25 June in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 25 जून वर्ष का 176वां (लीप वर्ष में यह 177वां) दिन है। साल में अभी 189 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 25 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 25 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
25 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 25 June in History)
1975: आज ही शुरू हुआ था भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय, इमरजेंसी के ऐलान से 13 दिन पहले इलाहाबाद में पड़ी इसकी नींव
तारीख 12 जून 1975…जगह – इलाहाबाद हाईकोर्ट परिसर। पूरे देश की नजरें यहां के जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा पर टिकी थीं। जस्टिस सिन्हा इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण मामले में अपना फैसला सुनाने वाले थे। ये मामला साल 1971 के चुनावों से जुड़ा था। इस चुनाव में इंदिरा गांधी ने रायबरेली से राजनारायण को हराया था। हारने के बाद राजनारायण ने चुनावी नतीजों को कोर्ट में चुनौती दी थी।
उन्होंने इंदिरा गांधी पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग, चुनाव में घोटाले और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था और मांग की थी कि ये चुनाव रद्द किया जाए। 12 जून की सुबह करीब 10 बजे जस्टिस सिन्हा अपने चैंबर से कोर्ट रूम में आए और अपना फैसला सुनाने लगे।
फैसले में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनाव में धांधली का दोषी करार दिया और चुनाव रद्द कर दिया। साथ ही जस्टिस सिन्हा ने ये भी कहा कि आने वाले 6 सालों तक इंदिरा चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। ऐसा पहली बार हुआ था कि भारत के प्रधानमंत्री का चुनाव ही रद्द कर दिया गया।
इंदिरा गांधी किसी भी कीमत पर प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थी। उन्होंने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया। 23 जून को इंदिरा गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को रोकने के लिए याचिका दायर की।
अगले ही दिन जस्टिस वीआर कृष्णा अय्यर ने याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट के फैसले पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएंगे, लेकिन इंदिरा प्रधानमंत्री पद पर बनीं रह सकती हैं। साथ ही ये भी कहा कि इस दौरान वे संसद की कार्यवाही में भाग तो ले सकती हैं, लेकिन वोट नहीं कर सकेंगी।
सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा को थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन इंदिरा के लिए ये काफी नहीं थी। इंदिरा गांधी के पास ये विकल्प था कि वे किसी और को प्रधानमंत्री बना सकती थीं, लेकिन कहा जाता है कि संजय गांधी इस बात के लिए राजी नहीं थे।
एक तरफ इंदिरा गांधी को कोर्ट से राहत नहीं मिली थी, दूसरी तरफ लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में पूरा विपक्ष सड़कों पर उतर कर इंदिरा के इस्तीफे की मांग कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद तो विपक्ष और आक्रामक हो गया था। 24 जून को फैसला आया और 25 जून को जयप्रकाश नारायण ने दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली का आयोजन किया।
इस रैली में लाखों की तादाद में भीड़ जुटी जिसे संबोधित करते हुए जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने रामधारी सिंह दिनकर की कविता का अंश पढ़ते हुए कहा – ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’। जेपी ने इंदिरा गांधी को स्वार्थी और महात्मा गांधी के आदर्शों से भटका हुआ बताते हुए उनसे इस्तीफे की मांग की।
