14 August in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 226वां दिन (लीप वर्ष में 227वां दिन) है। साल में अभी और 139 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 14 अगस्त का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज ही के दिन सन 1947 में अखंड भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण दिन था। इसी दिन भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान एक नए देश के रूप में अस्तित्व में आया।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 14 अगस्त का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1947: आजादी की खुशी और बंटवारे का गहरा जख्म… 14 अगस्त को कैसे खिंची थी देश के विभाजन की खूनी लकीर

सालों तक भारत पर हुकूमत करने के बाद अंग्रेज भारत को आजाद करने के लिए राजी तो हुए, लेकिन यह आजादी अपने साथ सदियों के भाईचारे के बिखराव और देश के विभाजन की एक गहरी कसक लेकर आई। 14 अगस्त 1947 को अखंड भारत का विभाजन हुआ और विश्व मानचित्र पर एक नया देश ‘पाकिस्तान’ वजूद में आया। इसी ऐतिहासिक तारीख के कारण पाकिस्तान हर साल 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद भारत में सुलग रही क्रांति की आग को देखते हुए 20 फरवरी 1947 को ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने ब्रिटिश संसद में भारत को आजाद करने की औपचारिक घोषणा की। उन्होंने इस ऐतिहासिक और जटिल कार्य को पूरा करने की जिम्मेदारी भारत के आखिरी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपी।

भारत आकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और नेताओं से चर्चा करने के बाद माउंटबेटन ने एक योजना तैयार की, जिसे इतिहास में ‘3 जून प्लान’ (3rd June Plan) या ‘माउंटबेटन योजना’ के नाम से जाना जाता है। माउंटबेटन ने तर्क दिया कि उस समय देश के जो राजनीतिक और सांप्रदायिक हालात थे, उनमें भारत का विभाजन ही एकमात्र अंतिम विकल्प बचा था। इस प्लान में यह तय किया गया कि ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र डोमिनियन भारत और पाकिस्तान में बांटा जाएगा।
माउंटबेटन योजना के तहत भारत की 500 से अधिक देशी रियासतों को भी यह अधिकार दिया गया कि वे अपनी भौगोलिक स्थिति और इच्छा के अनुसार भारत या पाकिस्तान में से किसी एक देश में विलय चुन सकती हैं, या चाहें तो स्वतंत्र रह सकती हैं।

इस योजना के आधार पर तैयार ‘भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947’ को 18 जुलाई 1947 को ब्रिटिश पार्लियामेंट ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इसके साथ ही भारत की आजादी और देश के विभाजन के वैधानिक दस्तावेज पर ब्रिटिश हुकूमत की अंतिम मुहर लग गई।
भारत के आधुनिक इतिहास में 14 अगस्त को एक बेहद दर्दनाक और त्रासद पन्ने के रूप में दर्ज किया जाता है। राजनीतिक सीमाओं के खिंचने से अचानक करोड़ों लोग रातों-रात अपने ही सदियों पुराने घरों में बेगाने हो गए। यह मानवीय इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और भीषण विस्थापन था, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ लोगों को अपना घर-बार, जायदाद और वतन छोड़कर सीमा पार पलायन करना पड़ा।
बंटवारे की इस आग में पूरे देश में भीषण सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे। रेलगाड़ियां, गांव और सड़कें अपनों के खून से लाल हो गईं, जिसमें अनुमानतः 5 से 10 लाख बेगुनाह मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी। यही वजह है कि भारत में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में भी याद किया जाता है।
1987: खान अब्दुल गफ्फार खान को मिला ‘भारत रत्न’, जानिए देश के पहले गैर-भारतीय ‘भारत रत्न’ पाने वाले पाकिस्तानी के त्याग और संघर्ष की पूरी गाथा
भारतीय स्वाधीनता संग्राम और अहिंसा के दर्शन में 14 अगस्त का दिन एक और स्वर्णिम अध्याय से जुड़ा है। आज ही के दिन यानी 14 अगस्त 1987 को भारत सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी और ‘सीमांत गांधी’ (फ्रंटियर गांधी) के नाम से विख्यात खान अब्दुल गफ्फार खान को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया था। वे भारत रत्न प्राप्त करने वाले दुनिया के पहले गैर-भारतीय (विदेशी नागरिक) बने थे।

