20 June in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 20 जून वर्ष का 171वां (लीप वर्ष में यह 172वां) दिन है। साल में अभी 194 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 20 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 20 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
20 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 20 June in History)
आज ही शुरू हुआ था मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रेलवे स्टेशन, पहले यह इंग्लैंड की पूर्व महारानी के नाम से जाना जाता था
भारत का बेहद खूबसूरत और व्यस्त रेलवे स्टेशन मुंबई का छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST) आज 139 साल का हो गया है। कहा जाता है कि भारत में ताजमहल के बाद सबसे ज्यादा फोटो इसी इमारत की खींची जाती हैं। मुंबई के फोर्ट एरिया में स्थित इस रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब 30 लाख से भी ज्यादा यात्री यात्रा करते हैं। टर्मिनस के 18 प्लेटफॉर्म पर रोजाना 1200 से भी ज्यादा ट्रेनें आती-जाती हैं।
1887 में आज ही के दिन स्टेशन का काम पूरा हुआ था और इसे रेल यातायात के लिए शुरू किया गया। ब्रिटेन की महारानी के नाम पर स्टेशन का नाम विक्टोरिया टर्मिनस रखा गया लेकिन साल 1996 में तत्कालीन रेलमंत्री सुरेश कलमाड़ी ने स्टेशन का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस कर दिया। 2 जुलाई 2004 को इस स्टेशन को यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया।
फिलहाल स्टेशन पर 18 प्लेटफॉर्म हैं जिनमें से 7 लोकल ट्रेन के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। 2008 में हुए मुंबई आतंकी हमले में आतंकियों ने इस स्टेशन को भी निशाना बनाया था। यहां फायरिंग में 50 से भी ज्यादा लोग मारे गए थे।
1840: सैमुएल मोर्स को मिला था टेलीग्राफ का पेटेंट
पहले जब मोबाइल और टेलीफोन नहीं थे तो लोग एक-दूसरे को खत लिखा करते थे। खत के साथ परेशानी ये थी कि इन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में ज्यादा टाइम लगता था, लेकिन जब सैमुएल मोर्स ने टेलीग्राफ बनाया तो एक जगह से दूसरी जगह तुरंत मैसेज जाने लगे। आज ही के दिन सैमुएल मोर्स को टेलीग्राफ के लिए पेटेंट मिला था।
कहा जाता है कि मोर्स को टेलीग्राफ बनाने का आइडिया एक जहाज में यात्रा करने के दौरान आया था। साल 1832 में मोर्स यूरोप से अपनी पढ़ाई पूरी कर जहाज से अमेरिका लौट रहे थे, तभी उनका ध्यान जहाज में सवार यात्रियों की बातों पर गया।
जहाज के यात्री हाल ही में फैराडे द्वारा इलेक्ट्रोमैग्नेट की खोज पर बात कर रहे थे। जब मोर्स ने इलेक्ट्रोमैग्नेट के बारे में पढ़ा तो उन्होंने सोचा कि इसका इस्तेमाल एक जगह से दूसरी जगह मैसेज भेजने में भी किया जा सकता है। मोर्स ने अपने इस आइडिया पर काम करना शुरू किया जिसमें न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के उनके दोस्त लैनर्ड गेल और अल्फ्रेड वेल ने उनकी मदद की।
आखिरकार सालों की मेहनत के बाद मोर्स टेलीग्राफ का एक प्रोटोटाइप बनाने में कामयाब हुए। उन्होंने अंग्रेजी के हर अक्षर के लिए छोटी-बड़ी लाइन और डॉट्स का कॉम्बिनेशन बनाया जिसे मोर्स कोड नाम दिया गया। मैसेज भेजने के लिए हर अक्षर के लिए अलग-अलग खांचे बनाए गए। एक-एक अक्षर को जमाकर शब्द बनाया जाता था और इसी तरह पूरा मैसेज लिखा जाता था।