इंदिरा गांधी अब चौतरफा घिर चुकी थीं। इधर जेपी की रैली खत्म हुई और उधर इंदिरा गांधी राष्ट्रपति भवन पहुंचीं। 25-26 जून की दरमियानी रात को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी के आदेश पर दस्तखत करा लिए। 26 जून सुबह 6 बजे कैबिनेट की आपातकालीन बैठक बुलाई गई। अभी तक देश को इस फैसले की भनक तक नहीं थी। इंदिरा गांधी ने ये फैसला लेने से पहले अपने मंत्रिमंडल से सलाह तक नहीं ली थी।
करीब आधे घंटे चली कैबिनेट बैठक के बाद इंदिरा गांधी ने आकाशवाणी पर देश में इमरजेंसी लगाने की घोषणा की। इसके साथ ही आजाद भारत के इतिहास के सबसे बुरे दौर की शुरुआत हो गई। विपक्षी नेताओं समेत कांग्रेस के नेताओं को भी जेल में डाल दिया गया, प्रेस पर पाबंदी लगा दी गई, नागरिकों के सारे अधिकार छीन लिए गए और देश में लोकतंत्र खत्म हो गया।
अगले दिन देश में अखबार नहीं छप पाए क्योंकि सरकार ने अखबार के दफ्तरों की बिजली काट दी थी। जो अखबार छप रहे थे, उन पर सख्त पाबंदिया लगाई गईं। अखबारों में क्या छपेगा क्या नहीं, इसके लिए सरकार ने अखबारों के दफ्तर में अफसरों को तैनात कर दिया।
इमरजेंसी के दौरान इंदिरा के छोटे बेटे संजय गांधी ने नसबंदी प्रोग्राम चलाया, जिसमें पकड़-पकड़कर लोगों की नसबंदी की गई। लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया। पूरा देश एक बड़ी जेल बन गया। इस दौरान इंदिरा गांधी ने नए-नए कानून लाकर संविधान को कमजोर करने की कोशिश भी की।
इस भयंकर त्रासदी को पूरा देश 21 महीनों तक झेलता रहा। जनवरी 1977 में घोषणा की गई कि 16 मार्च को देश में चुनाव होंगे। देश में चुनाव हुए और इंदिरा गांधी को जनता ने इमरजेंसी का सबक सिखा दिया। इंदिरा और संजय गांधी दोनों चुनाव हार गए। इसके बाद 21 मार्च 1977 को आपातकाल खत्म हो गया, लेकिन ये देश का सबसे काला वक्त साबित हुआ, जिसका दर्द लोगों के दिलों में आज भी जिंदा है।
साभार: दैनिक भास्कर
1983: भारत ने पहली बार जीता क्रिकेट वर्ल्ड कप
भारतीय खेलों के इतिहास में इस सुनहरे दिन को कभी नहीं भुलाया जा सकता। 25 जून 1983 को लॉर्ड्स के मैदान पर भारतीय क्रिकेट टीम ने जो इतिहास रचा, वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। फाइनल मुकाबले में मजबूत वेस्टइंडीज के सामने भारतीय टीम महज 183 रनों पर सिमट गई थी। तब वेस्टइंडीज के धाकड़ बल्लेबाजों को देखकर किसी ने नहीं सोचा था कि भारत यह मैच जीत सकता है। लंच के दौरान वेस्टइंडीज के खिलाड़ी जीत का जश्न मनाने के लिए शैंपेन की बोतलें तक ले आए थे।
लेकिन कप्तान कपिल देव का अटूट विश्वास ही मैच का टर्निंग पॉइंट बना। जब विवियन रिचर्ड्स तूफानी बल्लेबाजी कर रहे थे, तब मदन लाल की गेंद पर कपिल देव ने पीछे की ओर करीब 20 गज दौड़ते हुए एक असंभव सा कैच लपका। इस एक कैच ने पूरे मैच का रुख बदल दिया।
गेंदबाजों ने बेहतरीन अनुशासन दिखाया। मोहिंदर अमरनाथ और मदन लाल ने 3-3 विकेट चटकाकर वेस्टइंडीज की अजेय टीम को 140 रनों पर ढेर कर दिया। जब अमरनाथ ने माइकल होल्डिंग को एलबीडब्ल्यू (LBW) आउट किया, तो भारत 43 रनों से विश्व विजेता बन चुका था। फैंस मैदान पर दौड़ पड़े और अमरनाथ को अपनी जान बचाकर भागना पड़ा। मोहिंदर अमरनाथ को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए ‘मैन ऑफ द मैच’ चुना गया। इस ऐतिहासिक जीत ने न केवल वेस्टइंडीज का दबदबा खत्म किया, बल्कि भारत में क्रिकेट को एक धर्म बना दिया।
2024: केन्या में टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ Gen Z का ऐतिहासिक विद्रोह