खान अब्दुल गफ्फार खान का जन्म 6 फरवरी 1890 को पेशावर (अब पाकिस्तान) के उत्मान जई गांव में हुआ था। रूढ़िवादी सामाजिक विरोधों के बावजूद उनके पिता ने उन्हें मिशनरी स्कूल में शिक्षा दिलवाई। उच्च शिक्षा के लिए वे प्रसिद्ध अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पहुंचे।
मात्र 20 साल की छोटी उम्र में उन्होंने पश्तूनों के बीच शिक्षा का प्रसार करने के लिए अपने गृहनगर उत्मान जई में एक स्कूल खोला। यह स्कूल लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय होने लगा, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत को उनके इस सामाजिक बदलाव से खतरा महसूस हुआ और 1915 में ब्रिटिश सरकार ने इस स्कूल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद भी वे रुके नहीं और अगले 3 वर्षों तक पश्तून समाज को अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए सैकड़ों दुर्गम गांवों की पैदल यात्रा की। उनके इस निस्वार्थ सेवा भाव के कारण लोग उन्हें प्यार और सम्मान से ‘बादशाह खान’ पुकारने लगे।

महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों से गहराई से प्रभावित होकर बादशाह खान ने ‘खुदाई खिदमतगार’ नामक एक ऐतिहासिक सामाजिक व राजनीतिक संगठन की स्थापना की। इस संगठन के सदस्य लाल रंग के कुर्ते-पजामे पहनते थे, जिसके कारण इन्हें ‘सुलतान-ए-लाल’ या ‘रेड शर्ट्स’ (लाल कुर्ती आंदोलन) भी कहा जाता था।
साल 1930 में जब महात्मा गांधी ने ‘नमक सत्याग्रह’ शुरू किया, तो गफ्फार खान ने उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत में इसका नेतृत्व किया। इस दौरान अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अपने प्रिय नेता की गिरफ्तारी के विरोध में खुदाई खिदमतगारों ने पेशावर के किस्सा ख्वानी बाजार में एक शांतिपूर्ण व निहत्था प्रदर्शन किया। क्रूर ब्रिटिश हुकूमत ने इन निहत्थे देशभक्तों पर अंधाधुंध गोलियां चलाने का हुक्म दे दिया, जिसमें 200 से अधिक बेगुनाह प्रदर्शनकारी शहीद हो गए थे।
जब ऑल इंडिया मुस्लिम लीग धर्म के आधार पर भारत के बंटवारे पर अड़ी हुई थी, तब बादशाह खान ने इस विभाजन का सबसे मुखर और कड़ा विरोध किया था। उन्होंने इसे देश के साथ-साथ पश्तूनों के साथ भी बड़ा विश्वासघात माना। जून 1947 में जब विभाजन तय हो गया, तो उन्होंने पश्तूनों के स्वाभिमान के लिए पाकिस्तान से अलग ‘पख्तूनिस्तान’ की मांग रखी, जिसे खारिज कर दिया गया।
बंटवारे के बाद उनका क्षेत्र पाकिस्तान के हिस्से में चला गया। नई बनी पाकिस्तान सरकार उन्हें हमेशा अपना राजनीतिक दुश्मन समझती रही। स्वतंत्र पाकिस्तान में भी उन्हें जीवन के कई दशक जेलों और नजरबंदी में गुजारने पड़े।

जिंदगी भर महात्मा गांधी के अहिंसा के मार्ग पर चलने वाले इस महान जननेता का निधन 1988 में पेशावर में नजरबंदी के दौरान ही हुआ। विडंबना यह रही कि जीवन भर अहिंसा का संदेश देने वाले बादशाह खान की अंतिम यात्रा भी हिंसा से अछूती न रह सकी। अफगानिस्तान के जलालाबाद में उनकी अंतिम यात्रा के दौरान दो भीषण बम विस्फोट हुए, जिसमें 15 बेगुनाह लोगों की जान चली गई।
भारत मां के इस अमर सपूत और अहिंसा के महान पुजारी की कुर्बानियों को नमन करते हुए भारत सरकार ने 1987 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया था।
1862: बॉम्बे हाईकोर्ट की स्थापना
देश में हाईकोर्ट की स्थापना से पहले ब्रिटिश सरकार और ईस्ट इंडिया कंपनी की दोहरी न्याय प्रणाली से भारतीयों के मुकदमों का फैसला होता था। कंपनी और ब्रिटिश राजा की अदालत के क्षेत्राधिकार अलग-अलग हुआ करते थे। 1858 में ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन खत्म हो गया। 1861 में इंडियन हाईकोर्ट एक्ट पास होने के बाद न्यायालयों का एकीकरण हुआ और न्याय व्यवस्था ब्रिटिश सरकार के हाथों में आ गई।