इन खांचों के ऊपर से एक इलेक्ट्रिक पट्टी को गुजारा जाता था जो खांचों के आकार के हिसाब से इलेक्ट्रिक सर्किट को बंद चालू कर देती थी। जब सर्किट चालू होता तो रिसीवर एंड पर लाइन और डॉट बनने लगते। इसी तरह एक-एक अक्षर लाइन और डॉट्स के जरिए एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता।
1991: जर्मनी की राजधानी का फैसला
साल 1989 में बर्लिन की दीवार ढहा दी गई। ये दीवार पूर्वी और पश्चिमी जर्मनी को एक-दूसरे से अलग करती थी। दीवार गिरने से जर्मनी एक तो हुआ लेकिन एक नई समस्या ये थी कि अब जर्मनी की राजधानी किसे बनाया जाए। इससे पहले पश्चिमी जर्मनी की राजधानी बोन और पूर्वी जर्मनी की राजधानी बर्लिन थी। आखिरकार फैसला लिया गया कि इस बारे में संसद में वोटिंग करवाई जाए और दोनों में से जिसे ज्यादा वोट मिलेंगे वो जर्मनी की राजधानी होगी।
आज ही के दिन साल 1991 में संसद में वोटिंग हुई। बर्लिन के पक्ष में 337 वोट और बोन के पक्ष में 320 वोट पड़े। बहुमत के आधार पर फैसला हुआ कि बर्लिन ही नए जर्मनी की राजधानी बनेगा। उसके बाद से आज तक बर्लिन ही जर्मनी की राजधानी है।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 20 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1756: ब्लैक होल त्रासदी- नवाब सिराजुद्दौला की सेना ने फोर्ट विलियम पर पूरी तरह नियंत्रण किया था और जीवित बचे अंग्रेज अधिकारियों के दावों के अनुसार, 20 जून की रात को ही उन्हें उस छोटी कोठरी में बंद किया गया था, जिनके शव अगले दिन (21 जून की सुबह) निकाले गए थे। इतिहास की किताबों में यह घटना ’20 जून’ की तारीख से ही दर्ज है।
1837: महारानी विक्टोरिया का राज्यारोहण: किंग विलियम चतुर्थ का निधन 20 जून 1837 को तड़के सुबह 2:12 बजे हुआ था। नियमों के अनुसार, उसी दिन सुबह (मात्र 18 वर्ष की आयु में) विक्टोरिया को ब्रिटेन की महारानी घोषित कर दिया गया था (हालांकि उनका भव्य राज्याभिषेक अगले वर्ष 28 जून 1838 को हुआ था)। इसलिए इतिहास में उनका शासनकाल 20 जून 1837 से ही गिना जाता है। 1901 तक वे इस पद पर रहीं।
1840: सैमुअल मोर्स को टेलीग्राफ का पेटेंट मिला- लंबी दूरी तक संदेश भेजने की तकनीक में क्रांति लाने वाले अमेरिकी आविष्कारक सैमुअल मोर्स को उनके टेलीग्राफ (Telegraph) के लिए आधिकारिक पेटेंट मिला था। उन्होंने ही ‘मोर्स कोड’ का आविष्कार भी किया था।
1858: ग्वालियर में 1857 के भारतीय विद्रोह के अंतिम विद्रोहियों ने आत्मसमर्पण किया। 17-18 जून को कोटा-की-सराय के युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई की शहादत के बाद, ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज की कमान में अंग्रेजी सेना ने ग्वालियर को चारों तरफ से घेर लिया था। 20 जून 1858 को अंग्रेजों ने ग्वालियर के किले पर पूरी तरह से पुनः कब्जा कर लिया, जिसे सर दिनकर राव ने वापस सिंधिया राजा को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की।
1877: अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने कनाडा के ओंटारियो में दुनिया का पहला वाणिज्यिक टेलीफोन सेवा शुरू की।
1893: दुनिया के पहले ‘जायंट व्हील’ (Ferris Wheel) की शुरुआत- शिकागो में आयोजित ‘वर्ल्ड कोलंबियन एक्सपोजिशन’ में दुनिया का पहला विशाल लोहे का झूला (फेरिस व्हील), जिसे जॉर्ज वाशिंगटन गेल फेरिस जूनियर ने डिजाइन किया था जनता के लिए खोला गया था। यह उस समय इंजीनियरिंग का एक बड़ा चमत्कार माना गया था।
1895: कैरोलिना विलर्ड बाल्डविन ने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से पीएचडी की। किसी अमेरिकी यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाली वे पहली महिला हैं।
1916: पुणे में एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
