27 June in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 27 जून वर्ष का 178वां (लीप वर्ष में यह 179वां) दिन है। साल में अभी 187 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 27 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 27 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
27 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 27 June in History)
1967: लंदन में हुई थी दुनिया के पहले ATM की शुरुआत, बैंक की लाइन में खड़े रहने से परेशान शख्स ने बनाई थी ये मशीन
बैंकनोट बनाने वाली एक कंपनी में काम करने वाले जॉन शेफर्ड बैरन को एक चीज बहुत परेशान कर रही थी। दरअसल होता ये कि बैरन जब शनिवार को बैंक में अपने चेक से पैसे निकालने जाते, तो उन्हें बहुत लंबी लाइन में खड़ा होना पड़ता और कई बार तो वो पैसे निकाल ही नहीं पाते।
इसी तरह एक शनिवार को वे बैंक गए लेकिन पैसे नहीं निकाल पाए। उसी शाम नहाते हुए उन्हें आइडिया आया कि जिस तरह चॉकलेट वेंडिंग मशीन में पैसे डालते ही चॉकलेट बाहर आ जाती है उसी तरह एक ऐसी मशीन बनाई जाए जिसमें से पैसे निकल सकें। बस फिर क्या था बैरन अपने काम पर लग गए।
उन्होंने चॉकलेट वेंडिंग मशीन की तरह ही मशीन बनाई जिसमें 6 अंकों का एक पिन एंटर करना होता था। दरअसल बैरन आर्मी में रहे थे और उन्होंने अपनी आर्मी के रजिस्ट्रेशन नंबर को ही पिन बनाया था, लेकिन उनकी पत्नी ने कहा कि वो 6 अंकों का पिन याद नहीं रख सकतीं इसलिए बाद में पिन को बदलकर 4 अंकों का किया गया।
हालांकि अभी की तरह उस मशीन में कार्ड का इस्तेमाल नहीं होता था। मशीन में चेक से पैसे निकाले जाते थे। इन चेक पर एक रेडियोएक्टिव पदार्थ लगा होता था जिसे मशीन पढ़ लेती थी। चेक लगाने के बाद पिन एंटर करना होता था।
उन्होंने इस तरह की 6 मशीनें बनाईं और इन्हें अलग-अलग जगहों पर लगाया गया। सबसे पहली मशीन लंदन के इनफील्ड में बार्कलेज बैंक में 27 जून 1967 को लगाई गई। इस मशीन से सबसे पहले ब्रिटिश कॉमेडी एक्टर रेग वार्ने ने पैसे निकाले। इस मशीन से एक बार में अधिकतम 10 पाउंड (आज के हिसाब से करीब 1 हजार रुपए और 1967 के हिसाब से करीब 180 रुपए) ही निकलते थे। इन 6 मशीनों के बाद बैरन ने इस तरह की 50 मशीनें और बनाईं। इन्हें लंदन में ही अलग-अलग जगहों पर लगाया गया। धीरे-धीरे इनका चलन बढ़ने लगा और लोग टाइम की बचत की वजह से इनका इस्तेमाल ज्यादा करने लगे।
हालांकि 60 के दशक में इस तरह की मशीन बनाने में दुनियाभर के लोग जुटे हुए थे। साल 1966 में जेम्स गुडफैलो ने ATM टेक्नोलॉजी के लिए पहला पेटेंट करवाया था। इसमें चेक की जगह प्लास्टिक कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था, जो आज तक प्रचलित है। साथ ही बैरन ने इस पूरी टेक्नोलॉजी का पेटेंट नहीं करवाया था। उनका मानना था कि अगर वो पेटेंट करवाएंगे तो इस टेक्नोलॉजी का हैकर गलत फायदा उठा सकते हैं। इसी वजह से ATM का आविष्कारक कौन है इस बात को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते हैं।
साल 1977 में सिटी बैंक ने न्यूयॉर्क में ATM लगाने के लिए 100 मिलियन डॉलर खर्च किए। सिटी बैंक को भारत में भी ATM को बढ़ावा देने का श्रेय जाता है। 1984 तक दुनियाभर में 1 लाख से भी ज्यादा ATM हो गए। एक अनुमान के मुताबिक फिलहाल पूरी दुनिया में 35 लाख से भी ज्यादा ATM हैं।