केन्या में टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ ऐतिहासिक विद्रोह भड़का, जब मुख्य रूप से ‘जेन जेड’ (Gen Z) के युवाओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से एकजुट होकर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन किए थे। विद्रोह का कारण सरकार देश के भारी कर्ज को कम करने और राजस्व बढ़ाने के लिए नया वित्त विधेयक लाई थी, जिसमें ब्रेड, तेल और मोबाइल मनी ट्रांसफर जैसी आम जरूरतों पर भारी टैक्स लगाने का प्रस्ताव था।
25 जून 2024 को राजधानी नैरोबी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हो गए। आक्रोशित भीड़ सुरक्षा घेरा तोड़कर संसद भवन के अंदर घुस गई और परिसर के कुछ हिस्सों में आग लगा दी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भीषण झड़पों और गोलीबारी में कम से 39 लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। उग्र होते विद्रोह और अंतरराष्ट्रीय दबाव को देखते हुए, राष्ट्रपति रूटो ने 26 जून 2024 को बिल को वापस लेने और उसे कानून में न बदलने की घोषणा की।
1950: कोरियाई युद्ध की शुरुआत, जिसने कोरिया को हमेशा के लिए दो भागों में बांट दिया
यह शीत युद्ध के दौर का पहला सबसे बड़ा और विनाशकारी सैन्य संघर्ष था, जिसने कोरिया को हमेशा के लिए दो भागों में बांट दिया। इस दिन उत्तर कोरिया की कम्युनिस्ट सेना ने अचानक दक्षिण कोरिया की सीमा ’38वीं समानांतर रेखा’ को पार कर हमला कर दिया। उत्तर कोरिया को सोवियत संघ (रूस) और चीन का समर्थन था, जबकि दक्षिण कोरिया की रक्षा के लिए अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) की सेनाएं युद्ध में उतरीं। यह भीषण युद्ध तीन साल तक चला और 1953 में बिना किसी स्थायी शांति संधि के केवल एक युद्धविराम पर समाप्त हुआ।
देश-विदेश में 25 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1868: अमेरिका के राष्ट्रपति एंड्रयू जॉनसन ने सरकारी कर्मचारियों के लिये दिन में आठ घंटे काम करने का कानून पारित किया।
1913: बाबा सोहन सिंह की अध्यक्षता में गदर पार्टी का गठन हुआ।
1932: लॉर्ड्स पर भारतीय क्रिकेट टीम ने अपना पहला टेस्ट मैच खेला।
1947: ‘द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’ का पहला संस्करण प्रकाशित हुआ। इसे एना फ्रैंक ने लिखा था जो मात्र 16 साल की उम्र में हिटलर के कंसंट्रेशन कैंप में मार दी गई थीं।
1951: अमेरिकी टेलीविजन एवं रेडियो नेटवर्क सीबीएस ने न्यूयार्क से चार शहरों में पहले रंगीन टीवी प्रोग्राम का प्रसारण किया।
1975: मोजाम्बिक को पुर्तगाल से मिली आजादी- लगभग पांच शताब्दियों (करीब 470 वर्षों) तक पुर्तगाली शासन के अधीन रहने के बाद, इस देश ने ‘मोज़ाम्बिक मुक्ति मोर्चा’ के नेतृत्व में एक दशक लंबे सशस्त्र संघर्ष के बाद अपनी आजादी हासिल की। समोरा माचेल देश के पहले राष्ट्रपति बने थे।
1993: किम कैंपबेल कनाडा की 19वीं प्रधानमंत्री बनीं। वह कनाडा की प्रथम महिला प्रधानमंत्री है।
2013: उत्तराखंड में बाढ़ के दौरान रेस्क्यू मिशन में लगा वायुसेना का एक हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में क्रू मेंबर्स समेत 20 लोग मारे गए।
2020: भारत में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्र सरकार और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं की शेष बोर्ड परीक्षाएं पूरी तरह रद्द कर दी इसके तुरंत बाद ICSE बोर्ड ने भी परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया। छात्रों का रिजल्ट उनके पिछले आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर तैयार करने का फॉर्मूला इसी दिन कोर्ट के सामने रखा गया था।
