12 जून: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 12 जून वर्ष का 163वां (लीप वर्ष में यह 164वां) दिन है। साल में अभी 202 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 12 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 12 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
12 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 12 June in History)
1975: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द किया था इंदिरा गांधी का चुनाव, इसी फैसले से पड़ी थी इमरजेंसी की नींव
तारीख 12 जून 1975… समय सुबह के करीब 10 बजे …जगह इलाहाबाद हाईकोर्ट…आज हाईकोर्ट परिसर में पैर रखने की जगह नहीं थी। कोर्ट रूम नंबर 24 में जाने के लिए तो बाकायदा पास जारी किए गए थे। जस्टिस जगमोहन लाल सिन्हा अपने चैंबर से कोर्ट रूम में आए। रूम में मौजूद सभी लोग अपनी-अपनी जगह पर खड़े हो गए। जस्टिस सिन्हा अपनी कुर्सी पर जाकर बैठे और फैसला सुनाने लगे।
फैसले में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को चुनाव में धांधली करने का दोषी पाते हुए उनका चुनाव रद्द कर दिया। साथ ही ये भी कहा कि आने वाले 6 साल तक वे चुनाव नहीं लड़ सकेंगी। इस फैसले से देश की राजनीति में भूचाल आ गया।
इंदिरा गांधी उस वक्त देश की प्रधानमंत्री थीं और किसी भी हालत में सत्ता छोड़ने को तैयार नहीं थीं। इस फैसले के खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट भी गईं, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। आखिरकार इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगा दी।
इस पूरे मामले की शुरुआत होती है साल 1971 से। देश में लोकसभा चुनाव हुए और कांग्रेस को जबरदस्त जीत मिली। कुल 518 में से कांग्रेस ने 352 सीटें जीतीं और प्रधानमंत्री बनीं इंदिरा गांधी। उन्होंने अपनी पारंपरिक सीट उत्तर प्रदेश के रायबरेली से जीत दर्ज की।
इंदिरा ने एक लाख से भी ज्यादा वोट से संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के राजनारायण को हराया। राजनारायण अपनी जीत को लेकर इतना आश्वस्त थे कि उन्होंने चुनावी नतीजों से पहले ही विजय जुलूस निकाल दिया था। इधर इंदिरा चुनाव जीतकर संसद चली गईं, उधर राजनारायण चुनाव हारकर कोर्ट चले गए।
उन्होंने कोर्ट को एक सूची सौंपी जिसमें इंदिरा गांधी पर भ्रष्टाचार, चुनावों में धांधली और सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने जैसे अलग-अलग आरोप थे। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने कोर्ट से मांग की कि इंदिरा का चुनाव रद्द किया जाए।
मामले की सुनवाई जस्टिस सिन्हा कर रहे थे। उन्होंने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और अब बारी प्रधानमंत्री के बयान की थी। मार्च में जस्टिस सिन्हा ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को कोर्ट में पेश होने का हुक्म सुनाया। यह इतिहास में पहला मौका था जब देश का प्रधानमंत्री कोर्ट में पेश होने जा रहा था। 18 मार्च 1975 को इंदिरा गांधी बयान देने कोर्ट पहुंचीं। करीब 5 घंटे तक उनसे जिरह चली।
सुनवाई और बयान पूरे होने के बाद आज ही के दिन कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए इंदिरा के चुनाव को रद्द कर दिया और 6 साल तक उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लगा दी। कांग्रेस को जरा सा भी अंदेशा नहीं था कि कोर्ट इस तरह का फैसला सुना सकता है।
बैठकों और मंत्रणाओं के बाद तय किया गया कि हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। 11 दिन बाद 23 जून 1975 को इंदिरा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए फैसले पर रोक लगाने की मांग की।
अगले ही दिन जस्टिस वीआर कृष्णा अय्यर ने इंदिरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि वे हाईकोर्ट के फैसले पर पूरी तरह रोक नहीं लगाएंगे, लेकिन इंदिरा प्रधानमंत्री बनीं रह सकती हैं। साथ ही ये भी कहा कि इस दौरान वे संसद की कार्यवाही में भाग तो ले सकती हैं, लेकिन वोट नहीं कर सकेंगी।
एक तरफ कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से भी कोई राहत नहीं मिली, दूसरी तरफ विपक्ष लगातार इंदिरा से इस्तीफे की मांग कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के अगले ही दिन विपक्षी नेताओं ने 25 जून को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली का आयोजन किया। रैली में भारी भीड़ जुटी जिसे संबोधित करते हुए जयप्रकाश नारायण ने रामधारी सिंह दिनकर की एक कविता का हिस्सा पढ़ा और नारा दिया – ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’।
इधर जेपी की रैली खत्म हुई और उधर इंदिरा राष्ट्रपति भवन पहुंचीं। रात होते-होते इमरजेंसी का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका था। जेपी समेत तमाम बड़े नेता गिरफ्तार कर लिए गए। सुबह 8 बजे इंदिरा ने रेडियो पर इमरजेंसी का ऐलान कर दिया। इसी के साथ देश 21 महीने के अपने सबसे बुरे दौर में चला गया।
1964: मंडेला को हुई थी आजीवन कारावास की सजा
आज ही के दिन 1964 में दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। उन्हें अगस्त 1962 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि वे गैरकानूनी तरीके से देश से बाहर जाकर देश में तख्तापलट की साजिश रच रहे हैं। अगले 27 साल तक मंडेला जेल में रहे। जेल में रहने के दौरान ही मंडेला दुनियाभर में लोकप्रिय हो गए और पूरे अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले सबसे बड़े नेता बन गए। 1990 में उनकी रिहाई हुई और 1994 में वह दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बने। लोग उन्हें प्यार से मदीबा बुलाते थे। उन्हें लोग अफ्रीका का गांधी भी कहते हैं। 5 दिसंबर 2013 को उनका निधन हो गया।
