27 July in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार वर्ष का 208वां दिन (लीप वर्ष में 209वां दिन) है। साल में अभी और 157 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 27 जुलाई का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 27 जुलाई का इतिहास एवं घटनाक्रम।
1949: जब दुनिया के पहले जेट विमान ने भरी उड़ान, फिर एक चूक ने मिटा दिया नाम

आसमान में जेट की रफ्तार से सफर करने का जो सुख आज हम उठाते हैं, उसकी नींव आज ही के दिन रखी गई थी। बात 1940 के दशक की है। उस ज़माने के सभी यात्री विमानों में पिस्टन इंजन लगे होते थे। वे न केवल बेहद धीमी रफ्तार से उड़ते थे, बल्कि उनके इंजन का कानफोड़ू शोर और उड़ते समय होने वाले झटके यात्रियों का सफर मुश्किल कर देते थे।
इस परेशानी को खत्म करने का सपना देखा ब्रिटेन के मशहूर एयरक्राफ्ट डिजाइनर जेफ्री डी हैविलैंड ने। वे द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले ही यात्रियों के लिए एक जेट पैसेंजर प्लेन बनाने की सोच रहे थे। युद्ध खत्म होते ही जब लड़ाकू विमानों की मांग घटी, तो जेफ्री को अपने इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिल गया।
जेफ्री ने शक्तिशाली ‘घोस्ट 50 Mk1’ इंजन का इस्तेमाल करके दुनिया का पहला कमर्शियल जेट प्लेन तैयार किया और नाम दिया ‘डी हैविलैंड कोमेट’।
ज्यादा ऊंचाई पर यात्रियों को सांस लेने में तकलीफ न हो, इसके लिए केबिन के भीतर ऑक्सीजन का दबाव बनाए रखने की क्रांतिकारी सुविधा दी गई। 27 जुलाई 1949 को इस जेट विमान ने ब्रिटेन के आसमान में अपनी पहली सफल उड़ान भरी। इसके बाद प्रतिष्ठित एयरलाइंस के इंजीनियर्स को कॉकपिट में बैठाकर कई घंटों की कठिन टेस्ट फ्लाइट्स भी कराई गईं, जिनमें विमान खरा उतरा।
सफल परीक्षणों के बाद ब्रिटिश ओवरसीज एयरवेज कॉर्पोरेशन (BOAC) ने इसे अपनी सेवा में शामिल किया। 9 जनवरी 1951 को 44 यात्रियों को लेकर ‘कोमेट’ ने लंदन से जोहान्सबर्ग के लिए पहली व्यावसायिक उड़ान भरी। पिस्टन इंजन के मुकाबले आधी समय सीमा में शांत और आरामदायक सफर देने वाले इस जेट विमान की धूम पूरी दुनिया में मच गई।
कामयाबी की यह बुलंदी ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी। अगले कुछ ही सालों में ‘कोमेट’ विमान एक के बाद एक कई भयंकर हादसों का शिकार हुए, जिनमें दर्जनों यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। जांच में पता चला कि केबिन में बार-बार एयर प्रेशर बनने और घटने की वजह से विमान के धातु में दरारें आ जाती थीं।
सुरक्षा के लिहाज से 1954 में सभी कोमेट विमानों की उड़ानों पर रोक लगा दी गई। जेफ्री ने इन तकनीकी कमियों को सुधारने के लिए रात-दिन एक कर दिया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 1957 में अमेरिकी कंपनी ‘बोइंग’ के बाजार में आते ही ‘डी हैविलैंड’ का दबदबा खत्म हो गया और यह ऐतिहासिक कंपनी हमेशा के लिए बंद हो गई।
1996: जब ओलिंपिक के 100वें साल का जश्न बम धमाके से दहल उठा और हीरो ही बन गया संदिग्ध

यह कहानी ओलिंपिक इतिहास के उस काले पन्ने की है, जब दुनिया भर से आए लाखों खेल प्रेमियों का उत्साह एक ही पल में चीख-पुकार में बदल गया। खेलों के शताब्दी समारोह के बीच हुए इस हमले ने पूरे अमेरिका और खेल जगत को हिलाकर रख दिया था।
