जोगिंदरनगर के शिक्षक-चित्रकार रजनीश ठाकुर की प्रेरक कहानी
जोगिंदरनगर से जतिन लटावा
Rajneesh Thakur: जिला मंडी की तहसील जोगिंदरनगर की ग्राम पंचायत कोलंग के छोटे से गांव पनगौण में जन्मे रजनीश ठाकुर आज शिक्षा और कला दोनों क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वर्तमान में गरोड़ू में निवास कर रहे रजनीश ठाकुर पिछले 19 वर्षों से शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे हैं और राजकीय केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय भराड़ू में जेबीटी शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
एक साधारण परिवार से संबंध रखने वाले रजनीश ठाकुर के पिता भौमिकीय शाखा में एसडीओ पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, जबकि उनकी माता गृहिणी हैं। बचपन से ही विभिन्न जिलों और विद्यालयों में शिक्षा प्राप्त करने के कारण उन्हें अलग-अलग संस्कृतियों और परिवेशों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने बीएससी (नॉन-मेडिकल), बीएड तथा राजनीति विज्ञान में एमए की शिक्षा हासिल की और छात्र जीवन में कई बार प्रथम स्थान तथा डिस्टिंक्शन प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

हालांकि उनकी पहचान केवल एक शिक्षक तक सीमित नहीं है। चित्रकला उनकी सबसे बड़ी रुचि और जुनून है। स्कूल और कॉलेज स्तर पर अनेक प्रतियोगिताओं में पुरस्कार जीतने के साथ-साथ उन्होंने जिला और राज्य स्तर पर भी अपने संस्थानों का प्रतिनिधित्व किया। कैनवास और पोस्टर पेंटिंग में विशेष रुचि रखने वाले रजनीश एक्रेलिक, ऑयल और वॉटर कलर के माध्यम से अपनी कल्पनाओं और भावनाओं को जीवंत रूप देते हैं।
इसके अलावा भाषण, वाद-विवाद, नाट्य मंचन, शायरी, कविता लेखन, साहित्य और संगीत में भी उनकी गहरी रुचि है। उनका मानना है कि शिक्षा, कला और साहित्य समाज को बेहतर दिशा देने के सबसे प्रभावशाली माध्यम हैं।

रजनीश ठाकुर कहते हैं कि बच्चों को पढ़ाना उनके लिए केवल नौकरी नहीं, बल्कि एक मिशन है। वहीं कला उनके विचारों और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है। एक शिक्षक, कलाकार और साहित्य प्रेमी के रूप में उनकी यह बहुआयामी यात्रा आज युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
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