2023: हिमाचल प्रदेश के मंडी, कुल्लू, सोलन और हमीरपुर जिलों में बादल फटने (Cloudburst) की घटनाओं के कारण अचानक भीषण बाढ़ और भूस्खलन पर्यटकों और स्थानीय लोगों सहित 200 से अधिक लोग फंस गए थे। सोलन व हमीरपुर में दो लोगों की जान चली गई थी।
2024: राहुल गांधी 18वीं लोकसभा में विपक्ष के नेता बनें। पिछले 10 सालों से लोकसभा में विपक्ष के नेता का पद खाली चल रहा था क्योंकि किसी भी विपक्षी पार्टी के पास न्यूनतम 10% सीटें नहीं थीं। इसी दिन राहुल गांधी ने हाथ में संविधान की प्रति लेकर सांसद पद की शपथ भी ली थी।
2024: लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) पद के लिए इतिहास में पहली बार चुनाव की स्थिति बनी। एनडीए (NDA) के उम्मीदवार ओम बिरला और विपक्ष (INDIA अलायंस) के उम्मीदवार के. सुरेश ने लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए अपना-अपना नामांकन दाखिल किया। स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में यह केवल तीसरा मौका था (और आजादी के बाद पहली बार) जब स्पीकर पद के लिए आम सहमति नहीं बनी और चुनाव कराना तय हुआ।
2025: भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (Gaganyatri Shubhanshu Shukla) ने ऐतिहासिक उड़ान भरते हुए अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए सफलतापूर्वक प्रस्थान किया। 1984 में विंग कमांडर राकेश शर्मा के अंतरिक्ष में जाने के बाद, वह अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बने।
25 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 25 June)
1852: एंटोनी गौडी– महान कतलन (स्पेनिश) वास्तुकार। दुनिया के सबसे अनूठे और कल्पनाशील आर्किटेक्ट्स (Architects) में से एक, एंटोनी गौडी का जन्म 25 जून 1852 को स्पेन में हुआ था। र्सिलोना का विश्व प्रसिद्ध चर्च ‘सग्रादा फ़ैमिलिया’ (Sagrada Família) और ‘पार्क गुएल’ उनकी वास्तुकला के बेजोड़ नमूने हैं, जिन्हें यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया है।
1900: लॉर्ड माउंटबेटन – ब्रिटिश राजनेता, नौसेना प्रमुख और भारत के अन्तिम वाइसराय।
1903: जॉर्ज ऑरवेल– प्रख्यात ब्रिटिश लेखक और पत्रकार। 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली और कालजयी लेखकों में शुमार जॉर्ज ऑरवेल का जन्म 25 जून 1903 को मोतिहारी (बिहार, भारत) में हुआ था (उस समय उनके पिता ब्रिटिश सेवा में वहां तैनात थे)। उनका मूल नाम एरिक आर्थर ब्लेयर था। उनके लिखे उपन्यास ‘एनिमल फार्म’ (Animal Farm) और ‘1984’ आज भी सत्तावादी और तानाशाही व्यवस्थाओं पर दुनिया के सबसे सटीक कटाक्ष माने जाते हैं। आधुनिक संस्कृति में ‘बिग ब्रदर’ (Big Brother) और ‘थॉट पुलिस’ जैसे शब्द उन्हीं की देन हैं।
1908: सुचेता कृपलानी – भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री। भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अग्रणी सेनानी और प्रसिद्ध राजनेता सुचेता कृपलानी का जन्म 25 जून 1908 को अंबाला (पंजाब, अब हरियाणा में) हुआ था। वे भारत के इतिहास में किसी भी राज्य (उत्तर प्रदेश) की मुख्यमंत्री बनने वाली पहली महिला थीं। भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने महात्मा गांधी के साथ बेहद सक्रिय भूमिका निभाई थी।
1931: विश्वनाथ प्रताप सिंह – भारत के आठवें प्रधानमंत्री। वी. पी. सिंह का जन्म 25 जून 1931 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, और राजीव गांधी की सरकार में केंद्रीय वित्त व रक्षा मंत्री रहे थे। भारतीय राजनीति में वे मुख्य रूप से सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने वाली ‘मंडल आयोग’ (Mandal Commission) की सिफारिशों को लागू करने के अपने ऐतिहासिक और बड़े फैसले के लिए जाने जाते हैं।
