13 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 225वां दिन (लीप वर्ष में 226वां दिन) है। साल में अभी और 140 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 13 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 13 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1784: ब्रिटेन की संसद ने पारित किया था ‘पिट्स इंडिया एक्ट’, 13 अगस्त को कैसे बदला भारत का प्रशासनिक ढांचा

ईस्ट इंडिया कंपनी के राजनीतिक अधिकारों पर बैठा दिया गया ब्रिटेन का ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’
भारतीय प्रशासनिक और संवैधानिक इतिहास में 13 अगस्त का दिन एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। आज ही के दिन यानी 13 अगस्त 1784 को ब्रिटिश संसद ने ऐतिहासिक ‘पिट्स इंडिया एक्ट’ (Pitts India Act) पारित किया था। इसे ‘ईस्ट इंडिया कंपनी एक्ट 1784’ भी कहा जाता है। इस कानून के लागू होने के बाद भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के राजनीतिक और प्रशासनिक कामकाज पर सीधे ब्रिटिश सरकार का नियंत्रण स्थापित हो गया।
18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी बंगाल में पूरी तरह मनमाना शासन चला रही थी। कंपनी के अधिकारियों में फैला भ्रष्टाचार और अनियमितताएं देखकर ब्रिटिश सरकार को अहसास हुआ कि कंपनी के कामकाज पर शिकंजा कसना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से साल 1773 में ‘रेगुलेटिंग एक्ट’ लाया गया था, जिसका मुख्य मकसद कंपनी से राजनीतिक शक्तियां धीरे-धीरे छीनकर एक केंद्रीकृत प्रशासनिक ढांचे की नींव रखना था।
इस कानून के तहत बंगाल के गवर्नर के पद को बढ़ाकर ‘गवर्नर जनरल’ बना दिया गया और वारेन हेस्टिंग्स बंगाल के पहले गवर्नर जनरल बने। बॉम्बे और मद्रास प्रेसिडेंसी को भी बंगाल के गवर्नर जनरल के अधीन कर दिया गया और उनकी सहायता के लिए 4 सदस्यों वाली एक ‘एग्जीक्यूटिव काउंसिल’ का गठन किया गया।
हालांकि, जल्द ही रेगुलेटिंग एक्ट की व्यावहारिक कमियां खुलकर सामने आने लगीं। गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स और काउंसिल के सदस्यों के बीच अक्सर अधिकार क्षेत्रों को लेकर तीखे विवाद होने लगे। इसके अलावा, न्याय प्रणाली में भी यह स्पष्ट नहीं था कि देश में भारतीय कानून प्रभावी होंगे या ब्रिटिश कानून।
रेगुलेटिंग एक्ट की इन्हीं गंभीर कमियों को दूर करने और भारत पर अपना शिकंजा मजबूत करने के लिए ब्रिटेन के तत्कालीन युवा प्रधानमंत्री विलियम पिट ‘द यंगर’ के नाम पर ‘पिट्स इंडिया एक्ट’ पेश किया गया, जिसे 13 अगस्त 1784 को ब्रिटिश संसद ने पारित कर दिया।
इस अधिनियम की सबसे बड़ी खास बात ब्रिटेन में ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ का गठन था। इस बोर्ड के माध्यम से ब्रिटिश सरकार भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मामलों पर सीधा और पूर्ण नियंत्रण रखने लगी।
पिट्स इंडिया एक्ट ने भारत में शासन की एक नई व्यवस्था को जन्म दिया, जिसे ‘द्वैध शासन’ (Dual System of Governance) कहा जाता है। कंपनी के व्यापारिक और व्यावसायिक एकाधिकार को ‘कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स’ के हाथों में ही रहने दिया गया। शासन, सैन्य और राजस्व से जुड़े सभी राजनीतिक फैसले सीधे ब्रिटिश सरकार द्वारा नियंत्रित ‘बोर्ड ऑफ कंट्रोल’ के अधीन आ गए।