1957: ‘धूम्रपान से कैंसर होता है’ इसकी पुष्टि हुई थी
फिल्म देखते हुए, सिगरेट के डिब्बों पर और दीवारों पर आपने “धूम्रपान से कैंसर होता है” ये लिखा देखा ही होगा। साल 1957 में आज ही के दिन इसकी वैज्ञानिक पुष्टि हुई थी। दरअसल 1957 के पहले अलग-अलग देशों में फेफड़ों के कैंसर और धूम्रपान के बीच संबंध पता करने के लिए कई रिसर्च की जा रही थी। इसी कड़ी में अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, नेशनल हार्ट इंस्टीट्यूट, अमेरिकन कैंसर सोसायटी और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने एक स्टडी की।
इस स्टडी में 1952 से 1955 तक अमेरिका के 1 करोड़ 87 लाख 783 पुरुषों को शामिल किया गया। 44 महीनों की स्टडी के दौरान इनमें से 11 हजार 783 लोगों की मौत हो गई। इन सभी मौतों की जांच-पड़ताल के बाद आज ही के दिन ये स्टडी पब्लिश हुई। स्टडी में खुलासा हुआ कि इन लोगों की मौत की एक बड़ी वजह धूम्रपान भी है। साथ ही ये भी पता लगा कि धूम्रपान करने वालों में लंग कैंसर होने की संभावना 5 से 15 गुना ज्यादा होती है।
1920 के बाद से ही लंग कैंसर से ही रही मौतें बढ़ने लगी थीं। लोग मान रहे थे कि इन बढ़ी मौतों के पीछे प्रदूषण और विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए हथियारों का केमिकल है। 1929 में फ्रित्ज लिकिंट ने पहली बार तंबाकू और लंग कैंसर के बीच संबंध पता करने के लिए स्टडी की थी।
इसके बाद साल 1939 में जर्मनी के हर्मन मुलर ने भी एक स्टडी की। उन्होंने लंग कैंसर के 86 मरीजों पर स्टडी की और ये बताया कि धूम्रपान करने वालों को लंग कैंसर होने का खतरा ज्यादा है।
इस रिपोर्ट के पब्लिश होने के बाद लोग दो धड़ों में बंट गए। कई लोग हेल्थ को ध्यान में रखते हुए तंबाकू उत्पादों पर बैन करने की मांग करने लगे, वहीं दूसरी ओर कई लोगों ने इस रिपोर्ट को मानने से ही इनकार कर दिया। दरअसल उस समय पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा तंबाकू की पैदावार और निर्यात अमेरिका ही करता था। इस वजह से अमेरिका की अर्थव्यवस्था में तंबाकू और तंबाकू प्रोडक्ट का खासा योगदान था। अमेरिका के आधे से ज्यादा पुरुष सिगरेट पीते थे और लाखों लोगों को इससे रोजगार भी मिलता था। तंबाकू प्रोडक्ट से होने वाले नुकसान को देखते हुए कई देशों ने अलग-अलग प्रतिबंध भी लगाए हैं।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 27 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1693: महिलाओं की पहली पत्रिका ‘लेडीज मर्किरी’ (Ladies’ Mercury) लंदन में प्रकाशित हुई।
1846: न्यूयॉर्क और बोस्टन को टेलीग्राफ लाइन से जोड़ा गया।
1871: येन को आधिकारिक तौर पर जापान की मुद्रा स्वीकार किया गया।
1903: 19 वर्षीय अमेरिकन आईडा डी अकोस्ता पावर विमान उड़ाने वाली पहली महिला बनी।
1954: इतिहास की पहली ‘परमाणु ऊर्जा ग्रिड’ से बिजली आपूर्ति शुरू। सोवियत (अब रूस) के मॉस्को के पास स्थित ओबनिंस्क (Obninsk) परमाणु ऊर्जा संयंत्र को दुनिया के पहले नागरिक परमाणु बिजली ग्रिड से जोड़ा गया था। यह दुनिया का पहला ऐसा न्यूक्लियर पावर प्लांट था, जिसने व्यावसायिक रूप से आम जनता और उद्योगों के उपयोग के लिए बिजली का उत्पादन शुरू किया। इसकी क्षमता लगभग 5 मेगावाट थी।