साल 1896 में आधुनिक ओलिंपिक खेलों की शुरुआत हुई थी। ठीक 100 साल बाद, 1996 में ओलिंपिक खेलों का भव्य शताब्दी समारोह अमेरिका के अटलांटा शहर में आयोजित किया जा रहा था। दुनिया भर के लाखों लोग इन ऐतिहासिक क्षणों का गवाह बनने के लिए जुटे हुए थे।
26 जुलाई 1996 (शुक्रवार) की रात, उस दिन के खेल इवेंट्स खत्म होने के बाद ओलिंपिक विलेज के ‘सेंटेनियल ओलिंपिक पार्क’ में कॉन्सर्ट चल रहा था। वीकेंड होने के कारण हजारों लोग संगीत की धुन पर जश्न मना रहे थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में खुशियां मातम में बदलने वाली हैं।
देर रात (27 जुलाई) अचानक एक जोरदार धमाका हुआ। इस भीषण विस्फोट में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई और 111 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इस भयावह मंजर को कवर करने के लिए तेजी से दौड़ रहे एक पत्रकार की भी दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई।
लेकिन इस तबाही के बीच एक बड़ा हादसा होने से टल गया, और उसकी वजह बने सुरक्षा गार्ड रिचर्ड जेवेल।
धमाके से ठीक पहले जेवेल की नजर एक लावारिस संदिग्ध बैग पर पड़ी। खतरे को भांपते ही जेवेल ने अपनी जान की परवाह किए बिना तुरंत पुलिस को अलर्ट किया और पार्क में मौजूद लोगों को पीछे धकेलना शुरू कर दिया। जेवेल की इसी सूझबूझ और तत्परता की वजह से सैकड़ों लोगों की जान बच गई, वरना मौतों का आंकड़ा बेहद खौफनाक हो सकता था।
त्रासदी की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। हादसे के कुछ ही दिनों बाद जांच एजेंसियों और मीडिया ने तत्परता दिखाने वाले उसी सुरक्षा गार्ड रिचर्ड जेवेल को मुख्य संदिग्ध बना दिया। जेवेल पर आरोप लगाया गया कि उसने ‘हीरो’ बनने के लिए खुद ही बम रखा था। हफ्तों तक चले मीडिया ट्रायल और एफबीआई (FBI) की कड़ी पूछताछ के बाद आखिरकार जेवेल पूरी तरह निर्दोष साबित हुए।
बाद में एफबीआई ने असली मास्टरमाइंड एरिक रुडोल्फ नाम के एक चरमपंथी को गिरफ्तार किया। रुडोल्फ ने 1996 से 1997 के बीच अटलांटा ओलिंपिक समेत 4 अलग-अलग बम धमाकों को अंजाम देने की बात कबूली। अदालत ने उसे बिना पैरोल के आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
1897: जब तिलक की कलम से डरी ब्रिटिश हुकूमत ने लगाया राजद्रोह का मुकदमा

यह कहानी भारत मां के उस निडर लाल की है, जिसने अंग्रेजों की आंखों में आंखें डालकर ललकारा था “स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा!” जिनकी निर्भीक लेखनी और कड़क तेवरों से घबराकर ब्रिटिश सरकार को उन्हें सलाखों के पीछे धकेलना पड़ा था।
बात 1896-97 की है, जब महाराष्ट्र भयंकर ‘प्लेग महामारी’ की चपेट में आ गया था। लोग तड़प-तड़पकर जान गंवा रहे थे, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत राहत कार्य चलाने के बजाय आम जनता पर अत्याचार कर रही थी। उस दौर में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने खुद को पूरी तरह से जनता की सेवा और राहत कार्यों में झोंक दिया।
महामारी से निपटने के लिए अंग्रेजों ने स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर चार्ल्स रैंड को तैनात किया था। रैंड ने बीमारी रोकने के नाम पर लोगों के घरों में घुसकर तोड़फोड़ की, महिलाओं का अपमान किया और धार्मिक स्थलों की मर्यादा तार-तार कर दी। अंग्रेजों के इस क्रूर और उपेक्षापूर्ण रवैये ने तिलक के भीतर गुस्से की ज्वाला भड़का दी।