इस कानून ने पहली बार आधिकारिक तौर पर भारत में कंपनी के अधिकार वाले क्षेत्रों को “भारत में ब्रिटिश संपत्ति” का नाम दिया, जिसने आगे चलकर भारत में संपूर्ण ब्रिटिश राज की ठोस इमारत खड़ी की।
1960: सैटेलाइट से हुई थी पहली टू-वे टेलीफोन कॉल, अंतरिक्ष से गूंजी इंसानी आवाज

आज के दौर में हम जिस मोबाइल, इंटरनेट और वैश्विक संचार क्रांति का आनंद ले रहे हैं, उसकी वास्तविक नींव आज ही के दिन यानी 12 अगस्त 1960 को रखी गई थी। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ ने दुनिया का पहला पैसिव टू-वे कम्युनिकेशन सैटेलाइट ‘इको-1’ सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च किया था। इस ऐतिहासिक मिशन ने साबित कर दिया था कि अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों की मदद से पृथ्वी पर दूर-दराज के इलाकों में बिना किसी केबल के वॉयस और सिग्नल ट्रांसमिट किए जा सकते हैं।
कम्युनिकेशन सैटेलाइट की अवधारणा सबसे पहले जुलाई 1958 में ‘बेल लेबोरेटरीज’ के दिग्गज इंजीनियर जॉन पीयर्स ने दुनिया के सामने रखी थी। उनका मानना था कि यदि अंतरिक्ष में एक अत्यधिक रिफ्लेक्टिव सतह वाली वस्तु स्थापित कर दी जाए, तो पृथ्वी से भेजे गए इलेक्ट्रिकल और रेडियो सिग्नलों को उससे टकराकर दुनिया के किसी भी दूसरे हिस्से में भेजा जा सकता है।
अक्टूबर 1958 में जॉन पीयर्स ने अपने सहयोगी रुडोल्फ कॉम्फनर के साथ मिलकर एक खास प्रकार के ‘बैलून सैटेलाइट’ पर काम करना शुरू किया। यह धातुयुक्त गुब्बारे जैसा उपग्रह था, जिसे अंतरिक्ष में जाकर गुब्बारे की तरह फूलना था।
संयोग से, साल 1958 में ही अमेरिका ने अपनी राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ की स्थापना की थी। नासा को अपने शुरुआती दौर का सबसे पहला और बड़ा प्रोजेक्ट ही एक आधुनिक संचार उपग्रह बनाने का मिला, और इस पूरे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को ‘इको’ नाम दिया गया।
इंजीनियरों और वैज्ञानिकों की कड़ी मेहनत के बाद 100 फीट व्यास और लगभग 68 किलोग्राम वजनी एक विशालकाय गुब्बारा रूपी सैटेलाइट तैयार किया गया। 12 अगस्त 1960 को नासा ने इसे थॉर-डेल्टा रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष की ओर रवाना कर दिया।
12 अगस्त को लॉन्चिंग के बाद, अगले ही दिन यानी 13 अगस्त 1960 को विज्ञान की दुनिया में एक बड़ा चमत्कार घटित हुआ। नासा के वैज्ञानिकों ने इस ‘इको-1’ सैटेलाइट के जरिए कैलिफोर्निया के गोल्डस्टोन स्टेशन और न्यू जर्सी के होल्मडेल स्थित बेल लैब के बीच रेडियो सिग्नल टकराकर सफलतापूर्वक बातचीत की।
यह उपग्रह के माध्यम से किया गया दुनिया का पहला टू-वे वॉयस कम्युनिकेशन था। इस प्रयोग के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर का एक पहले से रिकॉर्ड किया गया संदेश भी सैटेलाइट से रिफ्लेक्ट कराकर पूरे अमेरिका में ब्रॉडकास्ट किया गया। इसने वैश्विक संचार का एक नया क्षितिज खोल दिया।
13 अगस्त के दिन को इतिहास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की इन घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…
1642: डच खगोलशास्त्री क्रिश्चियन ह्यूगेंस ने मंगल ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ या उसकी चोटी का पता लगाया था, जो अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण खोज मानी जाती है।