1964: भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के आवास तीन मूर्ति भवन को नेहरू मेमोरियल म्यूजियम में बदल दिया गया।
1980: इतालवी विमान के तेरीहिंस सागर में दुर्घटनाग्रस्त होने से 81 लोगों की मौत।
1981: कंबोडिया ने अपना संविधान अपनाया।
2008: माइक्रोसॉफ्ट कारपोरेशन के चेयरमैन बिल गेट्स ने अपने पद से इस्तीफा दिया।
2015: भारत के फ़िल्म इतिहास में अपना एक ख़ास मुकाम रखने वाले सत्यजित राय की तस्वीर को संयुक्त राष्ट्र ने अपने मुख्यालय में प्रदर्शित करने का फैसला किया।
2022: अमेरिका के टेक्सास में सैन एंटोनियो में अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश कराने के लिए 53 प्रवासियों को एक बिना एसी वाले बंद ट्रैक्टर-ट्रेलर (ट्रक) में ठूंस दिया गया था। इस अमानवीय कृत्य के कारण दम घुटने और भीषण गर्मी (लू) से 53 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। इनमें 40 पुरुष और 13 महिलाएँ थीं, जिनमें मेक्सिको, होंडुरास, ग्वाटेमाला और अल सल्वाडोर के नागरिक शामिल थे। इस दर्दनाक हादसे में 6 बच्चे और एक गर्भवती महिला भी शामिल थी।
2024: पहली ऐतिहासिक अमेरिकी राष्ट्रपति डिबेट– सीएनएन (CNN) के अटलांटा स्टूडियो में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडन और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच 2024 चुनाव की पहली लाइव प्रेसिडेंशियल डिबेट हुई। इस डिबेट में जो बाइडन के कमजोर और लड़खड़ाते प्रदर्शन के बाद उनकी अपनी ही डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर उनके स्वास्थ्य को लेकर भारी चिंताएं शुरू हो गईं। इसी डिबेट की पृष्ठभूमि के कारण आगे चलकर जो बाइडन को राष्ट्रपति पद की रेस से हटना पड़ा और कमला हैरिस उम्मीदवार बनीं।
27 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 27 June)
1838: बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय – महान उपन्यासकार और ‘वन्दे मातरम्’ के रचयिता। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का जन्म 27 जून 1838 को नैहाटी (वर्तमान उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल) में हुआ था। उनका उपन्यास ‘आनंदमठ’ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक बड़ा वैचारिक स्तंभ बना। वे ब्रिटिश काल में प्रेसीडेंसी कॉलेज (कोलकाता) से कला स्नातक (BA) करने वाले शुरुआती भारतीयों में से एक थे और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के रूप में भी सेवा दी थी।
1939: राहुल देव बर्मन – आर. डी. बर्मन– दिग्गज संगीतकार। भारतीय सिनेमा संगीत की दिशा बदलने वाले महान संगीतकार और गायक राहुल देव बर्मन (आर. डी. बर्मन) का जन्म 27 जून 1939 को कलकत्ता (अब कोलकाता) में हुआ था। उन्हें प्यार से ‘पंचम दा’ कहा जाता था। उन्होंने मशहूर संगीतकार एस. डी. बर्मन के घर जन्म लिया और 1960 से 1990 के दशक तक ‘शोले’, ‘यादों की बारात’, और ‘अमर प्रेम’ जैसी सैकड़ों फिल्मों में वेस्टर्न रॉक, जैज़ और भारतीय शास्त्रीय संगीत का अद्भुत फ्यूजन पेश कर संगीत जगत में क्रांति ला दी थी। उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया है।
1955: पूर्णिमा वर्मन – पद्मभूषण से सम्मानित भारतीय पत्रकार।