लोकमान्य तिलक ने अपने प्रसिद्ध समाचार पत्र ‘केसरी’ में अंग्रेजों की बर्बरता के खिलाफ एक के बाद एक तीखे लेख लिखे। उन्होंने अपने लेखों में साफ तौर पर कहा कि महामारी की इस भयावहता और जनता के दुखों के लिए सीधे तौर पर अफसर चार्ल्स रैंड ज़िम्मेदार है।
तिलक के इन लेखों ने जनता के दिल में सुलग रही बगावत की आग में घी का काम किया। परिणामस्वरूप, चापेकर भाइयों (दामोदर और बालकृष्ण चापेकर) ने जनता पर जुल्म ढाने वाले अफसर रैंड की हत्या कर दी।
रैंड की हत्या से बौखलाई ब्रिटिश हुकूमत ने इसका सीधा ठीकरा बाल गंगाधर तिलक पर फोड़ा। अंग्रेजों ने आरोप लगाया कि तिलक के लेखों ने ही जनता को हिंसा के लिए उकसाया है।
आखिरकार 27 जुलाई 1897 को अंग्रेजों ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक को ‘राजद्रोह’ (Section 124A) के गंभीर आरोप में गिरफ्तार कर लिया। यह भारतीय इतिहास में मीडिया/पत्रकारिता पर राजद्रोह लगाने के शुरुआती और सबसे चर्चित मामलों में से एक था।
अदालत ने उन्हें 18 महीने के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, लेकिन इस गिरफ्तारी ने तिलक को रातों-रात पूरे देश का चहेता ‘लोकमान्य’ नेता बना दिया।
देश-विदेश में 27 जुलाई को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1586: सर वाल्टर रैले वर्जीनिया से इंग्लैंड (लंदन) तंबाकू लेकर आए थे, जिससे वहां धूम्रपान का चलन तेजी से लोकप्रिय हुआ।
1775: अमेरिकी क्रांति (American Revolutionary War) के दौरान महाद्वीपीय कांग्रेस ने पहले सैन्य अस्पताल (Army Hospital) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी थी
1789: संयुक्त राज्य अमेरिका में पहली फेडरल एजेंसी द डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेन अफेयर्स (अमेरिकी विदेश विभाग) की स्थापना हुई।
1836: दक्षिण ऑस्ट्रेलिया में एडिलेड की स्थापना की गई। यह शहर ब्रिटेन के राजा विलियम चतुर्थ की पत्नी, रानी एडिलेड के नाम पर बसाया गया था।
1866: आयरलैंड और न्यूफ़ाउंडलैंड (कनाडा) के बीच पहला सफल स्थायी ट्रांस-अटलांटिक टेलीग्राफ केबल चालू हुआ, जिसने वैश्विक संचार में क्रांति ला दी।
1888: अमेरिकी आविष्कारक फिलिप डब्ल्यू. प्रैट ने बोस्टन में पहले अमेरिकी इलेक्ट्रिक वाहन (तिपहिया) का प्रदर्शन किया था। इसे फ्रेड एम. किम्बल कंपनी द्वारा निर्मित किया गया था।
1889: लंदन में इंडियन नेशनल कांग्रेस की ‘ब्रिटिश इंडिया कमेटी’ की स्थापना हुई थी, जिसके प्रमुख नेता दादाभाई नौरोजी, विलियम वेडरबर्न, डब्ल्यू एस कैन और विलियम डिग्बी थे। समिति के मुख्य उद्देश्य ब्रिटेन के लोगों और संसद को भारत के मुद्दों और समस्याओं के बारे में बताना। भारत सरकार की नीतियों के प्रति ब्रिटिश जनता में जागरूकता पैदा करना
1908: हाँग काँग के टायफून ने यात्री स्टीमर यिंग किंग से 421 लोगों की जान गंवाई।
1921: टोरंटो विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक सिर फ्रेडरिक बैंटिंग और चार्ल्स बेस्ट ने सफलतापूर्वक इंसुलिन की खोज की पुष्टि की थी, जिसने मधुमेह (Diabetes) के इलाज में चिकित्सा जगत में क्रांति ला दी।
1922: बेल्जियम के ब्रूसेल्स शहर में अंतर्राष्ट्रीय भौगोलिक संघ (IGU) का गठन किया गया था। यह दुनिया भर के भूगोलवेत्ताओं का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन है।