1891: ब्रिटिश हुकूमत ने इंफाल में हजारों लोगों के सामने मणिपुर के युवराज बीर टिकेंद्रजीत सिंह और थंगल जनरल को अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध छेड़ने व अधिकारियों की हत्या के झूठे आरोप में सरेआम फांसी दे दी। यह दिन मणिपुर में हर साल ‘देशभक्त दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
1892: ऐतिहासिक अफ्रीकी-अमेरिकी समाचार पत्र “द बाल्टीमोर एफ्रो-अमेरिकन” (The Afro-American) का प्रकाशन शुरू हुआ, जो अमेरिका के सबसे पुराने और लंबे समय तक चलने वाले अश्वेत-स्वामित्व वाले प्रकाशनों में से एक है।
1913: इंग्लैंड के हैरी ब्रेअर्ली, शेफील्ड ने स्टेनलेस स्टील का आविष्कार किया।
1942: अमेरिकी सेना के कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स ने मैनहट्टन इंजीनियरिंग डिस्ट्रिक्ट की स्थापना की थी, जिसे आगे चलकर के मैनहट्टन प्रोजेक्ट के रूप में जाना गया। यह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुनिया का पहला परमाणु हथियार विकसित करने का एक गोपनीय कार्यक्रम था।
1951: भारत में निर्मित पहले विमान हिंदुस्तान ट्रेनर 2 ने पहली उड़ान भरी।
1956: भारत की संसद ने ‘नेशनल हाईवे एक्ट’ (National Highways Act) को मंजूरी दी थी, जिसने देश में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण व प्रबंधन को कानूनी आधार दिया।
1960: मध्य अफ्रीकी गणराज्य फ्रांस से स्वतंत्र हुआ था।
1993: थाईलैंड के थाईलैंड के नाखोन रचासिमा शहर में रॉयल प्लाजा होटल ढह गया। इस बड़ी दुर्घटना में आधिकारिक तौर पर 137 लोगों की मौत हुई थी और 220 से अधिक लोग घायल हुए।
1999: लेखिका तस्लीमा नसरीन की नई किताब ‘आमार मऐबेला’ (मेरा बचपन) पर बांग्लादेश सरकार ने प्रतिबंध लगाया। सरकार का कहना था कि इस किताब से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंच सकती है और सामाजिक अशांति फैल सकती है।
2004: यूनानी सभ्यता के प्रदर्शन के साथ ओलम्पिक शुरू।
2005: श्रीलंका के विदेश मंत्री लक्ष्मण कादिरगमर की सनसनीखेज हत्या के बाद देश में लिट्टे (LTTE) का हाथ होने की आशंका के चलते सरकार ने तुरंत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी।
2015: इराक की राजधानी बगदाद के थोक खाद्य बाजार में एक रेफ्रिजरेटर ट्रक में हुए भीषण बम विस्फोट में 76 लोग मारे गए और 212 से अधिक घायल हो गए। इस आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने ली थी।
2017: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के कोटरूपी में भीषण भूस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में एचआरटीसी की दो बसें और कई वाहन आने से 46 लोगों की मौत हुई।
13 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1863: गंगाप्रसाद वर्मा – महान स्वतंत्रता सेनानी, निर्भीक पत्रकार और समाज सुधारक थे। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्य भी रहें।
1887: नरेन्द्र मोहन सेन – भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी। वे स्वदेशी आंदोलन के समय ब्रिटिश विरोधी भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन में सम्मिलित हुए थे।
1888: जॉन लोगी बेयर्ड– स्कॉटिश इंजीनियर और वैज्ञानिक, जिन्होंने टेलीविज़न का आविष्कार किया था।
1918: फ्रेडरिक सेंगर – प्रसिद्ध ब्रिटिश जैव रसायनज्ञ। वे इतिहास के एकमात्र ऐसे वैज्ञानिक हैं जिन्हें रसायन विज्ञान में दो बार नोबेल पुरस्कार (1958 और 1980 में) से सम्मानित किया गया।
