2018: नासा ने पार्कर सोलर प्रोब लॉन्च किया। इसका उद्देश्य सूर्य की आउटर लेयर का अध्ययन करना है। यह मानव इतिहास का पहला ऐसा अंतरिक्ष यान है जो सूर्य के सबसे करीब पहुंच कर सीधे उसकी बाहरी परत के रहस्यों को सुलझा रहा है।
2020: मुंबई का दादर भारत का ऐसा पहला स्थान जहां ट्रैफिक सिग्नलों पर पारंपरिक पुरुष आकृतियों की जगह महिला प्रतीकों को प्रदर्शित किया गया था। इस पहल का मुख्य उद्देश्य समाज में लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तिकरण का संदेश देना था।
12 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1908: डॉ. रॉबिन बनर्जी – प्रसिद्ध वन्यजीव विशेषज्ञ, पर्यावरणविद्, फोटोग्राफर और वृत्तचित्र (डॉक्यूमेंट्री) फिल्म निर्माता। उन्होंने असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और वहां के एक सींग वाले गैंडे को पूरी दुनिया के सामने लाने में अहम भूमिका निभाई थी।
1914: तेजी बच्चन – भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन की मां, प्रसिद्ध समाज सेविका और रंगमंच अभिनेत्री।
1919: विक्रम साराभाई– भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक। उन्हीं के प्रयासों से ISRO की स्थापना संभव हो सकी थी।
1931: प्रो. इरफ़ान हबीब – भारत के सुप्रसिद्ध और वरिष्ठ इतिहासकार तथा पद्म भूषण से सम्मानित विद्वान।
1971: पीट सम्प्रास – अमेरिका के महान पूर्व टेनिस खिलाड़ी हैं। अपने शानदार करियर में उन्होंने 14 ग्रैंड स्लैम पुरुष एकल खिताब जीते और विश्व में नंबर-1 रैंकिंग हासिल की।
12 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1848: जॉर्ज स्टीफेंसन -प्रसिद्ध इंजीनियर। उन्हें “रेलवे का जनक” (Father of Railways) कहा जाता है। उन्होंने पहले सफल भाप के रेल इंजन का आविष्कार किया था।
1945: जॉर्ज सिडनी अरुंडेल – भारत के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले अंग्रेज़ व्यक्ति।
1946: काशीनाथ नारायण दीक्षित – भारतीय पुरातत्व के विद्वान्। वे पुरातत्व के तीनों अंगों – लिपि, अभिलेख तथा मुद्राशास्त्र के विशेषज्ञ थे। उन्होंने मोहन जोदड़ो तथा पहाड़पुर के पुराताविक उत्खनन कार्य का निर्देशन किया।
1982: भगवतशरण उपाध्याय – हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार, इतिहासकार और पुरातत्ववेत्ता। उन्होंने भारतीय संस्कृति, इतिहास व पुरातत्व पर 100 से अधिक पुस्तकें लिखकर हिंदी साहित्य को समृद्ध किया।
1993: दयानांद बालकृष्ण बांदोडकर – गोवा, दमन और दीव के पहले मुख्यमंत्री।
1997: गुलशन कुमार – फिल्म निर्माता और टी-सीरीज (T-Series) के संस्थापक।
12 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस

संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा प्रतिवर्ष 12 अगस्त को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस (International Youth Day) मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के विकास, अर्थशास्त्र और राजनीति में युवाओं के योगदान को रेखांकित करना तथा उनकी समस्याओं और अधिकारों के प्रति वैश्विक जागरूकता फैलाना है। 1999 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस घोषित करने की सिफारिश को मंजूरी दी थी और पहली बार 12 अगस्त 2000 को यह मनाया गया था।
विश्व हाथी दिवस

दुनिया भर में एशियाई और अफ्रीकी हाथियों के संरक्षण, अवैध शिकार को रोकने और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व हाथी दिवस (World Elephant Day) समर्पित है। इसकी आधिकारिक शुरुआत 12 अगस्त 2012 को कनाडा की फिल्म निर्माता पेट्रीशिया सिम्स और थाइलैंड के ‘एलिफेंट रीइंट्रोडक्शन फाउंडेशन’ द्वारा की गई थी।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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