1935: चीन की यांग्त्ज़ी नदी में आई भीषण बाढ़ के कारण लगभग 1,45,000 लोगों की जान गई थी और लाखों लोग बेघर हो गए थे।
1940: ‘अ वाइल्ड हेयर’ नामक कार्टून शॉर्ट फिल्म में पहली बार बग्स बनी दुनिया के सामने आया।
1953: तीन वर्षों तक चले भीषण ‘कोरियाई युद्ध’ को समाप्त करने के लिए उत्तर कोरिया, चीन और संयुक्त राष्ट्र कमान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके बाद उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच ‘डिलीमिटेशन ज़ोन’ बना।
1972: अमेरिका के प्रसिद्ध और बेहद शक्तिशाली जेट फाइटर ‘McDonnell Douglas F-15 Eagle’ ने अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान भरी।
1976: चीन के तंगशान में हुए विनाशकारी भूकंप में 2,42,469 लोग मारे गए थे। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.8 से 8.2 मापी गई।
1982: इंदिरा गांधी ने अमेरिका का दौरा किया। 11 साल के बाद किसी प्रधानमंत्री का पहला अमेरिका दौरा था।
1982: भारत की ‘ह्यूमन कंप्यूटर’ मानी जाने वाली गणितीय जादूगर शकुंतला देवी ने अपनी अद्भुत मानसिक गणना क्षमता का प्रदर्शन कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया था।
1987: खोजकर्ताओं ने टाइटैनिक का मलबा खोजा।
1994: भारतीय निशानेबाज जसपाल राणा ने विश्व शूटिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता।
2002: उक्रेन के ल्वीव के पास स्कनिलिव एयरफील्ड पर एक एयर शो के दौरान विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। इस हादसे में 77 लोग मारे गए थे और 500 से ज्यादा घायल हुए थे। यह इतिहास का सबसे घातक एयर शो हादसा माना जाता है।
2006: इंटेल कॉर्प ने कोर 2 डॅयू माइक्रोप्रोसेसर्स पेश किया। यह कंप्यूटर की दुनिया में एक बड़ा बदलाव था।
2007: आस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने लगभग 40,000 साल पहले पाये जाने वाले विशालकाय जीव वोमबैट के जवड़े का जीवाश्म मिलने का दावा किया।
2012: लंदन में 30वें ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया था। लंदन तीन बार ओलंपिक खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया का पहला शहर बना था।
2021: गुजरात के कच्छ जिले में स्थित हड़प्पा कालीन ऐतिहासिक शहर धोलावीरा को यूनेस्को की विश्व सूची में शामिल किया गया। यह दर्जा पाने वाला धोलावीरा भारत का 40वां विश्व धरोहर स्थल बना और सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी भारत की पहली साइट बनी।
2021: बसवराज बोम्मई को कर्नाटक का नया मुख्यमंत्री चुना गया।
2022: 11 साल के प्रतिबंध और सुरक्षा चिंताओं के समाधान के बाद गूगल ने भारत के 10 प्रमुख शहरों में अपनी ‘Google Street View’ सेवा को आधिकारिक रूप से फिर से लॉन्च किया।
2022: लोकसभा ने ‘राष्ट्रीय डोपिंग रोधी विधेयक 2021’ पारित किया, जिसका उद्देश्य खेलों में डोपिंग रोधी तंत्र को वैधानिक ढांचा और मजबूती प्रदान करना था।
2022: अंगोला (अफ़्रीका) की ‘लुलो खदान’ से 170 कैरेट का दुर्लभ गुलाबी हीरा मिला, जिसे पिछले 300 वर्षों में खोजा गया सबसे बड़ा प्राकृतिक गुलाबी हीरा माना गया।
2024: असम के अहोम राजवंश के शाही टीलों ‘चराईदेव मोइदाम’ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया। यह दर्जा पाने वाला भारत का 43वां यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना।