ब्रिटिश सरकार को सर्वोच्च न्यायालयों और सदर अदालतों को खत्म करने की शक्ति भी मिली। बम्बई, कलकत्ता और मद्रास तीनों प्रेसिडेंसी में एक-एक हाईकोर्ट की स्थापना की गई।
इस कानून के जरिए सबसे पहले कोलकाता हाईकोर्ट की स्थापना हुई। आज ही के दिन 1862 में बॉम्बे हाईकोर्ट की स्थापना की गई। महाराष्ट्र, गोवा, दादरा नगर हवेली और दमन और दीव के मामलों पर बॉम्बे हाईकोर्ट को सुनवाई करने का अधिकार दिया गया। शुरुआत में 15 जजों की नियुक्ति का ऑर्डर दिया गया, लेकिन 7 जजों की ही नियुक्ति हो पाई। हाईकोर्ट की वर्तमान बिल्डिंग को बनाने का काम 1871 में शुरू हुआ। फिलहाल पणजी (गोवा), औरंगाबाद और नागपुर में बॉम्बे हाईकोर्ट की बेंच है।

14 अगस्त के दिन को इतिहास में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व की इन घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…
1908: इंग्लैंड के फोकेस्टोन में पहली अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता आयोजित की गयी।
1920: बेल्जियम के एंटवर्प में सातवें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों शुरुआत। समारोह में पहली बार ओलंपिक ध्वज फहराया गया।
1935: अमेरिकी कांग्रेस ने सोशल सिक्योरिटी एक्ट को पास किया।
1938: बीबीसी की पहली फीचर फिल्म (स्टूडेंट ऑफ प्राग) टेलीविजन पर प्रसारित हुई।
1947: रात 11 बजे नई दिल्ली में संविधान सभा का विशेष सत्र आयोजित हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने की थी और इसके बाद भारत की स्वतंत्रता का संकल्प लिया गया। मध्यरात्रि (रात 12 बजे) भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा में अपना प्रसिद्ध भाषण ‘टैक्स्ट विद डेस्टिनी’ (Tryst with Destiny) दिया था। नेहरू नए नए मंत्रिमंडल के सदस्यों और उनके विभागों की घोषणा की।
1947: मुहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने।
1980: लेक वालेसा के नेतृत्व में पोलैंड के ग्दांस्क शिपयार्ड में ऐतिहासिक मजदूर हड़ताल शुरू हुई थी। इसी विरोध प्रदर्शन से ‘सोलीडारनोश’ (सलिडेरिटी) ट्रेड यूनियन का जन्म हुआ, जिसने आगे चलकर सोवियत संघ के प्रभाव से पोलैंड और पूर्वी यूरोप को कम्युनिस्ट शासन से मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाई।
1990: भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘निशान-ए-पाकिस्तान’ से सम्मानित किया गया था।
2007: उत्तरी इराक के कहतानिया में चार आत्मघाती कार बम हमले में 796 लोग मारे गए और लगभग 1,500 लोग घायल हुए।
2010: भारत सरकार ने 64वें स्वतंत्रता दिवस पर काबुल में शहीद हुए सेना चिकित्सा कोर के मेजर एल ज्योतिन सिंह को अशोक चक्र तथा विनोद चौबे और मेजर दविंद्र सिंह जस को कीर्ति चक्रप्रदान करने की घोषणा की।
2010: पहले समर यूथ ओलंपिक की शुरुआत सिंगापुर में हुई, जिसमें 14 से 18 वर्ष की आयु के युवा एथलीटों ने हिस्सा लिया।
2013: मिस्र की राजधानी काहिरा में सुरक्षा बलों ने रबीआ अल-अदाविया और अल-नहदा चौराहों पर प्रदर्शन कर रहे पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों के शिविरों पर कार्रवाई की। इस हिंसक कार्रवाई और झड़पों में 638 लोग मारे गए।
2021: हैती में आए 7.2 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में 2,200 से अधिक लोगों की मौत हुई और हजारों इमारतें तबाह हो गईं।
2023: मानसूनी मूसलाधार बारिश के कारण शिमला के समरहिल शिव मंदिर पर भीषण भूस्खलन हुआ, जिसमें मंदिर ढहने से 20 लोगों की मृत्यु हो।
2023: सोलन जिले की कंडाघाट तहसील के जादोन गांव में बादल फटने के बाद हुए भूस्खलन से एक ही परिवार के 7 लोगों की मृत्यु हो गई।
2024: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने घोषणा की कि यूक्रेनी सेना ने 100 से अधिक रूसी सैनिकों को बंदी बनाया।
14 अगस्त को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1905: एन. एम. आर. सुब्बारामन – भारतीय स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता।