1924: मदन मोहन – बॉलीवुड फ़िल्म संगीत निर्देशक। गजलों और नज़्मों की रूहानी तर्जों के सृजन के लिए अपना लोहा मनवाने वाले इस संगीतकार का पूरा नाम मदन मोहन कोहली था। अपनी युवावस्था में ये एक सैनिक थे।
1961: सतीश शाह – भारत के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता।
1963: जॉर्ज माइकल– दिग्गज पॉप स्टार। दुनिया के सबसे प्रभावशाली पॉप गायकों और संगीतकारों में से एक, जॉर्ज माइकल का जन्म 25 जून 1963 को लंदन में हुआ था। उन्होंने ‘व्हाम!’ (Wham!) बैंड से लोकप्रियता हासिल की और बाद में ‘केयरलेस व्हिस्पर’ (Careless Whisper) और ‘लास्ट क्रिसमस’ जैसे कालजयी गानों से दुनिया भर के संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया।
1974: करिश्मा कपूर– प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री। वह हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित कपूर खानदान की पहली बेटी है जिन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। करिश्मा कपूर का जन्म मुंबई में हुआ था। वे 90 के दशक की सबसे सफल और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में से एक रहीं। उन्होंने ‘राजा हिंदुस्तानी’, ‘दिल तो पागल है’, और ‘फिजा’ जैसी फिल्मों में बेहतरीन अभिनय के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कई फिल्मफेयर पुरस्कार जीते।
1975: मनोज कुमार पांडेय – परमवीर चक्र सम्मानित भारतीय सैनिक।
25 जून को हुए निधन (Died on 25 June)
1950: स्वामी सहजानंद सरस्वती – भारत के राष्ट्रवादी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और देश में किसान आंदोलन के जनक। स्वामी सहजानंद सरस्वती का निधन मुजफ्फरपुर (बिहार) में हुआ था। उन्होंने ‘ऑल इंडिया किसान सभा’ (All India Kisan Sabha) की स्थापना की थी। वे एक प्रखर लेखक और बुद्धिजीवी थे, जिन्होंने जमींदारी प्रथा के खिलाफ और किसानों के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
1984: मिशेल फूको– प्रसिद्ध फ्रांसीसी दार्शनिक। 20वीं सदी के सबसे प्रभावशाली फ्रांसीसी दार्शनिक, इतिहासकार और सामाजिक सिद्धांतकार मिशेल फूको (Michel Foucault) का निधन 25 जून 1984 को पेरिस में हुआ था। उनके विचारों ने दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र और साहित्य की आलोचनात्मक समझ (Critical Theory) को पूरी तरह बदल कर रख दिया था।
2003: आर. पाल कृष्णन – सिंगापुर के शीर्ष वकील और भारतीय समुदाय के प्रमुख सदस्य।
2009: माइकल जैक्सनन – म्यूजिक और डांस की नई परिभाषा लिखने वाले पॉप के बादशाह। माइकल जैक्सन (Michael Jackson) का 25 जून 2009 को लॉस एंजिल्स (अमेरिका) में 50 वर्ष की आयु में अचानक निधन हो गया था। यह संगीत और वैश्विक पॉप संस्कृति के इतिहास का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला निधन माना जाता है। उनकी मृत्यु तीव्र प्रोपोफोल (Propofol) और बेंजोडायजेपाइन के ओवरडोज के कारण दिल का दौरा पड़ने से हुई थी, जिसे बाद में अदालत ने ‘हत्या’ (Homicide) करार दिया था और उनके निजी डॉक्टर को सजा हुई थी। उनकी मृत्यु की खबर से उस समय इंटरनेट का ट्रैफिक क्रैश हो गया था।
2009: शिव चरण माथुर– राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ राजनेता शिव चरण माथुर का निधन 25 जून 2009 को हुआ था। वे दो बार (1981–1985 और 1988–1989) राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे। अपने अंतिम दिनों में वे असम के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दे रहे थे।
