17 June in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 17 जून वर्ष का 168वां (लीप वर्ष में यह 169वां) दिन है। साल में अभी 198 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 17 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 17 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
17 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 17 June in History)
1631: मुमताज के निधन के 7 महीने बाद शुरू हुआ था ताजमहल का निर्माण, वादा पूरा करने में शाहजहां को लग गए थे 22 साल
17 जून 1631 को मुमताज ने एक बेटी को जन्म दिया। बच्चे के जन्म के बाद उसी दिन मुमताज का निधन हो गया। उस वक्त दक्कन के खां जहां लोधी ने शाहजहां के खिलाफ विद्रोह कर दिया था। शाहजहां इस विद्रोह से निपटने के लिए सफर पर थे। मुमताज भी उनके साथ थीं। उनके निधन के बाद मुमताज को मध्यप्रदेश के बुरहानुपर में ताप्ती नदी के किनारे दफनाया गया।
कहा जाता है कि मुमताज ने शाहजहां से चार वादे पूरे करने को कहा था, जिसमें से एक वादा ये था कि मरने के बाद मुमताज की याद में एक भव्य इमारत बनवाई जाए। खां जहां लोधी से निपटने के बाद शाहजहां आगरा पहुंचे और मुमताज को किए वादे को पूरा करने में लग गए।
दिसंबर 1631 में मुमताज के शव को बुरहानपुर से आगरा लाया गया। एक बड़े काफिले के साथ 8 जनवरी 1632 को शव आगरा पहुंचा। शाहजहां ने आगरा में यमुना नदी के किनारे एक भव्य मकबरा बनवाना शुरू किया।
दुनियाभर से हुनरमंद कलाकार बुलाए गए। पत्थरों पर फूल तराशने के लिए अलग, तो अक्षर तराशने के लिए अलग कारीगर बुलवाए गए। कोई कलाकार गुंबद तराशने में माहिर था, तो कोई मीनार बनाने में। 20 हजार से भी ज्यादा कारीगर आगरा में आए जिन्हें ठहराने के लिए एक अलग बस्ती बसाई गई।
इसी तरह दुनियाभर से कीमती पत्थर और रत्नों को लाया गया। दिन-रात ताजमहल को बनाने का काम चलता रहा और करीब 22 साल बाद ताजमहल बनकर तैयार हुआ। आज ताजमहल को दुनिया के सात अजूबों में गिना जाता है। यूनेस्को ने इस इमारत को विश्व धरोहर घोषित कर रखा है। ताजमहल की खूबसूरती देखने हर साल दुनियाभर से डेढ़ लाख से भी ज्यादा पर्यटक आगरा आते हैं।
1961: भारत में बने पहले फाइटर प्लेन ने भरी थी पहली उड़ान
आजादी के बाद से ही हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड (HAL) ट्रेनर एयरक्राफ्ट का निर्माण कर रही थी। दुनिया के बाकी विकसित देश सुपरसोनिक फाइटर एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल कर रहे थे। भारतीय सेना के पास इस तरह के विमान नहीं थे। प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसकी जिम्मेदारी हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड को दी।
उस समय हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड के पास फाइटर प्लेन की डिजाइन और निर्माण का अनुभव नहीं था। नेहरू ने जर्मन वैज्ञानिक कर्ट टैंक से बात की। कर्ट ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए कई बेहतरीन फाइटर प्लेन डिजाइन किए थे। नेहरू के कहने पर कर्ट अगस्त 1956 में भारत आ गए। उन्होंने हिन्दुस्तान एयरक्राफ्ट लिमिटेड के डिजाइनर के साथ मिलकर फाइटर प्लेन बनाने की तैयारी शुरू की।
दो साल बाद टैंक की टीम ने फाइटर प्लेन का एक प्रोटोटाइप तैयार कर लिया था। इस प्रोटोटाइप में इंजन नहीं था और इंजन के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार आज ही के दिन साल 1961 में पहली बार भारत में बने फाइटर प्लेन ने उड़ान भरी। इसे HF-24 Marut नाम दिया गया।
1885: न्यूयॉर्क पहुंची थी स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी
4 जुलाई 1776 को अमेरिका ब्रिटेन से आजाद हुआ था। अमेरिका की आजादी की 100वीं सालगिरह पर फ्रांस के लोगों ने अमेरिका को एक गिफ्ट देने के बारे में सोचा। फ्रांस के राजनीतिज्ञ एडुअर्ड डी लाबौले ने प्रसिद्ध फ्रांसीसी मूर्तिकार फ्रेडेरिक ऑगस्टे बार्थेली के साथ मिलकर मूर्ति बनाने की योजना तैयार की। मूर्ति बनाने में जो भी खर्च आना था, उसे क्राउड फंडिंग के जरिए जुटाने का फैसला लिया गया। क्राउंड फंडिंग के लिए अलग-अलग इवेंट का आयोजन किया गया और एक अखबार में दान की अपील के बाद 1 लाख डॉलर से भी ज्यादा की राशि इकट्ठा हो गई।