1926: फिदेल कास्त्रो – क्यूबा के क्रांतिकारी नेता, जिन्होंने सशस्त्र क्रांति के जरिए फुल्गेंसियो बतिस्ता की सरकार को 1959 में सत्ता से हटाया और बाद में क्यूबा के प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति के रूप में लंबे समय तक देश का नेतृत्व किया।
1933: मधुर जाफरी – प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री, खाद्य एवं यात्रा लेखिका और टेलीविजन हस्ती हैं। भारत सरकार ने उन्हें 2022 में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया है।
1933: वैजयंती माला – प्रसिद्ध भारतीय अभिनेत्री, भरतनाट्यम नृत्यांगना और गायिका, जिन्होंने हिंदी और दक्षिण भारतीय फिल्मों में शानदार अभिनय किया। वे लोकसभा तथा राज्यसभा की सदस्य भी रहीं।
1952: योगिता बाली – हिन्दी सिनेमा जगत की प्रसिद्ध अभिनेत्री और निर्माता।
1963: श्रीदेवी – भारतीय सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार और पद्म श्री से सम्मानित महान अभिनेत्री।
1982: योगेश्वर दत्त – प्रसिद्ध भारतीय फ्रीस्टाइल पहलवान हैं। उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक, 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक हासिल किया है। खेल में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्म श्री और राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
2000: सात्विकसाईंराज रंकीरेड्डी – राष्ट्रमंडल खेल 2022 में चिराग शेट्टी के साथ पुरुष डबल्स का स्वर्ण पदक जीतने वाले भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं।
13 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1795: अहिल्याबाई होल्कर – भारतीय वीरांगना, मालवा साम्राज्य की महान और न्यायप्रिय शासिका (लोकमाता)। उन्होंने भारत भर में दर्जनों प्रमुख मंदिरों, धर्मशालाओं, घाटों और सड़कों का पुनर्निर्माण व निर्माण कराया (जैसे काशी विश्वनाथ मंदिर)।
1910: फ़्लोरेन्स नाइटिंगेल – आधुनिक नर्सिंग आंदोलन की संस्थापक और प्रसिद्ध ब्रिटिश समाज सुधारक। उन्हें क्रीमियन युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की सेवा के लिए “द लेडी विद द लैंप” के रूप में भी जाना जाता है। उनका जन्म 12 मई 1820 को हुआ था और उनके जन्मदिवस को प्रतिवर्ष ‘अंतर्राष्ट्रीय नर्स दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
1936: भीकाजी कामा – महान स्वतंत्रता सेनानी।
2003: भबेन्द्र नाथ सैकिया – भारतीय उपन्यासकार, लघु कथा लेखक तथा फ़िल्म निर्देशक। उन्हें पद्म श्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
2018: सोमनाथ चटर्जी – लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष तथा ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी’ के प्रमुख नेता।
13 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
ऑर्गन डोनेशन डे आज

कहा जाता है कि एक इंसान अपने ऑर्गन डोनेट कर 8 लोगों को नया जीवन दे सकता है। इस बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए 13 अगस्त को दुनियाभर में विश्व अंगदान दिवस (World Organ Donation Day) मनाया जाता है। नेशनल हेल्थ पोर्टल के मुताबिक भारत में हर साल 5 लाख लोगों की मौत समय पर ऑर्गन नहीं मिलने की वजह से होती है। इनमें से 2 लाख ऐसे हैं, जिनकी मौत लिवर नहीं मिलने की वजह से होती है। हर साल डेढ़ लाख लोगों को किडनी की जरूरत होती है, लेकिन केवल 5 हजार को ही मिल पाती है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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