13 June 2026 Ka Panchang: ज्योतिष शास्त्र में पंचांग का विशेष महत्व है। दैनिक पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति को जानकर अपने दिन की योजना बेहतर ढंग से बना सकते हैं। यदि आप आज यानी 13 जून 2026 को कोई मांगलिक कार्य, निवेश या यात्रा करने का विचार कर रहे हैं, तो शुभ समय और राहुकाल का विवरण नीचे दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार, सही समय पर किया गया कार्य सफलता की संभावनाओं को बढ़ा देता है।
13 june 2026 Ka Panchang: ज्योतिषीय गणना, ग्रह और नक्षत्र
शक सम्वत: 1948 (पराभव संवत्सर)
विक्रम सम्वत: 2083 (सिद्धार्थि)
तिथि: ज्येष्ठ (अधिकमास) माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि (सुबह 06:17 बजे तक, तत्पश्चात चतुर्दशी तिथि प्रारंभ)
नक्षत्र: भरणी (सुबह 04:36 बजे तक, तत्पश्चात कृत्तिका नक्षत्र प्रारंभ)
योग: सुकर्मा (रात 09:34 बजे तक, तत्पश्चात धृति योग प्रारंभ)
करण: वणिज (सुबह 06:17 बजे तक), फिर विष्टि/भद्रा (शाम 05:32 बजे तक), तदुपरान्त शकुनि करण प्रारंभ।
दिन: शनिवार
प्रविष्टे: 30 ज्येष्ठ
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: प्रातः 05:23 बजे
सूर्यास्त: सायं 07:18 बजे
चन्द्रोदय: रात 03:34 बजे (14 जून की तड़के)
चन्द्रास्त: सायं 05:18 बजे
चन्द्र राशि: चंद्रमा दोपहर 10:14 बजे तक मेष राशि में संचार करेंगे, इसके बाद वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे।
सूर्य राशि: सूर्य वृष राशि में विराजमान हैं।
आज के मुख्य शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 03:49 से 04:36 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 से 12:46 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:40 से 03:35 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:18 से 07:40 बजे तक।
अमृत काल: रात 11:45 से 01:14 बजे तक (14 जून की तड़के)।
राहुकाल और अशुभ समय (Ashubh Samay)
राहुकाल: सुबह 08:52 से 10:36 बजे तक (इस समय शुभ व मांगलिक कार्य वर्जित हैं)।
यम गण्ड: दोपहर 02:05 से 03:49 बजे तक।
दुर्मुहूर्त: सुबह 05:23 से 06:18 बजे तक, तथा इसके बाद सुबह 06:18 से 07:13 बजे तक।
भद्रा: सुबह 06:17 से शाम 05:32 बजे तक (भद्रा काल में शुभ कार्य टालने चाहिए)।
आज के प्रमुख व्रत और पर्व
आज ज्येष्ठ मास (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि सुबह 06:17 बजे तक है और इसके बाद चतुर्दशी तिथि लग जाएगी। आज मासिक शिवरात्रि का पावन व्रत व संयोग बन रहा है। चूंकि आज शनिवार का दिन है और सुबह के समय त्रयोदशी का प्रभाव रहेगा, इसलिए आज शनि प्रदोष व्रत का पारण व शिवरात्रि की पूजा का उत्तम विधान है। भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के साथ-साथ आज का दिन शनि देव की शांति के लिए भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। आज सुबह से सूर्य पुत्र और अग्नि के स्वामित्व वाले ‘कृत्तिका’ नक्षत्र का प्रभाव रहेगा, जो तेज, शुद्धि और प्रशासनिक कार्यों के लिए विशेष फलदायी है।
आज का विशेष उपाय (Special Remedy)
चूंकि आज शनिवार का दिन है (जो कर्मफल दाता शनि देव को समर्पित है) और साथ ही मासिक शिवरात्रि का पावन योग है, अतः जीवन में कष्टों, बाधाओं और साढ़ेसाती के कुप्रभावों से मुक्ति के लिए आज ये विशेष उपाय करें:
शनि देव को सरसों का तेल व काले तिल: आज शाम के समय किसी पीपल के पेड़ के नीचे या शनि मंदिर में जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं। तेल में थोड़े से काले तिल और लोहे की कील डालकर ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।
शिव लिंग पर काले तिल मिला हुआ जल: मासिक शिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का जलाभिषेक करें। जल के लोटे में थोड़े से काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। इससे शनि जनित दोषों और मानसिक तनाव से तुरंत राहत मिलती है।
काली वस्तुओं का दान: कुंडली में शनि ग्रह को मजबूत करने और दरिद्रता दूर करने के लिए आज किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले चने, काली उड़द की दाल, काला कपड़ा या छाते का दान करें।
सावधानी: आज शनिवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहता है। यदि पूर्व दिशा की यात्रा अत्यंत आवश्यक हो, तो आज सुबह घर से निकलने से पहले थोड़ा सा अदरक या घी खाकर ही प्रस्थान करें।
अस्वीकरण (Disclaimer): यहां दी गई जानकारी सामान्य, धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। किसी भी विशिष्ट अनुष्ठान के लिए स्थानीय विद्वान पंडित से परामर्श लें। हिमाचल न्यूज़ इसकी पुष्टि नहीं करता है।
प्रस्तुति: हिमाचल न्यूज़
हरि ॐ
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