लोहे और तांबे की बड़ी-बड़ी प्लेट्स को जोड़कर 200 टन से भी ज्यादा वजनी मूर्ति बनाई गई। जुलाई 1884 में मूर्ति को बनाने का काम पूरा हो गया। इधर अमेरिका में स्टेच्यू को लगाने की जगह भी तय कर ली गई और प्लेटफॉर्म बनाने का काम भी शुरू हो गया।
अब बड़ा काम मूर्ति को फ्रांस से न्यूयॉर्क ले जाना था। विशाल मूर्ति में से 350 छोटे-छोटे हिस्से अलग किए गए और विशेष रूप से तैयार जहाज ‘आइसेर’ के जरिए न्यूयॉर्क लाया गया। आज ही के दिन साल 1885 में ये जहाज न्यूयॉर्क पहुंचा था। 28 अक्टूबर 1886 को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड ने हजारों दर्शकों के सामने स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी का अनावरण किया था l
स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी एक महिला की मूर्ति है, जो स्वतंत्रता की रोमन देवी लिबर्टस का प्रतिनिधित्व करती है। स्टेच्यू के दाएं हाथ में मशाल है और बाएं हाथ में एक किताब या तख्ती है जिस पर JULY IV MDCCLXXVI लिखा हुआ है, ये अमेरिका की आजादी की तारीख है। मूर्ति के मुकुट से सूरज की 7 किरणें निकल रही हैं, जो दुनिया के 7 महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। अमेरिका के लिबर्टी आइलैंड पर स्थित इस मूर्ति को देखने हजारों लोग आते हैं।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 17 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1799: नेपोलियन बोनापार्ट ने इटली को अपने साम्राज्य में शामिल किया।
1944: आइसलैंड को डेनमार्क से स्वतंत्रता मिली।
1947: बर्मा ने खुद को गणतंत्र घोषित किया।
1967: चीन हाइड्रोजन बम से संपन्न दुनिया का चौथा देश बना।
1963: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों में बाइबिल के आवश्यक पठन पर पाबंदी लगाई।
1970: शिकागो में पहली बार किडनी प्रत्यारोपण का ऑपरेशन हुआ।
1974: ब्रिटेन की संसद में एक बम धमाके में 11 लोग घायल हुए।
1974: लंदन टॉवर में हुए बम धमाके से 41 लोग घायल हो गए।
1985: जॉन हेन्ड्रिक्स ने संयुक्त राज्य अमेरिका में डिस्कवरी चैनल शुरू किया।
1991: राजीव गांधी को मरणोपरांत भारत रत्न दिया गया।
2003: फ़्रांस में 165 ईरानी आतंकवादी गिरफ़्तार।
2004: मंगल पर पृथ्वी की चट्टानों से मिलते-जुलते पत्थर मिले।
2004: बगदाद में सेना की भर्ती केन्द्र पर विस्फोट में 42 मरे तथा 127 घायल।
2008: भारत में विकसित हल्के लड़ाकू विमान ‘तेज़स’ का बंगलौर में सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।
2012: मिस्र के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए आम चुनाव हुए।
2012: चीन का “शनचो-9” अंतरिक्ष यान प्रक्षेपित किए जाने के बाद निश्चित कक्षा में पहुचने में सफल रहा।
17 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 17 June)
1887: कैलाश नाथ काटजू – मध्य प्रदेश राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री।
1903: ज्योति प्रसाद अग्रवाल – साहित्यकार, स्वतंत्रता सेनानी तथा फ़िल्म निर्माता।
1942: भगत सिंह कोश्यारी – उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री रहे हैं।
1973: लिएंडर पेस – भारत के सर्वश्रेष्ठ टेनिस खिलाड़ी।
1980: वीनस विलियम्स – सर्वश्रेष्ठ अमेरिकी महिला टेनिस खिलाड़ी।
1981: अमृता राव – भारतीय फिल्म अभिनेत्री।
17 जून को हुए निधन (Died on 17 June)
1839: लॉर्ड विलियम बेंटिक – भारत के गवर्नर जनरल।
1862: लॉर्ड कैनिंग – भारत के पहले वाइसराय।
1928: गोपबंधु दास – स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, कवि, साहित्यकार तथा प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता।
1965: मोतीलाल – प्रसिद्ध अभिनेता। उनको हिंदी सिनेमा के पहले सहज अभिनेता होने का श्रेय दिया जाता है। उनको फ़िल्म देवदास और परख के लिए फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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