29 June in History: ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 29 जून वर्ष का 180वां (लीप वर्ष में यह 181वां) दिन है। साल में अभी 185 दिन शेष हैं। भारत और विश्व इतिहास में 29 जून का खास महत्व है, क्योंकि इस दिन कई महत्वपूर्ण घटनाएं घटी जो इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज होकर रह गईं हैं।
आज का इतिहास में जानिए आज के दिन जन्मे चर्चित व्यक्ति, प्रसिद्ध व्यक्तियों के निधन, युद्ध संधि, किसी देश की आजादी, नई तकनिकी का अविष्कार, सत्ता का बदलना, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दिवस के बारे में। आईए हिमाचल न्यूज़ में पढ़ें भारत और विश्व इतिहास के पन्नों में दर्ज 29 जून का इतिहास एवं घटनाक्रम।
29 जून की प्रमुख घटनाएं (What Happened on 29 June in History)
2007: एपल ने लॉन्च किया था पहला आईफोन, दुनिया ने पहली बार किसी फोन के लिए देखी थी इतनी दीवानगी, एपल स्टोर्स पर लग गई थीं लंबी-लंबी लाइनें
साल 2007…टेक कंपनी एपल इस समय ऐसी तकनीक बनाने में जुटी थी जो मैक में माउस और की बोर्ड की जगह इनपुट के लिए कोई नया तरीका दे सके। कंपनी इसके लिए मल्टीटच टेक्नीक पर काम कर रही थी जिसमें आप उंगली की मदद से स्क्रीन को टच कर मैक को ऑपरेट कर सकते थे। कंपनी ने इस तकनीक का पहला प्रोटोटाइप मॉडल-035 बनाया।
लेकिन उसी समय दुनियाभर में मोबाइल का मार्केट बढ़ने लगा था। इसी को देखते हुए कंपनी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और फैसला लिया गया कि मल्टीटच टेक्नीक को मैक की बजाय मोबाइल के लिए लॉन्च किया जाएगा।
ऐसा करने के पीछे एक और वजह थी। दरअसल उस समय एपल का आईपॉड धूम मचा रहा था। 2005 में 4 करोड़ आईपॉड की बिक्री हुई थी। कंपनी ने उस समय देखा कि कई लोगों की जेब में कॉल करने के लिए एक मोबाइल और गाने सुनने के लिए आईपॉड होता था।
उस समय मोबाइल में गाने स्टोर करने की सुविधा नहीं थी। एपल को पता था कि जल्द ही कस्टमर ऐसे मोबाइल की डिमांड करेंगे, जिसमें वो गाने भी सुन सकें ताकि जेब में दो-दो गैजेट न रखना पड़ें। एपल अब मोबाइल फोन मार्केट में उतरने का फैसला ले चुका था।
लेकिन ये काम बेहद जटिल था। एपल ने इससे पहले इस मार्केट में कोई काम नहीं किया था। एपल के टॉप इंजीनियर्स की टीम इस काम में जुटी। इस फोन के लिए एपल ने नया हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, इंटरफेस और टचस्क्रीन जैसे सभी बड़े बदलाव किए। पूरे प्रोजेक्ट को ‘प्रोजेक्ट पर्पल’ नाम दिया गया।
एपल के लिए ये फैसला बेहद जोखिम भरा था। अगर ये प्रोजेक्ट फेल होता तो कंपनी पूरी तरह बर्बाद हो जाती। इसलिए फैसला लिया गया कि प्रोजेक्ट पर्पल के भी 2 हिस्से होंगे। एक P1 दूसरा P2. P1 की टीम को आइपैड नैनो पर काम करने की जिम्मेदारी दी गई और P2 टीम को 035 मॉडल पर। कंपनी ने इस पूरे प्रोजेक्ट को बेहद गोपनीय रखा।
महीनों की मेहनत के बाद टीम P1 ने आईपॉड में कुछ बदलाव किए लेकिन स्टीव जॉब्स ने इसे रिजेक्ट कर दिया। दरअसल P1 का मॉडल टचस्क्रीन नहीं था और स्टीव जॉब्स फैसला कर चुके थे कि एपल का पहला फोन टचस्क्रीन ही होगा। अब पूरी टीम प्रोजेक्ट P2 पर फोकस करने लगी।
महीनों की मेहनत धीरे-धीरे रंग ला रही थी। 2007 के शुरुआती महीनों में आईफोन बनकर तैयार था। 9 जनवरी को एपल ने घोषणा की कि कंपनी जून में आईफोन लॉन्च करेगी। 2007 में आज ही के दिन आईफोन पहली बार लोगों के सामने आया। अमेरिका में एपल के स्टोर्स पर लंबी-लंबी लाइनें लग गईं। दुनिया ने पहली बार किसी फोन के लिए लोगों में इतना पागलपन देखा था।