साभार: साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 12 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1665: न्यू एम्स्टर्डम कानूनी तौर पर ब्रिटेन का हिस्सा बना और योर्क के ड्यूक के नाम पर इसका नाम न्यूयॉर्क रखा गया।
1691: पोप अलेक्जेंडर (आठवें) के जगह इन्नोसेंट (बारहवें) पोप बने।
1817: जर्मन आविष्कारक कार्ल ड्रैस मैनेंहिम में अपना बांका घोड़ा (“ड्रेसीन” या लॉफमास्काइन), साइकिल का सबसे प्रारंभिक रूप चलाया।
1849: गैस मास्क के लिए लुई हैस्लेटो को पेटेंट मिला।
1897: असम में भूकंप से करीब 1500 लोगों की मौत हुई।
1889: ऍर्मघ रेल आपदा आयरलैंड में 88 लोग मारे गए।
1987: ब्रिटिश चुनावों में मार्गरेट थैचर की तीसरी बार ऐतिहासिक विजय।
1990: रूस ने खुद को संप्रभु राष्ट्र घोषित किया। 1992 से हर साल 12 जून को रूस दिवस मनाया जाता है।
1990: इंडियन नेशनल सैटेलाइट (INSAT-1D) को लॉन्च किया गया।
1994: बोइंग-777 ने अपनी पहली उड़ान भरी। उस समय इस विमान में दुनिया का सबसे बड़ा ट्विन जेट इंजन लगाया गया था।
1998: भारत और पाकिस्तान को परमाणु परीक्षण के कारण जी-8 के देशों द्वारा ऋण नहीं देने का निर्णय लिया।
2013: भारत में 163 साल से चली आ रही टेलीग्राम सेवा को बंद करने की घोषणा की गई। 15 जुलाई 2013 के दिन देश में आखिरी टेलीग्राम भेजा गया।
2024: तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
2024: कुवैत के मंगाफ शहर में एक 6 मंजिला इमारत (लेबर कैंप) में भीषण आग लगने से 49 विदेशी श्रमिकों की मौत हो गई थी, जिनमें से 40 भारतीय नागरिक (मुख्य रूप से केरल और तमिलनाडु के निवासी) थे।
2024: चमोली जिले के ऐतिहासिक शहर ‘जोशीमठ’ का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर प्राचीन नाम ‘ज्योतिर्मठ’ कर दिया गया।
2025: अहमदाबाद विमान दुर्घटना- एयर इंडिया के बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान टेकऑफ करने के महज 32 सेकंड बाद ही अनियंत्रित होकर पास के ‘बायरामजी जीजीभॉय मेडिकल कॉलेज’ के छात्र हॉस्टल पर जा गिरा। हादसे में विमान में सवार 242 लोगों (यात्री और क्रू) में से केवल एक यात्री ही जीवित बच सका।
2025: संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई कि भारत की जनसंख्या बढ़कर 146.39 करोड़ (1.4639 बिलियन) हो गई है, जिससे वह दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बना हुआ है।
12 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 12 June)
1932: ई. श्रीधरन – भारत के प्रसिद्ध सिविल इंजीनियर हैं। कोंकण रेलवे और दिल्ली में मेट्रो रेल का श्रेय इन्हीं को जाता है। वे 1995 से 2012 तक दिल्ली मेट्रो के निदेशक रहे। उन्हें “भारत के मेट्रो मैन” के रूप में भी जाना जाता है। भारत सरकार ने उन्हें 2001 में ‘पद्म श्री’ तथा 2008 में ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया है।
1935: श्यामा – भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री।
12 जून को हुए निधन (Died on 12 June)
1972: डी.जी तेंदुलकर – प्रसिद्ध लेखक, जिन्होंने महात्मा गांधी के जीवन पर 8 खंडों का विशाल ग्रंथ लिखा था।
1976: गोपीनाथ कविराज – भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म विभूषण’ की उपाधि से सम्मानित संस्कृत के विद्वान् और महान् दार्शनिक।
1999: जलगम वेन्गला राव – आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वह 10 दिसंबर 1973 से 6 मार्च 1978 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।
2000: पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे – लेखक, नाटककार, हास्यकार, अभिनेता, कथाकार व पटकथाकार, फिल्म निर्देशक, संगीतकार एवं गायक। पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे ऐसे शख्स थे जिन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का इंटरव्यू लिया था। देशपांडे को सन् 1990 में कला के क्षेत्र में ‘पद्म भूषण’ से सम्मानित किया गया था।
2017: सी. नारायण रेड्डी – ‘पद्म श्री’, 1992 में ‘पद्म भूषण’ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात कवि।
12 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 12 June)
विश्व बालश्रम निषेध दिवस (World Day Against Child Labor)
साल 1973 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ ने 138वें सम्मेलन में न्यूनतम आयु पर लोगों का ध्यान केंद्रित किया, जिसका मकसद सदस्य देशों को रोजगार की न्यूनतम आयु बढ़ाने और बाल मजदूरी को समाप्त करना था। इसके 29 साल बाद साल 2002 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ (ILO) ने बाल श्रम रोकने का मुद्दा विश्व पटल पर रखा। साल 2002 में सभी देशों की सर्वसम्मति से एक कानून पारित हुआ, जिसके तहत 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों से मजदूरी करवाना अपराध घोषित किया गया। इसके बाद से निरंतर 12 जून को यह दिवस विशेष मनाया जा रहा है। वर्तमान में इस श्रम संघ के लगभग 187 सदस्य देश शामिल हैं।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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