1918: आर्थर कॉर्नबर्ग – अमेरिकी जीव-रसायनशास्त्री (Biochemist), जिन्हें डीएनए (DNA) संश्लेषण के जैविक तंत्र की खोज के लिए 1959 में चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार मिला।
1923: कुलदीप नैयर – पत्रकार, लेखक, संपादक और राजनयिक, जिन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से लोकतंत्र, नागरिक स्वतंत्रता और मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
1957: जॉनी लीवर – हिन्दी फ़िल्मों के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता।
1995: ऐश्वर्या पिस्से – भारतीय सर्किट और ऑफ़-रोड मोटरसाइकिल रेसर हैं। वह मोटरस्पोर्ट्स में विश्व खिताब जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट हैं, जिन्होंने साल 2019 में FIM बाजास विश्व कप (महिला वर्ग) अपने नाम किया था।
14 अगस्त को हुए प्रमुख निधन
1898: बर्टोल्ट ब्रेख्त – 20वीं सदी के महान जर्मन नाटककार, कवि और थियेटर निर्देशक, जिन्होंने ‘एपिक थियेटर’ (Epic Theatre) की अवधारणा दी।
1941: केसरी सिंह बारहठ – स्वतंत्रता सेनानी, प्रख्यात राजनीतिज्ञ, कवि, विचारक व लेखक। उन्हें ‘राजस्थान केसरी’ के नाम से भी जाना जाता है।
1979: एडौर्ड गौबर्ट – पुडुचेरी (जो तब पांडिचेरी था) के पहले मुख्यमंत्री। उन्हें ‘पापा गौबर्ट’ के नाम से भी जाना जाता था।
1984: के. डी. जाधव (खाशाबा जाधव) – भारत के महान पहलवान और 1952 हेलसिंकी ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले स्वतंत्र भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता।
1996: अमृतराय – हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार, कहानीकार, निबंधकार और जीवनी-लेखक। वे उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद के छोटे पुत्र थे। अपने पिता की प्रामाणिक जीवनी ‘कलम का सिपाही’ (1962) लिखने के लिए उन्हें वर्ष 1963 का प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।
2000: हवा सिंह – भारत के महान हैवीवेट मुक्केबाज और भारतीय बॉक्सिंग के पितामह। उन्होंने 1966 और 1970 के बैंकॉक एशियाई खेलों में लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। 14 अगस्त 2000 को द्रोणाचार्य पुरस्कार मिलने से मात्र 15 दिन पहले उनका निधन हो गया था।
2011: शम्मी कपूर – हिंदी सिनेमा के महान और दिग्गज अभिनेता। अपनी ऊर्जावान शैली, अनोखे नृत्य प्रदर्शन और ‘याहू’ अवतार के लिए पहचाने जाने वाले शम्मी कपूर को “अनप्लग्ड स्टार” और भारतीय सिनेमा के मुख्य शैलियों को बदलने वाले अभिनेताओं में गिना जाता है।
2012: विलासराव देशमुख – महाराष्ट्र पूर्व मुख्यमंत्री। वे महाराष्ट्र के दो बार मुख्यमंत्री रहे।
2017: चंद्रकांत देवताले – प्रसिद्ध भारतीय कवि एवं साहित्यकार। उन्हें वर्ष 2012 में उनके कविता-संग्रह ‘पत्थर फेर रहा हूँ’ के लिए प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
2022: राकेश झुनझुनवाला – भारत के प्रसिद्ध दिग्गज शेयर बाजार निवेशक और ‘अकासा एयर’ के सह-संस्थापक। उन्हें “भारत का वॉरेन बफे” भी कहा जाता था।
14 अगस्त के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस

14 अगस्त को भारत में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है। यह दिवस 1947 से चला आ रहा पारंपरिक दिवस नहीं, बल्कि भारत सरकार द्वारा 2021 में घोषित किया गया स्मृति दिवस है। भारत सरकार ने 2021 में 14 अगस्त को हर वर्ष यह दिवस मनाने की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य 1947 के भारत विभाजन के दौरान विस्थापन, हिंसा और जान गंवाने वाले लोगों को स्मरण करना तथा उनके संघर्ष और पीड़ा से आने वाली पीढ़ियों को अवगत कराना है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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