इस आईफोन में कंपनी ने 3.5 इंच का टचस्क्रीन डिस्प्ले और 2 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया था। फोन को 4GB और 8GB स्टोरेज के दो वैरिएंट में लॉन्च किया गया था। इसमें बैक और एग्जिट के लिए होम बटन दिया था, जो बाद में आईफोन का आइकॉनिक बटन भी बन गया।
इस फोन ने मोबाइल फोन इस्तेमाल करने का पूरा तरीका ही बदल दिया। बटन वाले फोन की जगह टचस्क्रीन फोन ने ले ली थी जो उंगलियों के इशारों पर नाचता था। एपल का ये फोन बेहद हिट रहा। आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती 15 महीनों में ही एपल ने करीब 60 लाख आईफोन बेचे थे।
2008: दुनिया के पहले प्रेग्नेंट पुरुष ने बेटी को जन्म दिया
अमेरिका के हवाई में साल 1974 में थॉमस बिटी का जन्म हुआ था। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई से हेल्थ साइंस में ग्रेजुएशन किया था। जन्म के समय बिटी एक लड़की थे, लेकिन असल में वे एक ट्रांसजेंडर थे और साल 1997 में उन्होंने इस बात का खुलासा किया था।
2002 में उन्होंने सर्जरी के जरिए अपना जेंडर चेंज करवा लिया और अब वे एक पुरुष बन गए थे, लेकिन उन्होंने अपने फीमेल रिप्रोडक्टिव ऑर्गन में कोई बदलाव नहीं करवाया था। यानी वो एक पुरुष तो बन गए थे लेकिन एक महिला की तरह उनमें बच्चे पैदा करने की काबिलियत भी थी।
अगले ही साल बिटी ने नैंसी से शादी कर ली। शादी के बाद बिटी ने फैसला लिया कि बच्चे की मां वे खुद बनेंगे। उन्होंने आर्टिफिशियल इंसीमिनेशन के जरिए गर्भधारण किया। जब बिटी ने सार्वजनिक तौर पर बताया कि वे प्रेग्नेंट हैं तो वे पूरे मीडिया जगत में छा गए। ये अपनी तरह का पहला मामला था इसलिए बिटी एक सेलिब्रिटी बन गए थे।
आज ही के दिन साल 2008 में बिटी ने लड़की को जन्म दिया। इतिहास में ये पहली बार हुआ था जब एक पुरुष ने अपनी संतान को जन्म दिया था। इसके बाद 2009 और 2010 में बिटी ने दो लड़कों को जन्म दिया।
साभार: दैनिक भास्कर
देश-विदेश में 29 जून को इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है
1613: लंदन में शेक्सपियर के नाटक ‘हेनरी एथ’ के मंचन के दौरान एक थिएटर तोप से निकली चिंगारी के कारण ‘ग्लोब थिएटर’ की फूस की छत में आग लग गई और पूरा थिएटर जलकर नष्ट हो गया था। (इसे बाद में दोबारा बनाया गया)।
1855: डेली टेलीग्राफ अखबार का लंदन में प्रकाशन शुरू किया गया।
1863: पहला नेशनल बैंक डेवनपोर्ट आयोवा में खोला गया।
1864: कनाडा क्यूबेक के मोंट सेंट हिलेरी कस्बे के नजदीक ग्रांड ट्रंक रेलवे लाइन पर एक ट्रेन के रिशेल्यू नदी में गिर जाने से करीब 100 लोगों की मौत हो गयी।
1974: मारिया एस्तेला ईसाबेल मार्टिनेज़ दी पेरोन ने अर्जेन्टीना की अंतरिम राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ली थी। मारिया अर्जेन्टीना की पहली महिला राष्ट्रपति बनी।
1976: हिंद महासागर में स्थित द्वीपीय देश सेशेल्स को यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के औपनिवेशिक शासन से पूरी तरह स्वतंत्रता मिली थी और यह एक स्वतंत्र गणराज्य बना था।
1997: भारतीय चेस खिलाड़ी विश्वनाथन आनंद ने फ्रैंकफर्ट चेस क्लासिक का खिताब जीता। आनंद 5 बार वर्ल्ड चेस चैंपियनशिप के विजेता रहे हैं।
2000: विश्व की प्रमुख कंपनी आईबीएम (IBM) द्वारा विश्व का सबसे तेज कम्प्यूटर निर्मित।
2002: अटल सरकार में गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को उप-प्रधानमंत्री बनाया गया। आडवाणी देश के सातवें उप-प्रधानमंत्री थे।
2010: छत्तीसगढ़ में माओवादी हमले में 26 जवान शहीद हुए।
2011: अमेरिका ने भारत को मानव तस्करी की वॉच लिस्ट से बाहर किया।
2014: सायना नेहवाल ने ऑस्ट्रेलियन सुपर सीरीज जीती।
