आपराधिक और NDPS Case में मजबूत आवाज बनकर उभरे एडवोकेट शामूल
सोमसी देष्टा: शिमला
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय, शिमला में प्रैक्टिस कर रहे युवा एवं प्रखर अधिवक्ता शामूल कौशल ने एनडीपीएस अधिनियम के एक बेहद पेचीदा मामले में कानून के धरातल पर ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। मूल रूप से कुल्लू जिला की सैंज तहसील के सराधार गांव के निवासी और सेवानिवृत्त आईटीबीपी अधिकारी नीरत सिंह के सुपुत्र अधिवक्ता शामूल कौशल आज उच्च न्यायालय में आपराधिक और मादक पदार्थ रोधी कानून के मामलों में एक मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं।
हाल ही में उन्होंने नेपाली मूल के एक आरोपी विजया तामांग की ओर से पैरवी करते हुए माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष कानून और मानवाधिकारों की ऐसी मजबूत दलीलें पेश कीं, जिसके आगे अभियोजन पक्ष निरुत्तर नजर आया। इस मामले में आरोपी के कब्जे से करीब 2 किलोग्राम चरस की बरामदगी का आरोप था, जो एनडीपीएस एक्ट के तहत ‘कमर्शियल क्वांटिटी’ की श्रेणी में आता है, जहां जमानत मिलना बेहद मुश्किल माना जाता है।
अधिवक्ता शामूल कौशल ने अदालत में पुरजोर तर्क दिया कि आरोपी 14 जून 2024 से लगातार न्यायिक हिरासत में है। लगभग दो साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी अभियोजन पक्ष एक भी गवाह का परीक्षण कराने में नाकाम रहा। मामले में अभी भी 18 गवाहों की गवाही होना बाकी है, जिससे साफ है कि ट्रायल जल्द खत्म होने की कोई गुंजाइश नहीं थी।
शामूल कौशल की अकाट्य दलीलों से सहमत होते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक आदेश में माना कि ट्रायल में असाधारण देरी देश के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी को मिले ‘शीघ्र सुनवाई के मौलिक अधिकार’ का सीधा उल्लंघन है। इसी संवैधानिक आधार को ढाल बनाकर न्यायालय ने आरोपी को नियमित जमानत मंजूर कर ली।
अधिवक्ता शामूल कौशल ने अब तक शिमला, सोलन और कुल्लू सहित विभिन्न अदालतों में चिट्टा और चरस से जुड़े कई बड़े मामलों में सफलता की इबारत लिखी है। कानूनी गलियारों में उनकी इस हालिया सफलता की जबरदस्त गूंज है, जिसने क्रिमिनल और एनडीपीएस मामलों के एक बेहद सक्षम व माहिर वकील के रूप में उनकी पहचान को प्रदेश भर में और मजबूत कर दिया है।
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