1921: चेन्नई (मद्रास) की बकिंघम और कर्नाटक मिल हड़ताल: भारतीय मजदूर आंदोलन के इतिहास की यह एक बहुत बड़ी घटना थी। कम मजदूरी और खराब कामकाजी परिस्थितियों के खिलाफ मिल के कताई विभाग के श्रमिकों ने आज ही के दिन से चार महीने लंबी चलने वाली एक ऐतिहासिक हड़ताल शुरू की थी, जिसका नेतृत्व प्रसिद्ध राष्ट्रवादी वी. कल्याणासुंदरम मुदलियार ने किया था।
1990: ईरान में भूकंप से 40 हजार से अधिक मरे।
1994: ईरान की मस्जिद में हुए बम विस्फोट में 70 की मौत।
1999: ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल खेला गया। ऑस्ट्रेलिया ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हराकर वर्ल्ड कप जीता।
2012: लीबिया में सामुदायिक हिंसा में 105 लोगों की मौत, 500 घायल।
2014: प्रख्यात कवि केदारनाथ सिंह को ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा की।
2026: फुटपाथ पर चलने का अधिकार- भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पैदल यात्रियों के हित में एक अभूतपूर्व फैसला आया। देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सुरक्षित और सुगम फुटपाथ पर चलना नागरिकों का एक ‘मौलिक अधिकार’ है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(d) (आवागमन की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवेन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता) के अंतर्गत आता है। कोर्ट ने शहरी नियोजन में मोटर वाहनों की तुलना में पैदल यात्रियों को प्राथमिकता देने का कड़ा निर्देश दिया।
20 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 20 June)
1869: लक्ष्मण काशीनाथ किर्लोस्कर – भारत के प्रसिद्ध उद्योगपति, किर्लोस्कर उद्योग समूह’ के संस्थापक। ‘किर्लोस्कर ग्रुप’ (जो भारत में पंप, इंजन और लोहे के हल बनाने वाली शुरुआती बड़ी कंपनियों में से एक थी)। लक्ष्मणराव काशीनाथ किर्लोस्कर का जन्म बेलगाम (अब कर्नाटक) के एक छोटे से गांव में हुआ था। उन्होंने भारतीय कृषि और उद्योग के आधुनिकरण में बड़ी भूमिका निभाई।
1910: भुवनेश्वर – हिंदी के प्रसिद्ध एकांकीकार।
1923: गौर किशोर घोष – कुशल पत्रकार तथा लेखक।
1952: विक्रम सेठ – पद्म श्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित भारत के प्रसिद्ध उपन्यासकार और कवि। उनका जन्म कोलकाता में हुआ था। उनका उपन्यास “ए सूटेबल बॉय” (A Suitable Boy) अंग्रेजी साहित्य के सबसे लंबे और चर्चित उपन्यासों में गिना जाता है।
1958: द्रौपदी मुर्मू – भारत की राष्ट्रपति।
20 जून को हुए निधन (Died on 20 June)
1965: वेंकटेश नारायण तिवारी – हिन्दी के ध्वजवाहक, पत्रकार और साहित्यकार थे।
20 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 20 June)
विश्व शरणार्थी (रिफ्यूजी) दिवस
विश्व शरणार्थी दिवस, प्रत्येक वर्ष 20 जून को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय पर्व है। 4 दिसंबर 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने निर्णय लिया कि 2000 से, 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। विश्व शरणार्थी दिवस का उद्देश्य संघर्ष या उत्पीड़न के कारण विस्थापित हुए शरणार्थियों का सम्मान करना है।
पृष्ठभूमि: यह पहली बार 20 जून, 2001 को शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित वर्ष 1951 के अभिसमय की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में मनाया गया था।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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