2020: गैलवान घाटी गतिरोध के बाद, भारत सरकार ने देश की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा का हवाला देते हुए टिकटॉक, शेयरइट, यूसी ब्राउज़र और कैमस्कैनर सहित 59 चीनी मोबाइल ऐप्स पर आधिकारिक रूप से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
2024: भारत ने दक्षिण अफ्रीका को 7 रनों से हराकर ICC Men’s T20 World Cup 2024 का खिताब अपने नाम किया। इस ऐतिहासिक जीत के तुरंत बाद विराट कोहली, रोहित शर्मा और रवींद्र जडेजा ने टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अपने संन्यास की आधिकारिक घोषणा की थी।
29 जून को जन्मे व्यक्ति (Born on 29 June)
1861: देवकीनन्दन खत्री – हिन्दी के प्रथम तिलिस्मी लेखक।
1893: पी. सी. महालनोबिस – ‘आंकड़ों के जादूगर’ के नाम से प्रसिद्ध भारत के प्रख्यात सांख्यिकीविद। प्रशांत चंद्र महालनोबिस (P. C. Mahalanobis) का जन्म 29 जून 1893 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) की स्थापना की थी और भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना का मसौदा तैयार किया था। भारत सरकार उनके जन्मदिन को हर साल ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस’ (National Statistics Day) के रूप में मनाती है।
1901: राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी – भारत के अमर शहीद प्रसिद्ध क्रांतिकारी।
1945: चंद्रिका कुमारतुंगा– श्रीलंका की पहली महिला राष्ट्रपति (1994 से 2005 तक) इससे पहले वे देश की प्रधानमंत्री भी रहीं। वे श्रीलंका के पूर्व प्रधानमंत्री एस.डब्ल्यू.आर.डी. भंडारनाइके और दुनिया की पहली महिला प्रधानमंत्री सिरिमावो भंडारनाइके की बेटी हैं।
29 जून को हुए निधन (Died on 29 June)
1961: सरदार बलदेव सिंह – भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, राजनीतिज्ञ एवं प्रथम रक्षामंत्री थे।
1966: दामोदर धर्मानंद कोसांबी – भारत के प्रसिद्ध विद्वान, भाषा-वैज्ञानिक और गणितज्ञ।
1988: गवरी देवी – राजस्थान की प्रसिद्ध मांड गायिका।
2016: के.जी. सुब्रह्मण्यम – भारतीय मूर्तिकार और भित्ति चित्रकार थे।
29 जून के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव (Important events and festivities of 29 June)
राष्ट्रीय सांखियकी दिवस
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस (National Statistics Day) भारत के महान वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस (P. C. Mahalanobis) की जयंती के सम्मान में मनाया जाता है। भारत सरकार ने साल 2007 में आधिकारिक तौर पर 29 जून को इस दिवस के रूप में अधिसूचित किया था। इसका मुख्य उद्देश्य देश की नीतियों, आर्थिक नियोजन (Economic Planning) और विकास के खाके में डेटा और सांख्यिकी के महत्व के प्रति जनता, विशेषकर युवा पीढ़ी को जागरूक करना है। सांख्यिकी मंत्रालय (MoSPI) द्वारा इस दिन राष्ट्रीय स्तर पर संगोष्ठियां आयोजित की जाती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय दिवस
अंतर्राष्ट्रीय उष्णकटिबंधीय दिवस (International Day of the Tropics) हर साल 29 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2016 में स्थापित यह दिन, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों की असाधारण जैव विविधता और उनके सामने आने वाली चुनौतियों (जैसे जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई) के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा वर्ष 2016 में आधिकारिक रूप से 29 जून को इस दिवस के रूप में घोषित किया गया था।
प्रस्तुति
हिमाचल न्यूज़ रिसर्च डेस्क
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