1964: पी. टी. उषा – उड़नपरी के नाम से दुनियाभर में पहचान बनाने वाली भारतीय खिलाड़ी। भारतीय खेल जगत की सबसे महान महिला धावकों में शुमार पिलगाउलाकंदी थेक्केपारम्बिल उषा (पी. टी. उषा) का जन्म 27 जून 1964 को केरल के कोझिकोड जिले के पय्योली गांव में हुआ था। वे 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में 400 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल में महज 1/100 सेकंड (0.01 सेकंड) से कांस्य पदक से चूक गई थीं, जो भारतीय एथलेटिक्स इतिहास का एक ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने एशियाई खेलों में 4 स्वर्ण और 7 रजत पदक जीते हैं। वर्तमान में वे भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) की अध्यक्ष हैं।
27 जून को हुए निधन (Died on 27 June)
1839: महाराजा रणजीत सिंह– सिक्ख साम्राज्य के सर्वाधिक प्रसिद्ध राजा थे। वे “शेर-ए पंजाब” के नाम से प्रसिद्ध हैं। महाराजा रणजीत सिंह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने न केवल पंजाब को एक सशक्त सूबे के रूप में एकजुट रखा, बल्कि अपने जीवित रहते हुए अंग्रेज़ों को अपने साम्राज्य के पास भी नहीं फटकने दिया।
2008: सैम मानेकशॉ – भारत के पहले फील्ड मार्शल। सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ का निधन 27 जून 2008 की मध्यरात्रि (रात 12:30 बजे) को वेलिंगटन (तमिलनाडु) के सैन्य अस्पताल में हुआ था। उनके रणनीतिक नेतृत्व में ही भारत ने 1971 के युद्ध में मात्र 13 दिनों में पाकिस्तान को आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का जन्म हुआ। उन्हें ‘सैम बहादुर’ के नाम से जाना जाता था।
27 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 27 June)
अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस
संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा हर साल 27 जून को वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम दिवस (International MSME Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विकासशील और विकसित देशों की अर्थव्यवस्था में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (MSMEs) के अतुलनीय योगदान को रेखांकित करना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 6 अप्रैल 2017 को अपने 74वें पूर्ण सत्र में एक प्रस्ताव पारित कर हर साल 27 जून को इस दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। दुनिया भर के कुल उद्यमों में लगभग 90% हिस्सेदारी MSME क्षेत्र की है, जो रोजगार और वैश्विक आर्थिक विकास की मुख्य रीढ़ माने जाते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बधिर-दृष्टिहीनता दिवस
अंतर्राष्ट्रीय बधिर-दृष्टिहीनता दिवस (International Day of Deafblindness) प्रत्येक वर्ष 27 जून को मनाया जाता है। यह दिन प्रसिद्ध लेखिका और मानवाधिकार कार्यकर्ता हेलन केलर की जयंती (27 जून 1880) की याद में समर्पित है, जिन्होंने स्वयं मूक-बधिर होने के बावजूद अपनी इच्छाशक्ति से पूरी दुनिया में विकलांगता अधिकारों और समावेशन की एक नई क्रांति शुरू की थी। यह विशेष दिवस उन लोगों के अधिकारों और समाज में उनकी समान सहभागिता की वकालत करने के लिए मनाया जाता है, जो सुनने और देखने दोनों की असमर्थता से जूझ रहे हैं।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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