25 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 25 June)
अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस: अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) द्वारा हर वर्ष 25 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय नाविक दिवस’ (Day of the Seafarer) के रूप में मनाया जाता है। इसका उदेश्य वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था में नाविकों (Seafarers) के अद्वितीय योगदान को मान्यता देना और उनके बलिदान के प्रति सम्मान प्रकट करना है। इसकी घोषणा वर्ष 2010 में फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित IMO के एक राजनयिक सम्मेलन में की गई थी। विश्व के कुल व्यापार का लगभग 80% से अधिक हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से होता है। नाविक ही वे गुमनाम नायक हैं जो समुद्र की विपरीत परिस्थितियों में काम करके ईंधन, खाद्यान्न, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक वस्तुएं दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाते हैं।
विश्व रेत के टीला दिवस: विश्व रेत के टीला दिवस (World Sand Dune Day) हर साल जून के अंतिम शनिवार (2026 में 27 जून) को मनाया जाता है। 25 जून 2021 को इतिहास में पहली बार आधिकारिक तौर पर विश्व रेत के टीला दिवस मनाया गया। इसकी शुरुआत इंग्लैंड और वेल्स के ‘सैंड्स ऑफ लाइफ’ संरक्षण प्रोजेक्ट्स द्वारा की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य तटीय और रेगिस्तानी रेत के टीलों के पारिस्थितिकी तंत्र के महत्व, जैव विविधता के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ उनकी प्राकृतिक सुरक्षा भूमिका के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। इस दिवस की शुरुआत ‘डायनामिक ड्यूनस्केप्स’ (Dynamic Dunescapes) और ‘सैंड्स ऑफ लाइफ’ (Sands of LIFE) जैसे प्रमुख संरक्षण प्रोजेक्ट्स द्वारा की गई थी। इसका लक्ष्य लोगों को यह समझाना है कि रेत के टीले केवल घूमने की जगह नहीं हैं, बल्कि ये तूफान और बाढ़ से तटों की रक्षा करते हैं।
विश्व विटिलिगो दिवस: त्वचा की एक विशेष स्थिति ‘विटिलिगो’ (Vitiligo – जिसे आम भाषा में सफेद दाग या ल्यूकोडर्मा कहा जाता है) के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाने के लिए विश्व विटिलिगो दिवस (World Vitiligo Day) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने की शुरुआत विशेष रूप से 25 जून को इसलिए चुनी गई क्योंकि इसी दिन (25 जून 2009) संगीत जगत के दिग्गज माइकल जैक्सन का निधन हुआ था, जो खुद सार्वजनिक रूप से इस बीमारी (विटिलिगो) के साथ जी रहे थे। इसका उद्देश्य मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य का समर्थन करना और समाज में फैले पूर्वाग्रहों को दूर करना है। इस अभियान की शुरुआत पहली बार 2011 में VR Foundation और VITSAF द्वारा की गई थी।
मोजाम्बिक स्वतंत्रता दिवस: दक्षिण-पूर्वी अफ्रीकी देश मोजाम्बिक में अपना राष्ट्रीय स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) मनाया जाता है। 25 जून 1975 में उन्हें लगभग 470 वर्षों के पुर्तगाली औपनिवेशिक शासन से आजादी मिली थी।
क्रोएशिया राष्ट्रीय दिवस: यूरोपीय देश क्रोएशिया में 25 जून को उनकी संसद द्वारा 1991 में यूगोस्लाविया से अलग होने के ऐतिहासिक फैसले की याद में राज्यत्व दिवस (Statehood Day) के रूप में मनाया जाता है।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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Posted By: Himachal News
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