27 जुलाई को जन्मे प्रमुख व्यक्ति
1827: जोसेफ़ लिस्टर- ब्रिटिश शल्य चिकित्सक, जिन्हें आधुनिक एंटीसेप्टिक सर्जरी का जनक माना जाता है।
1913: कल्पना दत्त – भारतीय स्वतंत्रता सेनानी।
1940: भारती मुखर्जी – भारतीय मूल की प्रसिद्ध लेखिका थीं, जिन्होंने अमरीका में कई पुरस्कार जीते थे।
1960: उद्धव ठाकरे – महाराष्ट्र के 19वें मुख्यमंत्री।
1969: जॉन्टी रोड्स – दक्षिण अफ्रीका के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और अब तक के सबसे धमाकेदार फील्डर।
1969: ट्रिपल एच: अमेरिकी पेशेवर रेसलर, WWE के मुख्य कंटेंट अधिकारी और पूर्व विश्व चैंपियन।
27 जुलाई को हुए प्रमुख निधन
1844: जॉन डाल्टन –अंग्रेज़ रसायनशास्त्री, जिन्होंने आधुनिक परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory) की नींव रखी।
1891: राजेन्द्रलाल मित्रा – भारत विद्या से संबंधित विषयों के प्रख्यात विद्वान।
1944: पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल – हिंदी में डी.लिट. की उपाधि प्राप्त करने वाले पहले भारतीय।
1970: पत्तम थानु पिल्लई – स्वतंत्रता सेनानी, केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब के पूर्व राज्यपाल।
1987: सालिम अली – भारतीय पक्षी विज्ञानी और प्रकृतिवादी।
1992: अमजद ख़ान – प्रसिद्ध अभिनेता, फिल्म शोले के गब्बर।
1999: आई. के. कुमारन – स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने 1954 में फ्रांस से मुक्ति के लिए संघर्ष किया।
2002: कृष्णकान्त – भारत के दसवें उपराष्ट्रपति व स्वतंत्रता सेनानी।
2003: बॉब होप – अमरीका के बहुचर्चित हास्य कलाकार।
2006: शिवदीन राम जोशी – अपने समय के जाने-माने कवि।
2015: डॉ. अब्दुल कलाम – भारत के 11वें राष्ट्रपति, मिसाईलमैन।
2017: एन. धरम सिंह – कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्यमंत्री।
27 जुलाई के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव
केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल स्थापना

केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) स्थापना दिवस प्रत्येक वर्ष 27 जुलाई को मनाया जाता है। CRPF मूलत: क्राउन रिप्रेंजेन्टेटिव पुलिस के नाम से 27 जुलाई, 1939 को नीमच मध्य प्रदेश में प्रथम बटालियन के साथ स्थापित किया गया। स्वतंत्रता के बाद क्राउन रिप्रेजेन्टेटिव पुलिस को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल में परिवर्तित कर दिया गया। इस बल की दूसरी बटालियन आज़ादी के बाद तुरन्त बनी थी और तीसरी बटालियन 1956 में बनी थी। CRPF आतंकवाद, नक्सलवाद तथा अन्य भयावह हालातों का सामना करता है। आज इसकी संख्या बढ़कर 217 बटालियन की हो गई है। केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल विश्व का सबसे बड़ा एवं पुराना बल बन गया है।
कार्य : यह बल राज्य सरकारों की आवश्यकतानुसार उनके प्रशासन द्वारा दिए गए आदेशों के मुताबिक भी कार्य करता है। बल का प्रमुख कार्य क़ानून व्यवस्था को बनाए रखना, अति विशिष्ट लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा देश के आंतरिक हिस्सों में असामाजिक तत्त्वों से निपटना आदि भी इसके प्रमुख कार्यों में से है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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